दिल्ली में कमर्शियल एलपीजी संकट पर सपा सांसद राजीव राय ने सरकार पर साधा निशाना।
दिल्ली में समाजवादी पार्टी के सांसद राजीव राय ने कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की बढ़ती कमी की खबरों पर केंद्र सरकार की नीतियों की कड़ी आलोचना
- राजीव राय ने कहा- सरकार में दूरदर्शिता की कमी, फैसले लेने में असमर्थता
- ऑपरेशन सिंदूर और कोरोना काल का हवाला देकर की सरकार की आलोचना
दिल्ली में समाजवादी पार्टी के सांसद राजीव राय ने कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की बढ़ती कमी की खबरों पर केंद्र सरकार की नीतियों की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार किसी भी संकट के समय फैसले लेने में सक्षम नहीं दिखती, जिसके कारण देश को बार-बार ऐसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। राजीव राय ने विशेष रूप से ऑपरेशन सिंदूर के दौरान और कोरोना महामारी के समय सरकार की तैयारी और प्रतिक्रिया की कमी का जिक्र किया, जहां दूरदर्शिता का अभाव स्पष्ट रूप से नजर आया था। कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर मुख्य रूप से होटलों, रेस्तरां और छोटे खाद्य व्यवसायों द्वारा उपयोग किए जाते हैं, और उनकी कमी से इन क्षेत्रों में संचालन प्रभावित हो रहा है। राजीव राय का बयान ऐसे समय आया है जब पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित हुई है, जिसका असर भारत में ईंधन उपलब्धता पर पड़ रहा है। उन्होंने सरकार से उम्मीद छोड़ने की बात कही, क्योंकि ऐसी सरकार जो संकट में त्वरित और प्रभावी फैसले नहीं ले पाती, वह जनता की अपेक्षाओं पर खरी नहीं उतर सकती। यह आलोचना संसद के बजट सत्र के दौरान विभिन्न विपक्षी नेताओं द्वारा उठाए जा रहे मुद्दों से जुड़ी है, जहां ऊर्जा सुरक्षा और आपूर्ति स्थिरता पर बहस चल रही है।
कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कमी का संकट मुख्य रूप से मध्य पूर्व में जारी तनाव से जुड़ा है, जहां होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल और गैस की आपूर्ति बाधित हुई है। भारत अपनी आवश्यकता का बड़ा हिस्सा आयात करता है, और इस क्षेत्र में किसी भी व्यवधान से घरेलू और व्यावसायिक दोनों स्तरों पर प्रभाव पड़ता है। हाल के दिनों में बेंगलुरु, मुंबई, चेन्नई और दिल्ली जैसे प्रमुख शहरों में होटल और रेस्तरां एसोसिएशन ने शिकायत की है कि कमर्शियल सिलेंडर की आपूर्ति पूरी तरह रुक गई है या काफी कम हो गई है। कई जगहों पर छोटे ढाबे और फूड स्टॉल बंद होने की कगार पर पहुंच गए हैं, क्योंकि वे दैनिक आधार पर गैस पर निर्भर हैं। सरकार ने घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता देते हुए कमर्शियल आपूर्ति को सीमित किया है, जिससे व्यावसायिक क्षेत्र में हाहाकार मचा हुआ है। तेल मंत्रालय ने रिफाइनरियों को अधिक एलपीजी उत्पादन के निर्देश दिए हैं और आपातकालीन शक्तियों का उपयोग कर उत्पादन बढ़ाने का आदेश जारी किया है। हालांकि, यह कदम तत्काल राहत देने में सीमित साबित हो रहा है, क्योंकि वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें और शिपिंग रूट प्रभावित हैं। दिल्ली में एजेंसियों पर पहले जहां रोजाना सैकड़ों कमर्शियल सिलेंडर बिकते थे, अब कई दिनों से कोई आपूर्ति नहीं हो रही, जिससे स्थानीय व्यापारियों में घबराहट है।
