देश के 70 हवाई अड्डों की सुरक्षा में बड़ा बदलाव, 12 हजार CISF जवानों को हटाए जाने का प्रस्ताव।
भारतीय विमानन क्षेत्र की सुरक्षा का जिम्मा संभालने वाली सर्वोच्च संस्था, ब्यूरो ऑफ सिविल एविएशन सिक्योरिटी (BCAS) ने हाल ही में देश
- आधुनिक तकनीक और ऑटोमेशन के सहारे एयरपोर्ट सुरक्षा, BCAS के रिव्यू के बाद सुरक्षा बलों की संख्या में कटौती की तैयारी
- दिल्ली-मुंबई समेत बड़े एयरपोर्ट्स पर तैनात 50 हजार जवानों में से 25 प्रतिशत घटेंगे, मंत्रालय में मंथन शुरू
भारतीय विमानन क्षेत्र की सुरक्षा का जिम्मा संभालने वाली सर्वोच्च संस्था, ब्यूरो ऑफ सिविल एविएशन सिक्योरिटी (BCAS) ने हाल ही में देश के प्रमुख हवाई अड्डों का एक विस्तृत सुरक्षा निरीक्षण संपन्न किया है। इस रिव्यू रिपोर्ट के आधार पर यह सुझाव दिया गया है कि वर्तमान में तैनात लगभग 50,000 CISF जवानों में से करीब 12,000 जवानों को उनके मौजूदा कर्तव्यों से मुक्त किया जा सकता है। यह कटौती केवल छोटे शहरों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे और मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे जैसे व्यस्तम केंद्र भी शामिल हैं। सुरक्षा बलों की संख्या में इस संभावित कमी को लेकर संबंधित एजेंसियों के बीच एक विस्तृत सूची साझा की जा चुकी है, जिस पर अब अंतिम निर्णय लिया जाना शेष है।
सुरक्षा बलों की संख्या कम करने के पीछे का सबसे बड़ा तर्क अत्याधुनिक तकनीक का समावेश है। पिछले कुछ वर्षों में भारतीय हवाई अड्डों पर फुल बॉडी स्कैनर, एडवांस एक्स-रे मशीनें और बायोमेट्रिक पहचान प्रणाली जैसे कि 'डिजी यात्रा' को बड़े पैमाने पर लागू किया गया है। अधिकारियों का मानना है कि इन तकनीकों के आने से मैन्युअल चेकिंग और कतार प्रबंधन में लगने वाले जवानों की जरूरत कम हो गई है। उदाहरण के लिए, जहाँ पहले बोर्डिंग पास चेक करने के लिए कई जवानों की आवश्यकता होती थी, अब वहां ई-गेट्स और फेशियल रिकग्निशन तकनीक ने काम संभाल लिया है। इस बदलाव से न केवल यात्रियों का समय बच रहा है, बल्कि सुरक्षा एजेंसियों को अपने प्रशिक्षित जवानों को अधिक महत्वपूर्ण और रणनीतिक कार्यों में लगाने का अवसर भी मिल रहा है।
नागर विमानन मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, इस प्रस्ताव पर अमल करने से पहले सभी पहलुओं की बारीकी से जांच की जा रही है। सुरक्षा ऑडिट में उन क्षेत्रों की पहचान की गई है जिन्हें 'गैर-प्रमुख' या 'नॉन-कोर' ड्यूटी माना जाता है। इनमें सीसीटीवी मॉनिटरिंग के कुछ हिस्से, कतार प्रबंधन और प्रवेश द्वारों पर तैनात अतिरिक्त कर्मी शामिल हैं। इन पदों से जवानों को हटाकर उनके स्थान पर निजी सुरक्षा गार्डों की तैनाती या पूरी तरह से ऑटोमेटेड सिस्टम का उपयोग करने पर विचार चल रहा है। इसका एक बड़ा वित्तीय लाभ भी है, क्योंकि CISF जवानों की तैनाती का खर्च संबंधित एयरपोर्ट ऑपरेटर को उठाना पड़ता है। बलों की संख्या कम होने से एयरपोर्ट ऑपरेटरों पर वित्तीय बोझ कम होगा, जिसका सीधा लाभ भविष्य में हवाई यात्रियों को कम 'पैसेंजर सर्विस फीस' के रूप में मिल सकता है।
- सुरक्षा और बजट के बीच संतुलन
नागरिक उड्डयन सुरक्षा में यह बदलाव वैश्विक मानकों के अनुरूप है, जहाँ कई विकसित देशों में हवाई अड्डों की आंतरिक सुरक्षा के लिए तकनीक और निजी सुरक्षा का मिश्रण इस्तेमाल किया जाता है। भारत में अब तक CISF ही सुरक्षा का मुख्य आधार रही है, लेकिन बढ़ते ट्रैफिक और हवाई अड्डों की बढ़ती संख्या के कारण बल पर दबाव भी बढ़ रहा है। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि जवानों को हटाना तभी सुरक्षित होगा जब तकनीक पूरी तरह से त्रुटिहीन हो और आपातकालीन स्थितियों के लिए क्विक रिस्पांस टीम (QRT) की मुस्तैदी में कोई कमी न आए।
सुरक्षा समीक्षा की यह सूची अब गृह मंत्रालय और नागरिक उड्डयन मंत्रालय के पास विचाराधीन है। इस चर्चा का एक महत्वपूर्ण बिंदु यह है कि क्या वर्तमान वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य में इतनी बड़ी संख्या में प्रशिक्षित जवानों को हटाना जोखिम भरा तो नहीं होगा। विशेष रूप से पड़ोसी देशों के साथ तनाव और अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद की चुनौतियों को देखते हुए, सुरक्षा के साथ किसी भी प्रकार का समझौता घातक सिद्ध हो सकता है। सुरक्षा बलों के वरिष्ठ अधिकारियों का मत है कि तकनीक केवल मानव बुद्धि की पूरक हो सकती है, उसका विकल्प नहीं। इसलिए, जवानों को हटाने की प्रक्रिया बहुत ही व्यवस्थित और चरणबद्ध तरीके से होनी चाहिए ताकि किसी भी स्तर पर सुरक्षा में कोई सेंध न लग सके।
हवाई अड्डों पर तैनात कुल 50 हजार जवानों में से 12 हजार का आंकड़ा काफी बड़ा माना जा रहा है। यदि यह प्रस्ताव पूरी तरह लागू होता है, तो यह विमानन सुरक्षा के इतिहास में अब तक का सबसे बड़ा मैनपावर पुनर्गठन होगा। इस योजना के तहत हटाए गए जवानों को देश के अन्य महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों जैसे परमाणु केंद्रों, मेट्रो रेल नेटवर्क या नए बन रहे हवाई अड्डों पर तैनात किया जा सकता है, जहाँ वर्तमान में सुरक्षा बलों की कमी महसूस की जा रही है। इससे CISF के संसाधनों का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित हो सकेगा। सरकार यह सुनिश्चित करने की कोशिश कर रही है कि सुरक्षा का घेरा कमजोर न हो और यात्रियों का भरोसा भी बना रहे।
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