नेपाल में Zen-Z आन्दोलन- रवि लामिछाने को प्रदर्शनकारियों ने जेल से रिहा कराया, देश में गहराया संकट

जेल प्रशासन ने कहा कि प्रदर्शनकारियों की भारी भीड़ और हिंसक स्थिति के कारण लामिछाने की सुरक्षा सुनिश्चित करना संभव नहीं था। उनकी रिहाई के बाद जेल

By INA News Desk
Sep 10, 2025 - 09:39
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नेपाल में Zen-Z आन्दोलन- रवि लामिछाने को प्रदर्शनकारियों ने जेल से रिहा कराया, देश में गहराया संकट
नेपाल में Zen-Z आन्दोलन- रवि लामिछाने को प्रदर्शनकारियों ने जेल से रिहा कराया, देश में गहराया संकट

नेपाल में भ्रष्टाचार और सोशल मीडिया पर प्रतिबंध के खिलाफ शुरू हुआ Zen-Z आंदोलन अब हिंसक विद्रोह का रूप ले चुका है। इस आंदोलन ने नेपाल की राजनीति को हिलाकर रख दिया है। मंगलवार, 9 सितंबर को प्रदर्शनकारियों ने ललितपुर के नक्खू जेल पर धावा बोलकर राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (रास्वपा) के अध्यक्ष और पूर्व उप-प्रधानमंत्री रवि लामिछाने को रिहा करा लिया। लामिछाने सहकारी धोखाधड़ी और संगठित अपराध के आरोप में अप्रैल 2025 से जेल में थे। स्थानीय मीडिया के अनुसार, पुलिस ने सुरक्षा प्रदान करने में असमर्थता जताते हुए उन्हें उनकी पत्नी निकिता पौडेल को सौंप दिया। इस घटना के बाद नक्खू जेल से करीब 1,500 अन्य कैदियों के भागने की खबर ने देश में अराजकता की स्थिति पैदा कर दी है।

इस हिंसा और अशांति के बीच प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली, राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल और कई मंत्रियों ने इस्तीफा दे दिया है। काठमांडू सहित कई शहरों में अनिश्चितकालीन कर्फ्यू लागू है, और सेना को कानून-व्यवस्था संभालने की जिम्मेदारी दी गई है। भारत-नेपाल सीमा पर सिद्धार्थनगर, बहराइच और अन्य जिलों में सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने अपने नागरिकों के लिए एडवाइजरी जारी की है, जिसमें नेपाल की यात्रा टालने और वहां मौजूद लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।

रवि लामिछाने की रिहाई

9 सितंबर को काठमांडू के नक्खू जेल के बाहर हजारों Zen-Z प्रदर्शनकारी जमा हुए। स्थानीय मीडिया खबरहब के अनुसार, प्रदर्शनकारियों ने जेल के गेट तोड़ दिए और पुलिस के सुरक्षा घेरे को भेदकर रवि लामिछाने को रिहा कराया। लामिछाने, जो सहकारी धोखाधड़ी के मामले में अप्रैल 2025 से जेल में थे, को उनकी पत्नी निकिता पौडेल को सौंपा गया। रास्वपा की केंद्रीय सदस्य क्रांतिशिखा धिताल ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा किया, जिसमें लामिछाने सफेद कपड़ों में भीड़ को संबोधित करते और समर्थकों का अभिवादन करते नजर आए।

जेल प्रशासन ने कहा कि प्रदर्शनकारियों की भारी भीड़ और हिंसक स्थिति के कारण लामिछाने की सुरक्षा सुनिश्चित करना संभव नहीं था। उनकी रिहाई के बाद जेल से करीब 1,500 अन्य कैदियों के भागने की खबर ने नेपाल में सुरक्षा संकट को और गहरा दिया है। पुलिस ने सुरक्षा चौकियां छोड़ दीं, जिससे अराजकता की स्थिति बन गई।

आंदोलन की शुरुआत और हिंसा

3 सितंबर 2025 को नेपाल सरकार ने फेसबुक, इंस्टाग्राम, यूट्यूब, व्हाट्सएप और एक्स सहित 26 सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर प्रतिबंध लगा दिया। सरकार का कहना था कि ये प्लेटफॉर्म्स नेपाल के संचार और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय में पंजीकृत नहीं थे। इस फैसले ने युवाओं में गुस्सा भड़काया, जिन्होंने इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला माना। काठमांडू के मैतीघर मंडला से शुरू हुआ यह आंदोलन 'Zen-Z क्रांति' के रूप में नेपालगंज, वीरगंज, पोखरा, बिराटनगर और चितवन तक फैल गया।

8 सितंबर को प्रदर्शनकारियों ने संसद भवन पर हमला कर बैरिकेड्स तोड़ दिए। पुलिस ने आंसू गैस, वाटर कैनन और रबर बुलेट्स का इस्तेमाल किया, लेकिन स्थिति बेकाबू हो गई। कुछ जगहों पर गोलीबारी की खबरें आईं, जिसमें कम से कम 25 लोगों की मौत और 400 से ज्यादा लोग घायल हुए। प्रदर्शनकारियों ने संसद भवन, सुप्रीम कोर्ट, सिंह दरबार और मंत्रियों के निजी आवासों में आग लगा दी। नेपालगंज में कस्टम कार्यालय और पुलिस चौकियां भी जला दी गईं।

