'मैंने हॉर्न दिया तो सुना क्यों नहीं', एक्सीडेंट के बाद पीड़ितों पर ही बरसे विधायक पुत्र, माफी के बदले मिली धमकी।
मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले से सत्ता के रसूख और अहंकार का एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने प्रदेश की कानून व्यवस्था और
- सत्ता का नशा और सड़क पर गुंडागर्दी: शिवपुरी में भाजपा विधायक के बेटे ने कार से 5 को रौंदा
- शिवपुरी में रसूख की नुमाइश: तेज रफ्तार गाड़ी का कहर, एक्सीडेंट के बाद पीड़ितों को ही दोषी ठहराकर रौब झाड़ता दिखा नेता का बेटा
मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले से सत्ता के रसूख और अहंकार का एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने प्रदेश की कानून व्यवस्था और जनप्रतिनिधियों के परिजनों के व्यवहार पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहाँ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के एक स्थानीय विधायक के बेटे पर अपनी तेज रफ्तार लग्जरी कार से पांच लोगों को टक्कर मारने का गंभीर आरोप लगा है। यह घटना केवल एक सड़क हादसे तक सीमित नहीं रही, बल्कि हादसे के बाद आरोपी के व्यवहार ने स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश पैदा कर दिया है। चश्मदीदों के अनुसार, जब घायल सड़क पर तड़प रहे थे, तब आरोपी युवक ने अपनी गलती मानने या उनकी मदद करने के बजाय गाड़ी से उतरकर उन पर चिल्लाना शुरू कर दिया। सत्ता के इस अहंकार ने घटनास्थल पर मौजूद लोगों को स्तब्ध कर दिया, जहाँ घायलों की मदद करने के बजाय उन्हें ही हादसे के लिए जिम्मेदार ठहराया जा रहा था। इस पूरे घटनाक्रम की शुरुआत शिवपुरी के एक व्यस्त मार्ग पर हुई, जहाँ भाजपा विधायक का बेटा अपनी एसयूवी कार में सवार होकर तेज गति से निकल रहा था। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि कार की रफ्तार इतनी अधिक थी कि चालक उस पर नियंत्रण नहीं रख सका और सड़क किनारे चल रहे पांच लोगों को जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि पीड़ित हवा में उछलकर काफी दूर जा गिरे। घायलों में महिलाएं और बुजुर्ग भी शामिल बताए जा रहे हैं। जैसे ही हादसा हुआ, आसपास के लोग मदद के लिए दौड़े और कार को घेर लिया। आमतौर पर ऐसे मामलों में चालक भयभीत होता है या माफी मांगता है, लेकिन यहाँ नजारा बिल्कुल विपरीत था। आरोपी ने गाड़ी से उतरते ही पीड़ितों और वहां मौजूद भीड़ पर रौब झाड़ना शुरू कर दिया, जिससे स्थिति और अधिक तनावपूर्ण हो गई।
घटना के बाद का जो वीडियो और विवरण सामने आया है, वह सत्ता के नशे में चूर व्यक्ति की मानसिकता को दर्शाता है। आरोपी युवक ने घायलों को अस्पताल पहुँचाने की व्यवस्था करने के बजाय उनसे बहस की। उसका मुख्य तर्क यह था कि उसने कार का हॉर्न बजाया था, तो सामने मौजूद लोग रास्ते से हटे क्यों नहीं। उसने चिल्लाते हुए कहा, "मैंने हॉर्न दिया तो तुम लोगों ने सुना क्यों नहीं? सड़क क्या तुम्हारे बाप की है?" यह बयान न केवल संवेदनहीनता की पराकाष्ठा है, बल्कि यह भी दिखाता है कि रसूखदार परिवारों के सदस्य आम नागरिकों की जान की कीमत को कितना कम आंकते हैं। पीड़ितों ने बताया कि वे अपनी साइड में चल रहे थे, लेकिन कार गलत दिशा से और अत्यधिक गति में आई थी, जिससे उन्हें बचने का मौका ही नहीं मिला। मध्य प्रदेश में पिछले कुछ महीनों में रसूखदारों और राजनेताओं के परिजनों द्वारा कानून हाथ में लेने की घटनाओं में बढ़ोतरी देखी गई है। शिवपुरी की यह घटना पुलिस के लिए एक बड़ी चुनौती है, क्योंकि आरोपी एक सत्ताधारी दल के विधायक का पुत्र है। क्या कानून समान रूप से काम करेगा या राजनीतिक दबाव जांच को प्रभावित करेगा, यह बड़ा सवाल बना हुआ है। हादसे की सूचना मिलने के काफी देर बाद स्थानीय पुलिस मौके पर पहुँची। स्थानीय लोगों का आरोप है कि पुलिस का रवैया भी आरोपी के प्रति नरम था। जब भीड़ ने आरोपी को पकड़ने और उस पर कार्रवाई करने की मांग की, तो कथित तौर पर पुलिस ने उसे सुरक्षा प्रदान करते हुए वहां से निकालने का प्रयास किया। घायलों को पास के जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहाँ दो की हालत गंभीर बनी हुई है। अस्पताल में भी पीड़ितों के परिजनों ने हंगामा किया और मांग की कि जब तक विधायक का बेटा माफी नहीं मांगता और उन पर उचित कानूनी कार्रवाई नहीं होती, वे शांत नहीं बैठेंगे। पुलिस ने फिलहाल अज्ञात और बाद में विधायक के पुत्र के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज करने की बात कही है, लेकिन अभी तक गिरफ्तारी की पुष्टि नहीं हुई है।
इस घटना ने मध्य प्रदेश की राजनीति में भी भूचाल ला दिया है। विपक्षी दलों ने इस मुद्दे को हाथों-हाथ लिया है और सरकार पर 'गुंडाराज' को बढ़ावा देने का आरोप लगाया है। यह सवाल उठाया जा रहा है कि क्या सत्ता की हनक इतनी अधिक हो गई है कि विधायक के बेटों को इंसानी जान की कोई परवाह नहीं है? शिवपुरी के इस मामले ने मुख्यमंत्री के उस दावे को भी चुनौती दी है जिसमें वे कानून के शासन और अपराधियों के खिलाफ 'बुलडोजर' कार्रवाई की बात करते हैं। आम जनता में यह संदेश जा रहा है कि नियम केवल साधारण नागरिकों के लिए हैं, जबकि रसूखदारों के लिए सड़क पर लोगों को रौंदना और फिर उन्हें ही दोषी ठहराना एक सामान्य बात बन गई है। क्षेत्र के सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी इस घटना की कड़े शब्दों में निंदा की है। उनका कहना है कि यदि आरोपी ने हॉर्न बजाया भी था, तो इसका मतलब यह नहीं है कि उसे किसी को टक्कर मारने का लाइसेंस मिल गया है। मोटर वाहन अधिनियम के अनुसार, चालक की जिम्मेदारी होती है कि वह सड़क पर पैदल चलने वालों की सुरक्षा सुनिश्चित करे, विशेषकर घनी आबादी वाले क्षेत्रों में। आरोपी का यह तर्क कि 'हॉर्न नहीं सुना' उसकी आपराधिक लापरवाही को कम नहीं करता, बल्कि उसकी दबंगई को और अधिक पुख्ता करता है। प्रशासन पर अब भारी दबाव है कि वह निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करे और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर कार की वास्तविक गति और चालक की गलती को रिकॉर्ड पर लाए।
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