नेपाल में Zen-Z आन्दोलन- काठमांडू के मेयर बालेन शाह ने ओली को बताया आतंकवादी, देश में हिंसा और अराजकता
8 सितंबर को Zen-Z प्रदर्शनकारियों पर पुलिस की गोलीबारी में 19 लोगों की मौत के बाद बालेन शाह ने फेसबुक पर तीखा बयान दिया। नेपाल न्यूज के अनुसार, उन्होंने
नेपाल में भ्रष्टाचार और सोशल मीडिया प्रतिबंध के खिलाफ शुरू हुआ Zen-Z आंदोलन अब हिंसक विद्रोह में बदल चुका है। इस आंदोलन ने देश की राजनीति को हिलाकर रख दिया। काठमांडू के मेयर बालेन शाह ने 8 सितंबर को हुए हिंसक प्रदर्शनों में 19 लोगों की मौत के बाद प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली पर तीखा हमला बोला। बालेन ने फेसबुक पर लिखा, "आप अपने नौकरों के लिए पिता बन गए। अगर आप सचमुच कभी पिता होते, तो अपने बच्चों की मौत का दर्द समझते। दुनिया ने ऐसा आतंकवाद कभी नहीं देखा। आप नेता तो दूर, इंसान भी नहीं रहे, आप आतंकवादी बन गए हैं।" उन्होंने हैशटैग #KPOliIsTerrorist का इस्तेमाल कर अपनी बात को और जोर दिया।
9 सितंबर को हिंसा और बढ़ गई, जिसमें प्रदर्शनकारियों ने संसद भवन, सिंह दरबार और कई नेताओं के घरों में आग लगा दी। इस हिंसा में कम से कम 25 लोगों की मौत और 400 से ज्यादा लोग घायल हो चुके हैं। उसी दिन ओली, राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल और कई मंत्रियों ने इस्तीफा दे दिया। काठमांडू सहित कई शहरों में अनिश्चितकालीन कर्फ्यू लागू है, और सेना को कानून-व्यवस्था संभालने की जिम्मेदारी दी गई है। भारत-नेपाल सीमा पर सिद्धार्थनगर, बहराइच और अन्य जिलों में सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने नेपाल की यात्रा टालने की सलाह दी है।
8 सितंबर को Zen-Z प्रदर्शनकारियों पर पुलिस की गोलीबारी में 19 लोगों की मौत के बाद बालेन शाह ने फेसबुक पर तीखा बयान दिया। नेपाल न्यूज के अनुसार, उन्होंने ओली पर निशाना साधते हुए कहा, "आपने उन माता-पिताओं का दर्द नहीं समझा, जिन्होंने अपने बच्चों को खोया। आपने सत्ता के लिए हिंसा को चुना।" बालेन का यह बयान सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, और #KPOliIsTerrorist हैशटैग के साथ युवाओं ने इसे खूब साझा किया।
हालांकि, 9 सितंबर को ओली के इस्तीफे के बाद बालेन ने प्रदर्शनकारियों से शांति बनाए रखने की अपील की। उन्होंने फेसबुक पर लिखा, "प्रिय Zen-Z, आपकी मांग पूरी हो चुकी है। अब संयम बरतने का समय है। देश की संपत्ति का नुकसान हमारा अपना नुकसान है।" उन्होंने सेना के साथ बातचीत की संभावना का जिक्र किया, लेकिन संसद भंग होने के बाद ही इसे संभव बताया।
3 सितंबर 2025 को नेपाल सरकार ने फेसबुक, इंस्टाग्राम, यूट्यूब, व्हाट्सएप और एक्स सहित 26 सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर प्रतिबंध लगा दिया। सरकार का कहना था कि ये प्लेटफॉर्म्स संचार और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय में पंजीकृत नहीं थे। इस फैसले ने युवाओं में गुस्सा भड़काया, जिन्होंने इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला माना। काठमांडू के मैतीघर मंडला से शुरू हुआ यह आंदोलन नेपालगंज, वीरगंज, पोखरा, बिराटनगर और चितवन तक फैल गया।
