रमजान के 30 रोजे पूरे कर शनिवार को मनेगी मीठी ईद, मस्जिदों और ईदगाहों में मुकम्मल हुई नमाज की तैयारियां

इस्लामी परंपरा में ईद केवल उत्सव का नाम नहीं है, बल्कि यह दान और करुणा का भी पर्व है। ईद की नमाज से पहले हर सक्षम मुसलमान के लिए 'फितरा' देना अनिवार्य होता है, जो गरीबों और जरूरतमंदों को दिया जाने वाला एक

Mar 21, 2026 - 12:02
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रमजान के 30 रोजे पूरे कर शनिवार को मनेगी मीठी ईद, मस्जिदों और ईदगाहों में मुकम्मल हुई नमाज की तैयारियां
रमजान के 30 रोजे पूरे कर शनिवार को मनेगी मीठी ईद, मस्जिदों और ईदगाहों में मुकम्मल हुई नमाज की तैयारियां
  • चांद का दीदार न होने से देशभर में अब 21 मार्च को मनाई जाएगी ईद
  • केरल और देश के बाकी हिस्सों में क्यों अलग हुई ईद की तारीख? जानें चांद देखने की परंपरा और भौगोलिक कारण

इस्लामी कैलेंडर के नौवें महीने रमजान के समापन और शव्वाल महीने की शुरुआत का प्रतीक 'ईद-उल-फितर' इस वर्ष भारत में दो अलग-अलग दिनों में मनाई जा रही है। देश के अधिकांश हिस्सों में गुरुवार शाम को शव्वाल का चांद नजर नहीं आया, जिसके कारण धार्मिक उलेमाओं और हिलाल कमेटियों ने आधिकारिक घोषणा की कि शुक्रवार, 20 मार्च को रमजान का 30वां और आखिरी रोजा रखा जाएगा। इसके पश्चात, शनिवार 21 मार्च 2026 को पूरे देश में ईद का त्योहार हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा। हालांकि, दक्षिण भारतीय राज्य केरल में भौगोलिक स्थितियों और चांद के जल्दी दिखने के कारण वहां शुक्रवार को ही ईद मनाई गई। यह स्थिति भारत जैसे विशाल देश में अक्सर देखी जाती है, जहां अलग-अलग क्षेत्रों में चंद्रमा की दृश्यता के आधार पर त्योहारों की तिथियों में एक दिन का अंतर आ जाता है।

चांद देखने की इस पारंपरिक प्रक्रिया में दिल्ली की जामा मस्जिद और फतेहपुरी मस्जिद सहित लखनऊ की मरकजी चांद कमेटी की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही। गुरुवार शाम को सूरज ढलने के बाद देशभर के प्रमुख शहरों में मुस्लिम समुदाय के लोगों ने आसमान में टकटकी लगाए रखी, लेकिन बादलों की आवाजाही और खगोलीय गणनाओं के चलते चंद्रमा के दर्शन नहीं हो सके। इसके तुरंत बाद विभिन्न शरीयत अदालतों और मुफ्ती-ए-कराम ने आपसी मशविरे के बाद यह तय किया कि इस साल रमजान का महीना 29 के बजाय 30 दिनों का होगा। यह निर्णय पूरी तरह से इस्लामी सिद्धांतों पर आधारित है, जिसमें चांद की गवाही मिलने के बाद ही नए महीने का आगाज माना जाता है। शनिवार सुबह होते ही देश की तमाम बड़ी ईदगाहों में नमाज का वक्त तय कर दिया गया है, जहां हजारों की संख्या में जायरीन शिरकत करेंगे।

विशेष जानकारी: केरल में ईद की तारीख अक्सर सऊदी अरब और खाड़ी देशों के साथ मेल खाती है। इसका मुख्य कारण केरल का तटीय क्षेत्र होना और वहां के धार्मिक संस्थानों द्वारा वैश्विक स्तर पर चांद की दृश्यता को प्राथमिकता देना है। इस वर्ष भी केरल में गुरुवार को चांद देख लिया गया, जिसके कारण वहां 29 रोजों के बाद ही ईद का जश्न शुरू हो गया।

