Lucknow : केशव प्रसाद मौर्य ने काल्मीकिया में ग्रीन तारा देवी की प्रतिमा को नमन किया

उप मुख्यमंत्री ने कहा कि भगवान बुद्ध का शांति, करुणा और मानवता का संदेश सम्पूर्ण विश्व के लिए प्रेरणादायी है। काल्मीकिया, रूस में पवित्र अवशेषों की प्रदर्शनी से भार

By INA News Desk
Oct 12, 2025 - 22:56
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Lucknow : केशव प्रसाद मौर्य ने काल्मीकिया में ग्रीन तारा देवी की प्रतिमा को नमन किया
केशव प्रसाद मौर्य ने काल्मीकिया में ग्रीन तारा देवी की प्रतिमा को नमन किया

लखनऊ : उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने काल्मीकिया गणराज्य, रूस के एलिस्ता शहर में निर्माणाधीन भगवान बुद्ध पार्क में माता ग्रीन तारा देवी की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर नमन किया। उन्होंने मंदिर और पार्क निर्माण की प्रगति तथा इससे जुड़े विषयों की विस्तृत जानकारी ली। करुणा और ज्ञान की अधिष्ठात्री मां ग्रीन तारा से सभी के जीवन में समृद्धि और मंगलमय ऊर्जा का आशीर्वाद देने की प्रार्थना की।केशव प्रसाद मौर्य प्रतिनिधिमंडल के साथ भगवान बुद्ध के अवशेष लेकर शनिवार को रूस के काल्मीकिया गणराज्य की राजधानी एलिस्ता पहुंचे। वहां प्रतिनिधिमंडल सहित पवित्र अवशेषों का भव्य स्वागत किया गया। उप मुख्यमंत्री के नेतृत्व में गए प्रतिनिधिमंडल ने एलिस्ता स्थित गोल्डन एबोड ऑफ शाक्यमुनि बुद्ध मंदिर परिसर में भगवान बुद्ध के पवित्र पिपरहवा अवशेषों को प्रदर्शनी के लिए स्थापित किया। उन्होंने सम्बोधन दिया और प्रेस सम्मेलन भी किया।उप मुख्यमंत्री ने कहा कि भगवान बुद्ध का शांति, करुणा और मानवता का संदेश सम्पूर्ण विश्व के लिए प्रेरणादायी है। काल्मीकिया, रूस में पवित्र अवशेषों की प्रदर्शनी से भारत और रूस के सांस्कृतिक तथा राजनीतिक रिश्तों में और गहराई आएगी। एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक और आध्यात्मिक उपलब्धि के रूप में, भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेष शनिवार को भारत से भारतीय वायुसेना के विशेष विमान द्वारा राजधानी एलिस्ता पहुंचे। इससे रूस के काल्मीकिया गणराज्य में आठ दिवसीय प्रदर्शनी का शुभारंभ हो गया।भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेषों के साथ वरिष्ठ भारतीय भिक्षुओं का उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल भी गया है। यह स्थानीय श्रद्धालुओं से बातचीत करेगा, महत्वपूर्ण विमर्श करेगा और धार्मिक सेवा का संचालन करेगा। प्रतिनिधिमंडल सप्ताह के दौरान अन्य गतिविधियों की मेजबानी करेगा। इनमें शाक्य संप्रदाय के प्रमुख, परम पावन 43वें शाक्य त्रिजन रिनपोछे द्वारा दिए जाने वाले उपदेश और प्रवचन शामिल हैं। पवित्र 'कंजूर' की प्रस्तुति होगी, जो मंगोलियाई धार्मिक ग्रंथ है। यह 108 खंडों का सेट है, जिसका मूल रूप से तिब्बती भाषा से अनुवाद किया गया था। संस्कृति मंत्रालय के पांडुलिपि प्रभाग द्वारा ये कंजूर नौ बौद्ध संस्थानों और एक विश्वविद्यालय को भेंट किए जाएंगे।रूसी गणराज्य में पहली बार आयोजित हो रही पवित्र अवशेषों की प्रदर्शनी भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय द्वारा अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध परिसंघ (आईबीसी), राष्ट्रीय संग्रहालय और इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (आईजीएनसीए) के सहयोग से हो रही है। यह एलिस्ता में आयोजित हो रही है। पवित्र अवशेषों को एलिस्ता के मुख्य बौद्ध मठ में स्थापित किया गया है, जिसे गेडेन शेडुप चोइकोरलिंग मठ के नाम से जाना जाता है। इसे "शाक्यमुनि बुद्ध का स्वर्णिम निवास" भी कहा जाता है। यह एक महत्वपूर्ण तिब्बती बौद्ध केंद्र है, जिसे 1996 में जनता के लिए खोला गया था और यह काल्मीक मैदानों से घिरा हुआ है।केंद्रीय बौद्ध आध्यात्मिक प्रशासन और अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध परिसंघ के बीच समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर होने की संभावना है। बौद्ध डाक टिकटों की एक अनूठी प्रदर्शनी भी दिखाई जा रही है, जिसमें विभिन्न देशों के बौद्ध डाक टिकट शामिल हैं। आयोजन स्थल पर भारतीय राष्ट्रीय संग्रहालय और भारत में राष्ट्रीय पांडुलिपि मिशन द्वारा प्रस्तुत बौद्ध कला के खजाने - 'बोधिचित्त' पर एक प्रदर्शनी भी दिखाई जा रही है। यह आगंतुकों को भारत की समृद्ध बौद्ध सांस्कृतिक विरासत से गहराई से जुड़ने का अनूठा अवसर प्रदान करती है।उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य 10-11 अक्टूबर की रात दिल्ली से काल्मीकिया के लिए रवाना हुए। प्रस्थान से पूर्व पालम एयरपोर्ट पर उन्होंने पूज्य भिक्षुगणों के साथ भगवान बुद्ध के पवित्र पिपरहवा अवशेषों का पूजन किया। इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री ने कहा कि उनके जीवन का यह सौभाग्यशाली क्षण है, जब भगवान तथागत बुद्ध के पवित्र अवशेष लेकर रूस (काल्मीकिया) जाने का मौका मिला है, जहां यूरोप का सबसे बड़ा भगवान तथागत बुद्ध का मंदिर है। वरिष्ठ भिक्षुगणों के साथ जाने का अवसर मिला है। इसके लिए उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को हृदय से धन्यवाद दिया। कहा कि यह अवशेष उत्तर प्रदेश के पिपरहवा से हैं, जो कपिलवस्तु की राजधानी हुआ करती थी। इनका लंबा इतिहास है। जब ये अवशेष हांगकांग से वापस प्राप्त हुए, उसी दिन प्रधानमंत्री ने इसे गर्व का दिन कहा। जब से देश की बागडोर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संभाली है, तब से संयुक्त राष्ट्र संघ का मंच हो या दुनिया के अन्य देश जहां बुद्ध के अनुयायी हैं, वहां उन्होंने जाकर बौद्ध संदेश दिया है।उन्होंने कहा कि भारत और रूस का गहरा राजनीतिक संबंध बहुत पुराना है। हर समय जब भारत को जरूरत पड़ी तो रूस साथ खड़ा रहा और जब रूस को जरूरत पड़ी तो भारत साथ खड़ा रहा। यह संबंधों को और मजबूत करेगा। पवित्र अवशेषों की प्रदर्शनी के महत्व पर चर्चा करते हुए कहा कि इससे द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने के साथ सांस्कृतिक और राजनीतिक रिश्तों में गहराई आएगी। सभ्यतागत विरासत को पुनः स्थापित करना और भारत को बौद्ध धर्म की जन्मभूमि तथा परंपरा का संरक्षक स्थापित करना है। वैश्विक शांति और सद्भाव का वातावरण मजबूत करना है। भगवान बुद्ध के संदेश करुणा, शांति और अहिंसा को विश्वभर में प्रसारित करना है। भगवान बुद्ध के कपिलवस्तु अवशेष पिपरहवा (उत्तर प्रदेश) से प्राप्त हुए, जिसे प्राचीन कपिलवस्तु नगरी से जोड़ा जाता है। ये अवशेष पुरातात्विक रूप से प्रमाणित हैं और वैश्विक बौद्ध समुदाय के लिए पूज्यनीय धरोहर हैं। यह भगवान बुद्ध के जीवन से प्रत्यक्ष जुड़ाव का प्रतीक हैं। काल्मीकिया ऐसा क्षेत्र है, जहां बौद्ध जनसंख्या बहुत अधिक है। यहां बौद्ध धर्म केवल धर्म ही नहीं बल्कि संस्कृति और परंपरा का हिस्सा है।

