नेपाल में Zen-Z क्रांति- पीएम ओली और राष्ट्रपति पौडेल का इस्तीफा, हिंसा में 25 की मौत

हिंसा और दबाव के बीच प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने 9 सितंबर को राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल को अपना इस्तीफा सौंप दिया। उन्होंने कहा कि वे "देश में असाधारण परि

Sep 10, 2025 - 09:35
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नेपाल में Zen-Z क्रांति- पीएम ओली और राष्ट्रपति पौडेल का इस्तीफा, हिंसा में 25 की मौत
नेपाल में Zen-Z क्रांति- पीएम ओली और राष्ट्रपति पौडेल का इस्तीफा, हिंसा में 25 की मौत

नेपाल में सोशल मीडिया पर प्रतिबंध और भ्रष्टाचार के खिलाफ शुरू हुआ Zen-Z आंदोलन अब हिंसक विद्रोह में बदल चुका है। इस आंदोलन ने नेपाल की सियासत को हिलाकर रख दिया है। प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली और राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल सहित कई मंत्रियों के इस्तीफे के बाद देश में राजनीतिक संकट गहरा गया है। काठमांडू, नेपालगंज, पोखरा और अन्य शहरों में प्रदर्शनकारियों ने संसद भवन, राष्ट्रपति भवन, मंत्रियों के घरों और सरकारी इमारतों में आगजनी और तोड़फोड़ की। अब तक कम से कम 25 लोगों की मौत और 400 से ज्यादा लोगों के घायल होने की खबर है।

भारत-नेपाल सीमा पर बहराइच, सिद्धार्थनगर, महराजगंज और अन्य जिलों में सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने नेपाल में मौजूद अपने नागरिकों के लिए एडवाइजरी जारी की है, जिसमें यात्रा टालने और सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। नेपाल में कर्फ्यू लागू है, और सेना को कानून-व्यवस्था संभालने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

आंदोलन की शुरुआत और हिंसा

3 सितंबर 2025 को नेपाल सरकार ने फेसबुक, इंस्टाग्राम, यूट्यूब, व्हाट्सएप और एक्स सहित 26 सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर प्रतिबंध लगा दिया। सरकार का तर्क था कि इन प्लेटफॉर्म्स ने नेपाल के संचार और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय में पंजीकरण नहीं कराया। इस फैसले ने युवाओं में गुस्सा भड़काया, जिन्होंने इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला माना। काठमांडू के मैतीघर मंडला से शुरू हुआ यह आंदोलन 'Zen-Z क्रांति' के रूप में पूरे देश में फैल गया।8 सितंबर को प्रदर्शनकारियों ने संसद भवन पर धावा बोलकर बैरिकेड्स तोड़ दिए और परिसर में घुस गए। पुलिस ने आंसू गैस, वाटर कैनन और रबर बुलेट्स का इस्तेमाल किया, लेकिन स्थिति बेकाबू हो गई। कुछ जगहों पर गोलीबारी की खबरें आईं, जिसमें कम से कम 25 लोगों की मौत और सैकड़ों लोग घायल हुए। प्रदर्शनकारियों ने संसद भवन, सुप्रीम कोर्ट, सिंह दरबार और मंत्रियों के निजी आवासों में आग लगा दी। नेपालगंज में कस्टम कार्यालय और पुलिस चौकियां भी जला दी गईं।

9 सितंबर को हालात और बिगड़ गए। प्रदर्शनकारियों ने पूर्व प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा और पुष्प कमल दाहाल 'प्रचंड' के घरों पर हमला किया। काठमांडू में राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल के निजी आवास पर कब्जा कर तोड़फोड़ और आगजनी की गई। वित्त मंत्री विष्णु पौडेल और संचार मंत्री पृथ्वी सुब्बा गुरुंग के घरों पर भी पथराव और आगजनी की घटनाएं सामने आईं।

इस्तीफों का सिलसिला

हिंसा और दबाव के बीच प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने 9 सितंबर को राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल को अपना इस्तीफा सौंप दिया। उन्होंने कहा कि वे "देश में असाधारण परिस्थितियों" और "हालात को शांत करने" के लिए पद छोड़ रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक, सेना प्रमुख अशोक राज सिग्देल ने भी ओली को इस्तीफा देने की सलाह दी थी।

उसी दिन गृह मंत्री रमेश लेखक, स्वास्थ्य मंत्री प्रदीप पौडेल, कृषि मंत्री रामनाथ अधिकारी और अन्य मंत्रियों ने भी नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा दे दिया। रमेश लेखक ने पुलिस कार्रवाई में प्रदर्शनकारियों की मौत पर दुख जताया और कहा कि "युवाओं पर गोली चलाना उचित नहीं था।"राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने ओली का इस्तीफा स्वीकार करने के बाद स्वयं अपने पद से इस्तीफा दे दिया। नेपाली मीडिया के अनुसार, राष्ट्रपति भवन पर प्रदर्शनकारियों के हमले और देश में गहराते संकट ने उन्हें यह कदम उठाने के लिए मजबूर किया। राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी के 21 सांसदों ने भी सामूहिक इस्तीफा दे दिया, जिससे संसद भंग करने और नए चुनाव कराने की मांग तेज हो गई है।

