प्रशासन की 'दोहरी नीति' पर सवाल: अमित उठवाल बोले- गरीबों के घर पर बुलडोजर, आचार्य की अवैध संपत्ति पर चुप्पी क्यों? उच्च स्तरीय जांच की मांग
कांग्रेस नेता अमित उठवाल ने आचार्य प्रमोद कृष्णम पर सरकारी भूमि पर अवैध कब्जे के गंभीर आरोप लगाकर जिले की राजनीति
उवैस दानिश, सम्भल
सम्भल: कांग्रेस नेता अमित उठवाल ने आचार्य प्रमोद कृष्णम पर सरकारी भूमि पर अवैध कब्जे के गंभीर आरोप लगाकर जिले की राजनीति में हलचल मचा दी है। एक साक्षात्कार में उठवाल ने दावा किया कि आचार्य प्रमोद कृष्णम पिछले चार दशकों से सरकारी भूमि, जिसमें खलिहान, चारागाह और उद्यान विभाग की जमीनें शामिल हैं, पर अवैध कब्जा करने का प्रयास कर रहे हैं।
सरकारी अभिलेखों में हेरफेर का आरोप
उठवाल ने आरोप लगाया कि वर्ष 1984 में राजस्व अभिलेखों में जालसाजी (Forgery) कर राजस्व ग्राम ऐचोड़ा कंबोह की खलिहान की भूमि को एक ऐसे स्कूल के नाम दर्ज करा दिया गया, जिसका अस्तित्व ही नहीं है। उन्होंने कहा कि उनके पास मौजूद 15 फरवरी 2026 की खतौनी दर्शाती है कि उक्त भूमि आचार्य के निजी नाम पर दर्ज है, न कि किसी ट्रस्ट या कल्कि पीठ के नाम, जिससे जनमानस की आस्था के साथ खिलवाड़ हो रहा है।
प्रशासन की निष्पक्षता पर सवाल
कांग्रेस नेता ने सम्भल में सड़क चौड़ीकरण के नाम पर गरीबों के घरों पर चलने वाले बुलडोजर की कार्रवाई पर प्रशासन को घेरा। उन्होंने सवाल उठाया कि जब प्रशासन सरकारी भूमि को अतिक्रमण मुक्त करने के लिए आम नागरिकों पर सख्त है, तो आचार्य प्रमोद कृष्णम के कथित अवैध कब्जों पर चुप्पी क्यों है? उठवाल ने इसे प्रशासन की 'पार्शियलिटी' (पक्षपात) करार दिया।
सरकार से की ये मांगें
सरकारी भूमि को तत्काल कब्जा मुक्त कराया जाए।कल्कि धाम निर्माण और वहां आने वाले चंदे की निगरानी के लिए किसी रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में मॉनिटरिंग कमेटी बनाई जाए, ताकि भविष्य में चंदा चोरी जैसे विवाद न हों। अमित उठवाल ने अपनी सुरक्षा को लेकर भी आशंका जताई और कहा कि सच बोलने के कारण उन पर फर्जी मुकदमे दर्ज कराए जा सकते हैं। इस बयान के बाद सम्भल के प्रशासनिक गलियारों में खलबली मची हुई है।
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