जूही कलां क्षेत्र में पार्षद पर भड़के लोग, विकास कार्यों में लापरवाही के लगाए गंभीर आरोप।
Kanpur News: कानपुर नगर निगम के जूही कलां वार्ड में जनप्रतिनिधित्व को लेकर असंतोष चरम पर पहुंच गया है। स्थानीय पार्षद शालू सुनील कनौजिया...
Kanpur News: कानपुर नगर निगम के जूही कलां वार्ड में जनप्रतिनिधित्व को लेकर असंतोष चरम पर पहुंच गया है। स्थानीय पार्षद शालू सुनील कनौजिया और उनके पति सुनील कनौजिया के खिलाफ क्षेत्रवासियों का गुस्सा सड़कों पर उतरने को तैयार है। नागरिकों का आरोप है कि वार्ड में मूलभूत सुविधाओं तक का अभाव है, जबकि बार-बार शिकायतों के बावजूद समस्या जस की तस बनी हुई है।
स्थानीय निवासियों ने बताया कि क्षेत्र की मुख्य सड़क कई वर्षों तक खुदी रही, जिससे लोगों को आने-जाने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। लगातार विरोध और शिकायतों के बाद ही कुछ दिन पहले सड़क निर्माण कार्य पूरा हो पाया। इसके अलावा गली-मोहल्लों में गंदगी का आलम ऐसा है कि नियमित सफाई व्यवस्था भी सवालों के घेरे में है।
गली-गली फैली गंदगी ने जूही कलां को नारकीय बना दिया है। कूड़े के ढेर, बदबू और मच्छरों की भरमार—यहां की रोज़मर्रा की हकीकत है। लेकिन पार्षद की प्राथमिकता में यह समस्या कहीं नहीं दिखती। क्षेत्र में एक पार्क का निर्माण कई वर्षों से अधर में लटका हुआ है। लोगों का यह भी आरोप है कि पार्षद द्वारा खुदाई कराई गई मिट्टी को बेचकर निजी लाभ कमाया गया। इतना ही नहीं, जब नागरिकों ने इन मुद्दों पर आवाज़ उठाने की कोशिश की तो उनके खिलाफ कथित रूप से झूठे मुकदमे दर्ज कराए गए। डर और दहशत का ऐसा माहौल बना दिया गया है कि लोग अपनी ही समस्याओं पर खुलकर बोलने से कतराने लगे हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि यह लोकतंत्र की मर्यादा के खिलाफ है और एक जनप्रतिनिधि से ऐसी उम्मीद नहीं की जा सकती।
इस पूरे विवाद पर जब पार्षद पति सुनील कनौजिया से बात की गई, तो उन्होंने सभी आरोपों को निराधार बताया। उन्होंने कहा, "क्षेत्र में नियमित रूप से कूड़ा गाड़ियों की आवाजाही होती है, लेकिन लोग खुद ही खुले में कूड़ा फेंकते हैं। पार्क में लाइट लगवाई गई थी, जिसे कुछ लोगों ने साजिशन हटवा दिया। यहां तक कि पार्क के गेट का ताला तक तीन बार चुरा लिया गया, जिसे हर बार मैंने अपनी जेब से खरीदकर लगवाया। जब तक जनता सहयोग नहीं करेगी और स्वयं में जागरूकता नहीं लाएगी, तब तक कोई जनप्रतिनिधि अकेले कुछ नहीं कर सकता।"
हालांकि स्थानीय लोगों का कहना है कि यह केवल जिम्मेदारी से भागने का तरीका है। उनका मानना है कि पार्षद का कर्तव्य है कि वह न केवल सुविधाएं दिलवाएं बल्कि जनता को जागरूक करने की दिशा में भी कार्य करें।
जूही कलां क्षेत्र का यह मामला सिर्फ एक वार्ड की समस्याओं को नहीं, बल्कि शहरी प्रशासनिक व्यवस्था की असफलता और जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही की अहमियत को भी उजागर करता है। सवाल यही है कि क्या आने वाले समय में इस क्षेत्र के नागरिकों को उनका हक और सुविधाएं मिल पाएंगी या यह शिकायतें यूं ही दबा दी जाएंगी?
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