व्हाइट हाउस का बड़ा यू-टर्न: ट्रंप ने ईरान की 10 सूत्रीय योजना को माना 'व्यावहारिक', युद्ध पर लगी रोक।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के साथ 14 दिनों के संघर्ष विराम की घोषणा अंतरराष्ट्रीय राजनीति के इतिहास में सबसे अप्रत्याशित
- ईरान की कूटनीतिक फतह: होर्मुज जलडमरूमध्य से लेकर परमाणु संवर्धन तक, अमेरिका ने दिखाई नरमी
- इस्लामाबाद में तय होगी शांति की रूपरेखा: पाकिस्तान की मध्यस्थता से टला वैश्विक महायुद्ध का खतरा
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के साथ 14 दिनों के संघर्ष विराम की घोषणा अंतरराष्ट्रीय राजनीति के इतिहास में सबसे अप्रत्याशित घटनाक्रमों में से एक है। ट्रंप ने स्पष्ट किया कि उन्होंने यह फैसला पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर के साथ लंबी बातचीत के बाद लिया है। राष्ट्रपति ने अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में स्वीकार किया कि ईरान द्वारा पेश किया गया 10 सूत्रीय शांति प्रस्ताव बातचीत को आगे बढ़ाने के लिए एक ठोस आधार प्रदान करता है। इस समझौते के तहत, अमेरिका अगले दो सप्ताह तक ईरान के किसी भी ठिकाने, बिजली संयंत्रों या बुनियादी ढांचे पर कोई हमला नहीं करेगा। बदले में, ईरान ने वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य को तत्काल प्रभाव से अंतरराष्ट्रीय जहाजों के लिए खोलने पर सहमति व्यक्त की है।
ईरान की इस 10 सूत्रीय योजना को उसकी 'विजयी रणनीति' के रूप में देखा जा रहा है। इस योजना का सबसे प्रमुख और विवादित बिंदु ईरान के 'यूरेनियम संवर्धन' (Uranium Enrichment) के अधिकार को अमेरिका द्वारा स्वीकार किया जाना है। अब तक अमेरिका ईरान के परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह बंद करने की जिद पर अड़ा था, लेकिन इस नए प्रस्ताव में ईरान ने अपने संवर्धन कार्यक्रम को जारी रखने की बात कही है, जिसे ट्रंप प्रशासन ने चर्चा के लिए स्वीकार कर लिया है। इसके अलावा, ईरान ने मांग की है कि अमेरिका और संयुक्त राष्ट्र द्वारा उस पर लगाए गए सभी प्राथमिक और माध्यमिक आर्थिक प्रतिबंधों को पूरी तरह से हटाया जाए। यह शर्त ईरान की चरमराती अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित करने के लिए बेहद जरूरी मानी जा रही है। इस योजना में अमेरिकी लड़ाकू सेना की मिडिल ईस्ट से पूर्ण वापसी, ईरान की जब्त संपत्तियों को मुक्त करना, युद्ध से हुए नुकसान के लिए मुआवजा कोष बनाना और भविष्य में किसी भी हमले के खिलाफ सुरक्षा गारंटी देना शामिल है। इसके साथ ही, ईरान ने शर्त रखी है कि इस पूरे समझौते को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव के जरिए अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत अनिवार्य बनाया जाए।
एक और महत्वपूर्ण बिंदु जो इस प्रस्ताव को खास बनाता है, वह है होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान का सैन्य नियंत्रण और वहां से गुजरने वाले जहाजों पर 'ट्रांजिट शुल्क' लगाने का प्रस्ताव। ईरानी मीडिया के अनुसार, इस योजना में ओमान के साथ मिलकर प्रति जहाज लगभग 2 मिलियन डॉलर का शुल्क वसूलने की बात कही गई है, जिसका उपयोग युद्ध में नष्ट हुए बुनियादी ढांचे के पुनर्निर्माण के लिए किया जाएगा। ट्रंप ने इस पर अपनी सहमति के संकेत देते हुए कहा कि अमेरिका जलडमरूमध्य में यातायात की भीड़ को कम करने में मदद करेगा। यह वैश्विक तेल व्यापार के लिए एक बड़ी खबर है, क्योंकि युद्ध के कारण तेल की कीमतों में आई भारी उछाल अब कम होने की उम्मीद है।
पाकिस्तान ने इस पूरे मामले में एक 'पीसमेकर' (शांतिदूत) की भूमिका निभाई है। इस्लामाबाद ने न केवल इस 10 सूत्रीय योजना को अमेरिका तक पहुंचाया, बल्कि दोनों देशों को युद्ध के मुहाने से वापस लाने के लिए अपनी जमीन पर वार्ता का न्योता भी दिया। शुक्रवार, 10 अप्रैल 2026 को इस्लामाबाद में दोनों देशों के उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल मिलेंगे, जहाँ इस अस्थाई संघर्ष विराम को एक स्थाई शांति संधि में बदलने पर चर्चा होगी। राष्ट्रपति ट्रंप ने पाकिस्तान के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि वे उस नरसंहार को टालने में सफल रहे जो "पूरी सभ्यता को नष्ट" कर सकता था। यह कूटनीतिक सक्रियता दर्शाती है कि क्षेत्रीय शक्तियां अब वैश्विक संकटों को सुलझाने में अधिक प्रभावी हो रही हैं।
ईरान ने इस घटनाक्रम को अपनी संप्रभुता की जीत के रूप में पेश किया है। उनके राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद का मानना है कि अमेरिका का उनकी शर्तों को "सिद्धांत रूप में" स्वीकार करना यह दर्शाता है कि सैन्य शक्ति के बजाय ईरान की प्रतिरोधक क्षमता काम कर रही है। योजना के तहत, ईरान ने यह भी मांग की है कि उसके क्षेत्रीय सहयोगियों और प्रतिरोध समूहों के खिलाफ होने वाले सभी हमले तत्काल बंद किए जाएं। इसमें लेबनान में जारी सैन्य कार्रवाइयों को भी रोकने की बात शामिल है। यदि यह शर्त पूरी होती है, तो यह पूरे मिडिल ईस्ट में एक व्यापक शांति की शुरुआत हो सकती है, जिसकी कल्पना कुछ दिनों पहले तक असंभव लग रही थी।
हालांकि, यह शांति अभी भी बहुत नाजुक दौर में है। दो सप्ताह की अवधि बेहद कम है और इस दौरान विश्वास बहाली एक बड़ी चुनौती होगी। ट्रंप ने संकेत दिया है कि वे ईरान के पुनर्निर्माण में सहायता करेंगे और इसे पश्चिम एशिया के लिए एक "स्वर्ण युग" बना सकते हैं। लेकिन, आलोचकों का मानना है कि ईरान की इन 10 शर्तों को पूरी तरह से मानना अमेरिका के लिए एक बड़ी कूटनीतिक हार भी हो सकती है, क्योंकि इसमें इजरायल और खाड़ी देशों की सुरक्षा चिंताओं को उस तरह से शामिल नहीं किया गया है जैसी उम्मीद थी। अब पूरी दुनिया की नजरें इस्लामाबाद वार्ता पर टिकी हैं, जहाँ इन 10 बिंदुओं पर विस्तृत कानूनी और तकनीकी चर्चा होगी।
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