बालेन शाह का उभरता चेहरा

इस आंदोलन में काठमांडू के मेयर बालेन शाह (बालेन्द्र शाह) उभरकर सामने आए हैं। युवा उन्हें अगले प्रधानमंत्री के रूप में देख रहे हैं। बालेन ने आंदोलन का खुलकर समर्थन किया और भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। सोशल मीडिया पर #Nepokid ट्रेंड के जरिए नेताओं और उनके बच्चों की विलासिता के खिलाफ गुस्सा व्यक्त किया जा रहा है। बालेन ने कहा, "यह आंदोलन केवल सोशल मीडिया तक सीमित नहीं है, बल्कि भ्रष्टाचार और गैर-जवाबदेही के खिलाफ जनता का गुस्सा है।"

नेपाल के युवा बालेन को एक नई राजनीतिक पार्टी बनाने और राष्ट्रीय नेतृत्व संभालने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। उनकी लोकप्रियता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि प्रदर्शनकारी उनकी तस्वीरों और नारों के साथ सड़कों पर उतर रहे हैं।

भारत-नेपाल सीमा पर असर

नेपाल में अशांति के कारण भारत-नेपाल सीमा पर सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर, बहराइच, महराजगंज, बलरामपुर, श्रावस्ती, लखीमपुर खीरी और पीलीभीत के साथ-साथ बिहार के सात जिलों—पश्चिमी चंपारण, सीतामढ़ी, मधुबनी, अररिया, सुपौल, पूर्वी चंपारण और किशनगंज—में सीमा को 24 घंटे के लिए बंद कर दिया गया है। केवल वैध पहचान पत्र वालों को ही सीमा पार करने की अनुमति है।सिद्धार्थनगर के सोनौली बॉर्डर पर सैकड़ों भारतीय पर्यटक फंसे हुए हैं। कई लोग पशुपतिनाथ मंदिर की यात्रा के लिए नेपाल गए थे, लेकिन उड़ानें रद्द होने और सीमा बंद होने के कारण वापस लौट रहे हैं। बहराइच के रुपईडीहा बॉर्डर पर व्यापारियों का कहना है कि सोशल मीडिया प्रतिबंध के कारण ऑर्डर और भुगतान में दिक्कत हो रही है।

भारतीय विदेश मंत्रालय की एडवाइजरी

भारतीय विदेश मंत्रालय ने 9 सितंबर को नेपाल में मौजूद भारतीय नागरिकों के लिए एडवाइजरी जारी की। इसमें कहा गया है कि नेपाल में हिंसक प्रदर्शनों के कारण यात्रा टालें। जो लोग नेपाल में हैं, उन्हें अपने ठिकाने पर रहने, सड़कों पर न निकलने और सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। काठमांडू में भारतीय दूतावास ने हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं:

  • +977-980 860 2881 (व्हाट्सएप कॉल सुविधा)

  • +977-981 032 6134 (व्हाट्सएप कॉल सुविधा)

  • ईमेल: helpdesk.eoiktm@gmail.com

दूतावास ने भारतीय नागरिकों से पंजीकरण करने को कहा है ताकि आपात स्थिति में सहायता दी जा सके।

नेपाल सरकार की प्रतिक्रिया

हिंसा और मौतों के बाद सरकार ने 8 सितंबर की देर रात आपात कैबिनेट बैठक बुलाई और सोशल मीडिया पर प्रतिबंध हटाने का ऐलान किया। संचार मंत्री पृथ्वी सुब्बा गुरुंग ने कहा, "जनता की भावनाओं और हालात को देखते हुए यह फैसला लिया गया।" हालांकि, प्रदर्शनकारी इसे नाकाफी मानते हैं और भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

काठमांडू, पोखरा, बुटवल, बीरगंज और अन्य शहरों में कर्फ्यू लागू है। त्रिभुवन अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा बंद होने से एयर इंडिया और इंडिगो की उड़ानें रद्द हो गई हैं। सेना ने रात 10 बजे से सुरक्षा अभियानों की कमान संभाली है।

स्थानीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया

नेपाल के स्थानीय समाचार पोर्टल्स ने हिंसा की कड़ी निंदा की है। उकेरा डॉट कॉम ने 8 सितंबर को 'काला दिन' बताया, जिसमें एक दिन में सबसे ज्यादा प्रदर्शनकारियों की मौत हुई। रातोपाटी ने पुलिस की गोलीबारी को 'कायराना' करार दिया और कहा कि यह आंदोलन भ्रष्टाचार, बेरोजगारी और सामाजिक अव्यवस्था के खिलाफ है।

संयुक्त राष्ट्र ने नेपाल में हिंसा पर चिंता जताई और सरकार व प्रदर्शनकारियों से बातचीत की अपील की। रूस, इजराइल और भारत ने अपने नागरिकों को नेपाल की यात्रा न करने की सलाह दी है।

आंदोलन का नेतृत्व और मांगें

आंदोलन का नेतृत्व 36 वर्षीय सुदन गुरुंग कर रहे हैं, जो "हामी नेपाल" एनजीओ के अध्यक्ष हैं। उन्होंने युवाओं को शांतिपूर्ण प्रदर्शन के लिए प्रेरित किया, लेकिन स्थिति बाद में हिंसक हो गई।

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