9 सितंबर को हिंसा और बढ़ गई। प्रदर्शनकारियों ने पूर्व प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा, पुष्प कमल दाहाल 'प्रचंड', वित्त मंत्री विष्णु पौडेल और संचार मंत्री पृथ्वी सुब्बा गुरुंग के घरों पर हमला किया। पूर्व प्रधानमंत्री झालानाथ खनाल के घर में आगजनी के दौरान उनकी पत्नी रवि लक्ष्मी चित्रकार की जलने से मृत्यु हो गई, जिसने हिंसा की भयावहता को और उजागर किया।

रवि लामिछाने और सहकारी धोखाधड़ी का मामला

रवि लामिछाने, राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी के अध्यक्ष और पूर्व उप-प्रधानमंत्री, को अप्रैल 2025 में बुटवल के सुप्रीम सहकारी धोखाधड़ी मामले में गिरफ्तार किया गया था। उन पर आरोप है कि उन्होंने बुटवल के सुप्रीम सहकारी संस्था से 109 मिलियन रुपये से अधिक की राशि गोरखा मीडिया नेटवर्क में स्थानांतरित की, जहां वे प्रबंध निदेशक थे। इसके अलावा, काठमांडू, चितवन, पोखरा और परसा के सहकारी संस्थानों से भी धोखाधड़ी के आरोप हैं।

लामिछाने ने इन आरोपों से इनकार किया है और इसे सत्तारूढ़ दलों की राजनीतिक साजिश बताया। उनकी पार्टी ने दावा किया कि यह गिरफ्तारी रास्वपा की बढ़ती लोकप्रियता को दबाने की कोशिश है। 8 सितंबर को जेल से जारी एक बयान में लामिछाने ने Zen-Z आंदोलन का समर्थन किया और युवाओं से सड़कों पर उतरने की अपील की। उन्होंने कहा, "सत्ता के नशे में चूर शासकों को नहीं पता कि आपकी जागरूकता और जुनून देश का इतिहास बदल सकता है।"

इस्तीफों का सिलसिला

हिंसा और दबाव के बीच 9 सितंबर को प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल को अपना इस्तीफा सौंप दिया। उन्होंने कहा कि वे "देश में असाधारण परिस्थितियों" के कारण पद छोड़ रहे हैं। उसी दिन गृह मंत्री रमेश लेखक, स्वास्थ्य मंत्री प्रदीप पौडेल और कृषि मंत्री रामनाथ अधिकारी ने भी इस्तीफा दे दिया। रमेश लेखक ने पुलिस कार्रवाई में प्रदर्शनकारियों की मौत पर दुख जताया और कहा, "युवाओं पर गोली चलाना उचित नहीं था।"

राष्ट्रपति पौडेल ने ओली का इस्तीफा स्वीकार करने के बाद स्वयं अपने पद से इस्तीफा दे दिया। नेपाली मीडिया के अनुसार, राष्ट्रपति भवन पर प्रदर्शनकारियों के हमले और देश में गहराते संकट ने उन्हें यह कदम उठाने के लिए मजबूर किया। रास्वपा के 21 सांसदों ने भी सामूहिक इस्तीफा दे दिया, जिससे संसद भंग करने और नए चुनाव कराने की मांग तेज हो गई है।

बालेन शाह का उभरता नेतृत्व

इस आंदोलन में काठमांडू के मेयर बालेन शाह उभरकर सामने आए हैं। युवा उन्हें अगले संभावित प्रधानमंत्री के रूप में देख रहे हैं। बालेन ने भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की और आंदोलन का समर्थन किया। सोशल मीडिया पर #Nepokid ट्रेंड के जरिए नेताओं और उनके बच्चों की विलासिता के खिलाफ गुस्सा व्यक्त किया जा रहा है। बालेन ने कहा, "यह आंदोलन केवल सोशल मीडिया तक सीमित नहीं है, बल्कि भ्रष्टाचार और गैर-जवाबदेही के खिलाफ जनता का गुस्सा है।"

भारत-नेपाल सीमा पर असर

नेपाल में अशांति के कारण भारत-नेपाल सीमा पर सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर, बहराइच, महराजगंज, बलरामपुर, श्रावस्ती, लखीमपुर खीरी और पीलीभीत के साथ-साथ बिहार के सात जिलों में सीमा को 24 घंटे के लिए बंद कर दिया गया है। सिद्धार्थनगर के सोनौली बॉर्डर पर सैकड़ों भारतीय पर्यटक फंसे हुए हैं। कई लोग पशुपतिनाथ मंदिर की यात्रा के लिए गए थे, लेकिन उड़ानें रद्द होने और सीमा बंद होने के कारण वापस लौट रहे हैं।

भारतीय विदेश मंत्रालय की एडवाइजरी

भारतीय विदेश मंत्रालय ने 9 सितंबर को एडवाइजरी जारी की, जिसमें भारतीय नागरिकों से नेपाल की यात्रा टालने और वहां मौजूद लोगों को अपने ठिकाने पर रहने की सलाह दी गई। काठमांडू में भारतीय दूतावास ने हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं:

  • +977-980 860 2881 (व्हाट्सएप कॉल सुविधा)

  • +977-981 032 6134 (व्हाट्सएप कॉल सुविधा)

  • ईमेल: helpdesk.eoiktm@gmail.com

दूतावास ने भारतीय नागरिकों से पंजीकरण करने को कहा है ताकि आपात स्थिति में सहायता दी जा सके।

नेपाल में कर्फ्यू और उड़ानें रद्द

काठमांडू, पोखरा, बुटवल और बीरगंज में अनिश्चितकालीन कर्फ्यू लागू है। त्रिभुवन अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा बंद होने से एयर इंडिया और इंडिगो की उड़ानें रद्द हो गई हैं। सेना ने रात 10 बजे से सुरक्षा अभियानों की कमान संभाली है।

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