राजीव राय ने अपनी टिप्पणी में सरकार की नीतिगत कमजोरियों पर प्रकाश डाला और कहा कि संकट आने पर दूरदर्शिता का अभाव सरकार की विशेषता बन गया है। उन्होंने कोरोना काल का उदाहरण दिया, जहां महामारी के शुरुआती चरण में स्वास्थ्य सुविधाओं, ऑक्सीजन और दवाओं की कमी ने लाखों लोगों को प्रभावित किया, और सरकार की तैयारी पर सवाल उठे थे। इसी तरह ऑपरेशन सिंदूर के संदर्भ में, जो 2025 में पाकिस्तान में आतंकी ठिकानों पर भारतीय सेना द्वारा किया गया सफल सैन्य अभियान था, राजीव राय ने सरकार की रणनीतिक योजना और संकट प्रबंधन की कमी का जिक्र किया। ऑपरेशन सिंदूर पहलगाम में पर्यटकों पर आतंकी हमले के जवाब में शुरू किया गया था, जिसमें ड्रोन और हवाई हमलों से पाकिस्तानी क्षेत्रों में आतंकी ढांचे नष्ट किए गए थे। हालांकि यह अभियान सैन्य सफलता माना गया, लेकिन राजीव राय जैसे विपक्षी नेताओं ने इसे सरकार की समग्र विदेश और सुरक्षा नीति की कमजोरी से जोड़ा, जहां पूर्वानुमान और तैयारी में कमी रही। उन्होंने कहा कि ऐसी सरकार जो बड़े संकटों में भी निर्णायक कदम नहीं उठा पाती, वह छोटे-बड़े हर मुद्दे पर असफल साबित होती है।
कमर्शियल एलपीजी संकट के प्रमुख प्रभाव
होटल और रेस्तरां एसोसिएशन ने चेतावनी दी है कि यदि आपूर्ति नहीं बहाल हुई तो अधिकांश प्रतिष्ठान बंद हो सकते हैं।
दिल्ली, बेंगलुरु और मुंबई में व्यावसायिक सिलेंडर की बिक्री शून्य या न्यूनतम स्तर पर पहुंच गई है।
घरेलू सिलेंडर की डिलीवरी चक्र 21 से बढ़कर 25 दिनों तक हो गया है, जिससे आम उपभोक्ता भी प्रभावित हैं।
ब्लैक मार्केट में कीमतें बढ़कर 1500 रुपये तक पहुंच गई हैं, जो सामान्य से कई गुना अधिक है।
विपक्षी दलों ने इस संकट को सरकार की अमेरिका-केंद्रित नीतियों से जोड़ा है, जहां मध्य पूर्व तनाव के बावजूद मजबूत रुख नहीं अपनाया गया। प्रियंका गांधी और अन्य नेताओं ने भी इसी तरह की आलोचना की है, लेकिन राजीव राय का बयान विशेष रूप से ऑपरेशन सिंदूर और कोरोना जैसे विशिष्ट उदाहरणों से मजबूत है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि कोई पूर्ण प्रतिबंध नहीं है, बल्कि घरेलू प्राथमिकता के कारण कमर्शियल आपूर्ति प्रभावित हुई है। तेल मंत्रालय ने एक समिति गठित की है जो आपूर्ति मुद्दों की जांच कर रही है, और रिफाइनरियों को अधिक उत्पादन के लिए कहा गया है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक स्तर पर होर्मुज स्ट्रेट से 80 प्रतिशत कच्चा तेल आने के कारण भारत की निर्भरता कम करने के लिए दीर्घकालिक उपाय जरूरी हैं, जैसे वैकल्पिक स्रोतों से आयात बढ़ाना और घरेलू उत्पादन को मजबूत करना। वर्तमान में मार्च 2026 तक संकट जारी है, और कई शहरों में ईंधन की कमी से आर्थिक गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं। इस संकट ने आतिथ्य क्षेत्र को गहरा झटका दिया है, जहां छोटे और मध्यम उद्यम मुख्य रूप से प्रभावित हैं। राष्ट्रीय रेस्तरां एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने केंद्र से हस्तक्षेप की मांग की है, चेतावनी देते हुए कि यदि आपूर्ति नहीं बहाल हुई तो लाखों रेस्तरां बंद हो सकते हैं। दिल्ली में एजेंसियों पर ग्राहकों की भीड़ लगी है, लेकिन कमर्शियल सिलेंडर उपलब्ध नहीं हैं। सरकार ने प्राकृतिक गैस आपूर्ति विनियमन आदेश 2026 जारी किया है, जो एलपीजी, सीएनजी और अन्य ईंधनों को प्राथमिकता देता है, लेकिन व्यावसायिक क्षेत्र की मांग पूरी नहीं हो पा रही। राजीव राय की आलोचना इस बात पर केंद्रित है कि सरकार संकट को रोकने के बजाय प्रतिक्रियात्मक तरीके से काम करती है, जिससे जनता को बार-बार परेशानी होती है।
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