नेपाल में Zen-Z आन्दोलन- प्रदर्शनकारियों ने पूर्व प्रधानमंत्री देउबा और उनकी पत्नी पर हमला किया, देश में हिंसा और अराजकता
हिंसा और दबाव के बीच 9 सितंबर को प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल को अपना इस्तीफा सौंप दिया। उन्होंने कहा कि वे "देश में असाधारण परि
नेपाल में भ्रष्टाचार और सोशल मीडिया पर प्रतिबंध के खिलाफ शुरू हुआ Zen-Z आंदोलन अब हिंसक विद्रोह में बदल चुका है। इस आंदोलन ने देश की राजनीति को हिलाकर रख दिया है। मंगलवार, 9 सितंबर को काठमांडू में प्रदर्शनकारियों ने पूर्व प्रधानमंत्री और नेपाली कांग्रेस के अध्यक्ष शेर बहादुर देउबा और उनकी पत्नी, विदेश मंत्री अर्जू राणा देउबा, पर उनके बुद्धनिलकंठा स्थित घर में घुसकर हमला किया। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में देउबा के चेहरे से खून बहता नजर आया। उनकी पत्नी को भी प्रदर्शनकारियों ने पीटा और उनके घर में तोड़फोड़ व आगजनी की। सेना ने हस्तक्षेप कर देउबा दंपति को सुरक्षित निकाला।
इस हिंसा के बीच प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली, राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल और कई मंत्रियों ने इस्तीफा दे दिया है। प्रदर्शनकारियों ने संसद भवन, सिंह दरबार, मंत्रियों के घरों और पार्टी कार्यालयों में आग लगा दी। अब तक कम से कम 25 लोगों की मौत और 400 से ज्यादा लोगों के घायल होने की खबर है। भारत-नेपाल सीमा पर सिद्धार्थनगर, बहराइच और अन्य जिलों में सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने अपने नागरिकों के लिए एडवाइजरी जारी की है, जिसमें नेपाल की यात्रा टालने और वहां मौजूद लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।
9 सितंबर को काठमांडू के बुद्धनिलकंठा में शेर बहादुर देउबा के घर पर सैकड़ों Zen-Z प्रदर्शनकारी पहुंचे। इंडिया टुडे और न्यूज18 के अनुसार, प्रदर्शनकारियों ने घर के गेट तोड़ दिए और अंदर घुसकर देउबा और उनकी पत्नी अर्जू राणा देउबा पर हमला किया। सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में देउबा के चेहरे पर खून दिखाई दिया, जबकि उनकी पत्नी को प्रदर्शनकारियों ने धक्का-मुक्की कर घायल किया। घर में तोड़फोड़ और आगजनी की गई, जिसमें निजी सामान और संपत्ति को भारी नुकसान पहुंचा।
नेपाल सेना ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए हस्तक्षेप किया और देउबा दंपति को सुरक्षित स्थान पर ले जाया गया। इस हमले को नेपाली मीडिया ने "अभूतपूर्व हिंसा" करार दिया है। द हिंदू के अनुसार, यह हमला Zen-Z आंदोलन की हिंसक प्रकृति को दर्शाता है, जो पहले के जन आंदोलनों से अलग है। 3 सितंबर 2025 को नेपाल सरकार ने फेसबुक, इंस्टाग्राम, यूट्यूब, व्हाट्सएप और एक्स सहित 26 सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर प्रतिबंध लगा दिया। सरकार का कहना था कि ये प्लेटफॉर्म्स नेपाल के संचार और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय में पंजीकृत नहीं थे। इस फैसले ने युवाओं में गुस्सा भड़काया, जिन्होंने इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला माना। काठमांडू के मैतीघर मंडला से शुरू हुआ यह आंदोलन 'Zen-Z क्रांति' के रूप में नेपालगंज, वीरगंज, पोखरा, बिराटनगर और चितवन तक फैल गया। 8 सितंबर को प्रदर्शनकारियों ने संसद भवन पर धावा बोला और बैरिकेड्स तोड़ दिए। पुलिस ने आंसू गैस, वाटर कैनन और रबर बुलेट्स का इस्तेमाल किया, लेकिन कुछ जगहों पर गोलीबारी की खबरें आईं, जिसमें 25 लोगों की मौत और सैकड़ों लोग घायल हुए।
प्रदर्शनकारियों ने संसद भवन, सुप्रीम कोर्ट, सिंह दरबार और मंत्रियों के निजी आवासों में आग लगा दी। न्यूजवीक की एक रिपोर्ट के अनुसार, पूर्व प्रधानमंत्री झाला नाथ खनाल की पत्नी रवि लक्ष्मी चित्रकार की आगजनी में जलने से मृत्यु हो गई। 9 सितंबर को हिंसा और बढ़ गई। प्रदर्शनकारियों ने पूर्व प्रधानमंत्री पुष्प कमल दाहाल 'प्रचंड', वित्त मंत्री विष्णु प्रसाद पौडेल और संचार मंत्री पृथ्वी सुब्बा गुरुंग के घरों पर हमला किया। वित्त मंत्री पौडेल को सड़कों पर प्रदर्शनकारियों ने दौड़ाकर पीटा, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।