उपमुख्यमंत्री ने कहा कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2014 से देश की बागडोर संभालने के बाद भारतीय संस्कृति और सभ्यता का विश्व भर में मान-सम्मान बढ़ाने का प्रयास कर रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र महासंघ में मोदी ने कहा था कि दुनिया को भारत ने बुद्ध दिया, युद्ध नहीं दिया। देश, प्रदेश और समाज की उन्नति के लिए भगवान बुद्ध की शरण में आना पड़ेगा। भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेषों की थाईलैंड और वियतनाम में प्रदर्शनी हो चुकी है। इन आयोजनों से अन्य देशों से राजनीतिक रिश्तों के साथ आध्यात्मिक रिश्ते भी मजबूत हुए हैं। भगवान बुद्ध सम्पूर्ण मानवता के लिए भारत की सबसे अनमोल धरोहर है। करुणा, दया और शांति पर आधारित उनका दर्शन आज भी समाज को सह-अस्तित्व और मानवीय संवेदनाओं का सशक्त संदेश देता है।

सम्राट अशोक ने जिस बौद्ध धारा से दक्षिण पूर्व और मध्य एशिया को आलोकित किया था, आज उसी विरासत को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वैश्विक मंच पर आगे बढ़ा रहे हैं। पिपरहवा, जिसे भगवान बुद्ध के जन्म स्थान कपिलवस्तु से जोड़ा जाता है, से प्राप्त अवशेष तथागत की स्मृति और भारत की सांस्कृतिक चेतना को जोड़ते हैं। आज के परिपेक्ष्य में भगवान बुद्ध का संदेश और भी प्रासंगिक है। उनका दर्शन केवल आस्था नहीं, बल्कि तर्क, अनुभव और आचरण पर आधारित जीवन शैली है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने एक बार फिर साबित किया है कि भारत अपनी धरोहर का सम्मान करता है और उसी के बल पर पूरी दुनिया को शांति, करुणा और सह-अस्तित्व का मार्ग दिखाने की क्षमता रखता है।

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