ईद-उल-फितर को 'मीठी ईद' के नाम से भी जाना जाता है, क्योंकि इस दिन घरों में विशेष रूप से सेवइयां और विभिन्न प्रकार के पकवान बनाए जाते हैं। 30 दिनों के कठिन उपवास और इबादत के बाद, यह दिन अल्लाह के प्रति आभार व्यक्त करने का अवसर होता है। शनिवार को होने वाली मुख्य नमाज के लिए प्रशासन ने भी कड़े सुरक्षा इंतजाम किए हैं, विशेषकर दिल्ली, मुंबई, हैदराबाद और लखनऊ जैसे बड़े शहरों में यातायात व्यवस्था में बदलाव किए गए हैं। नमाज के बाद लोग एक-दूसरे के गले मिलकर ईद की मुबारकबाद देंगे और समाज में भाईचारे व अमन का संदेश प्रसारित करेंगे। इस दिन छोटे बच्चों में 'ईदी' को लेकर विशेष उत्साह देखा जा रहा है, जो उन्हें बड़ों से आशीर्वाद के रूप में मिलती है।

इस्लामी परंपरा में ईद केवल उत्सव का नाम नहीं है, बल्कि यह दान और करुणा का भी पर्व है। ईद की नमाज से पहले हर सक्षम मुसलमान के लिए 'फितरा' देना अनिवार्य होता है, जो गरीबों और जरूरतमंदों को दिया जाने वाला एक निश्चित दान है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि समाज का कोई भी व्यक्ति, चाहे वह कितना ही निर्धन क्यों न हो, ईद की खुशियों से वंचित न रहे। इस वर्ष भी मस्जिदों से अपील की गई है कि लोग बढ़-चढ़कर जकात और फितरा अदा करें ताकि मानवता की सेवा का संकल्प पूरा हो सके। बाजारों में भी अंतिम समय की खरीदारी के लिए भारी भीड़ देखी जा रही है, जहां लोग नए वस्त्रों, इत्र और मिठाइयों की दुकानों पर उमड़ रहे हैं।

चांद दिखने के विज्ञान और धार्मिक मान्यताओं के बीच का सामंजस्य इस त्योहार को और भी विशिष्ट बनाता है। भौगोलिक दृष्टिकोण से देखें तो पृथ्वी की गति और चंद्रमा की कक्षा में बदलाव के कारण हर साल ईद की तारीख लगभग 10 से 11 दिन पीछे खिसक जाती है। यही कारण है कि 2026 में हम मार्च के महीने में ईद मना रहे हैं, जबकि कुछ साल पहले यह गर्मियों के चरम पर मनाई जाती थी। उलेमाओं का कहना है कि 30 रोजे पूरे होना आध्यात्मिक रूप से संयम और धैर्य की परीक्षा का सफल समापन है। शनिवार को होने वाली विशेष प्रार्थनाओं में देश की तरक्की, खुशहाली और आपसी सद्भाव को बनाए रखने के लिए सामूहिक दुआएं मांगी जाएंगी।

सांस्कृतिक रूप से भारत में ईद का त्योहार सभी समुदायों के बीच प्रेम का सेतु बनता है। उत्तर भारत की गंगा-जमुनी तहजीब में हिंदू और अन्य धर्मावलंबी भी अपने मुस्लिम मित्रों के घर जाकर सेवइयां खाते हैं और खुशियों में शरीक होते हैं। 21 मार्च को होने वाले इस महापर्व को लेकर ग्रामीण इलाकों से लेकर शहरी गलियों तक में रौनक देखते ही बन रही है। जगह-जगह मेलों का आयोजन किया जा रहा है और घरों को रंग-बिरंगी रोशनी से सजाया गया है। केरल में जहां शुक्रवार को उत्सव संपन्न हो गया, वहीं शेष भारत में शुक्रवार की रात 'चांद रात' के रूप में मनाई जा रही है, जो खरीदारी और मेहंदी लगाने की परंपरा के लिए प्रसिद्ध है।

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