रवि लामिछाने की रिहाई
9 सितंबर को प्रदर्शनकारियों ने ललितपुर के नक्खू जेल पर धावा बोलकर राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (रास्वपा) के अध्यक्ष और पूर्व उप-प्रधानमंत्री रवि लामिछाने को रिहा कराया। लामिछाने सहकारी धोखाधड़ी और संगठित अपराध के आरोप में अप्रैल 2025 से जेल में थे। खबरहब के अनुसार, प्रदर्शनकारियों ने जेल के गेट तोड़ दिए और पुलिस की सुरक्षा को भेदकर लामिछाने को उनकी पत्नी निकिता पौडेल को सौंप दिया। इस दौरान जेल से करीब 1,500 अन्य कैदियों के भागने की खबर ने देश में अराजकता की स्थिति पैदा कर दी।
लामिछाने ने रिहाई के बाद प्रदर्शनकारियों को संबोधित किया और भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन को समर्थन दिया। उन्होंने कहा, "यह युवाओं का गुस्सा है, जो सत्ता के दुरुपयोग और भ्रष्टाचार के खिलाफ सड़कों पर उतर आया है।" उनकी रिहाई ने आंदोलन को और तेज कर दिया है।
इस्तीफों का सिलसिला
हिंसा और दबाव के बीच 9 सितंबर को प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल को अपना इस्तीफा सौंप दिया। उन्होंने कहा कि वे "देश में असाधारण परिस्थितियों" के कारण पद छोड़ रहे हैं। इंडिया टुडे के अनुसार, सेना प्रमुख अशोक राज सिग्देल ने ओली को इस्तीफा देने की सलाह दी थी।
उसी दिन गृह मंत्री रमेश लेखक, स्वास्थ्य मंत्री प्रदीप पौडेल और कृषि मंत्री रामनाथ अधिकारी ने भी इस्तीफा दे दिया। लेखक ने पुलिस कार्रवाई में प्रदर्शनकारियों की मौत पर नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा दिया। राष्ट्रपति पौडेल ने ओली का इस्तीफा स्वीकार करने के बाद स्वयं अपने पद से इस्तीफा दे दिया। रास्वपा के 21 सांसदों ने भी सामूहिक इस्तीफा दे दिया, जिससे संसद भंग करने और नए चुनाव कराने की मांग तेज हो गई है।
बालेन शाह का उभरता नेतृत्व
काठमांडू के मेयर बालेन शाह इस आंदोलन में एक प्रमुख चेहरा बनकर उभरे हैं। युवा उन्हें अगले संभावित प्रधानमंत्री के रूप में देख रहे हैं। बालेन ने भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की और हिंसा रोकने की अपील की। सोशल मीडिया पर #Nepokid ट्रेंड के जरिए नेताओं और उनके बच्चों की विलासिता के खिलाफ गुस्सा व्यक्त किया जा रहा है। बालेन ने कहा, "यह आंदोलन भ्रष्टाचार और गैर-जवाबदेही के खिलाफ जनता का गुस्सा है।" द न्यूयॉर्क टाइम्स के अनुसार, उनकी लोकप्रियता से एक नई राजनीतिक शक्ति उभर सकती है।
भारत-नेपाल सीमा पर असर
नेपाल में अशांति के कारण भारत-नेपाल सीमा पर सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर, बहराइच, महराजगंज, बलरामपुर, श्रावस्ती, लखीमपुर खीरी और पीलीभीत के साथ-साथ बिहार के सात जिलों में सीमा को 24 घंटे के लिए बंद कर दिया गया है। सिद्धार्थनगर के सोनौली बॉर्डर पर सैकड़ों भारतीय पर्यटक फंसे हुए हैं। कई लोग पशुपतिनाथ मंदिर की यात्रा के लिए गए थे, लेकिन उड़ानें रद्द होने और सीमा बंद होने के कारण वापस लौट रहे हैं।
भारतीय विदेश मंत्रालय की एडवाइजरी
भारतीय विदेश मंत्रालय ने 9 सितंबर को एडवाइजरी जारी की, जिसमें भारतीय नागरिकों से नेपाल की यात्रा टालने और वहां मौजूद लोगों को अपने ठिकाने पर रहने की सलाह दी गई। काठमांडू में भारतीय दूतावास ने हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं:
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+977-980 860 2881 (व्हाट्सएप कॉल सुविधा)
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+977-981 032 6134 (व्हाट्सएप कॉल सुविधा)
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ईमेल: helpdesk.eoiktm@gmail.com
दूतावास ने भारतीय नागरिकों से पंजीकरण करने को कहा है ताकि आपात स्थिति में सहायता दी जा सके।
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