8 सितंबर को प्रदर्शनकारियों ने संसद भवन पर हमला कर बैरिकेड्स तोड़ दिए। पुलिस ने आंसू गैस, वाटर कैनन और रबर बुलेट्स का इस्तेमाल किया, लेकिन कुछ जगहों पर गोलीबारी की खबरें आईं। अल जजीरा के अनुसार, 19 लोग मारे गए, जिनमें ज्यादातर युवा थे। 9 सितंबर को हिंसा और बढ़ गई, जिसमें प्रदर्शनकारियों ने संसद भवन, सुप्रीम कोर्ट, सिंह दरबार और मंत्रियों के घरों में आग लगा दी। पूर्व प्रधानमंत्री झाला नाथ खनाल की पत्नी रवि लक्ष्मी चित्रकार की आगजनी में जलने से मृत्यु हो गई।
9 सितंबर को प्रदर्शनकारियों ने पूर्व प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा और उनकी पत्नी, विदेश मंत्री अर्जू राणा देउबा, पर उनके बुद्धनिलकंठा स्थित घर में हमला किया। इंडिया टुडे के अनुसार, प्रदर्शनकारियों ने घर में घुसकर देउबा दंपति को पीटा और संपत्ति में आग लगा दी। सेना ने हस्तक्षेप कर उन्हें सुरक्षित निकाला। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में देउबा के चेहरे से खून बहता दिखाई दिया। इस हमले ने नेपाल में हिंसा की गंभीरता को और बढ़ा दिया।
रवि लामिछाने की रिहाई
9 सितंबर को प्रदर्शनकारियों ने ललितपुर के नक्खू जेल पर धावा बोलकर राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (रास्वपा) के अध्यक्ष रवि लामिछाने को रिहा कराया। लामिछाने सहकारी धोखाधड़ी के आरोप में अप्रैल 2025 से जेल में थे। खबरहब के अनुसार, जेल के गेट तोड़कर प्रदर्शनकारियों ने उन्हें उनकी पत्नी निकिता पौडेल को सौंप दिया। इस दौरान 1,500 अन्य कैदियों के भागने की खबर ने अराजकता को और बढ़ाया। लामिछाने ने रिहाई के बाद प्रदर्शनकारियों को संबोधित किया और भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई जारी रखने की बात कही।
9 सितंबर को प्रधानमंत्री ओली ने राष्ट्रपति पौडेल को अपना इस्तीफा सौंप दिया। उन्होंने कहा कि वे "देश में असाधारण परिस्थितियों" के कारण पद छोड़ रहे हैं। उसी दिन गृह मंत्री रमेश लेखक, स्वास्थ्य मंत्री प्रदीप पौडेल और कृषि मंत्री रामनाथ अधिकारी ने भी इस्तीफा दे दिया। लेखक ने पुलिस कार्रवाई में प्रदर्शनकारियों की मौत की नैतिक जिम्मेदारी ली। राष्ट्रपति पौडेल ने ओली का इस्तीफा स्वीकार करने के बाद खुद भी पद छोड़ दिया। रास्वपा के 21 सांसदों ने सामूहिक इस्तीफा दे दिया, जिससे संसद भंग करने और नए चुनाव कराने की मांग तेज हो गई है।
35 वर्षीय बालेन शाह इस आंदोलन में युवाओं के लिए प्रेरणा बनकर उभरे हैं। रैपर से राजनेता बने बालेन ने 2022 में स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में काठमांडू के मेयर का चुनाव जीता था। न्यूयॉर्क टाइम्स के अनुसार, उनकी जीत ने नेपाल की पारंपरिक राजनीति को चुनौती दी। बालेन ने भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त नीति अपनाई और सड़कों की सफाई, सरकारी स्कूलों की निगरानी और टैक्स चोरी रोकने जैसे कदम उठाए। उनकी लोकप्रियता ने उन्हें अगले संभावित प्रधानमंत्री के रूप में चर्चा में ला दिया है।
सोशल मीडिया पर #Nepokid और #BalenForPM जैसे हैशटैग ट्रेंड कर रहे हैं। बालेन ने कहा, "यह आंदोलन केवल सोशल मीडिया तक सीमित नहीं है, बल्कि भ्रष्टाचार और गैर-जवाबदेही के खिलाफ जनता का गुस्सा है।" हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि वे 28 साल से कम उम्र के प्रदर्शनकारियों के साथ मार्च में शामिल नहीं हो सकते, क्योंकि आयोजकों ने उम्र सीमा तय की थी।
नेपाल में अशांति के कारण भारत-नेपाल सीमा पर सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर, बहराइच, महराजगंज, बलरामपुर, श्रावस्ती, लखीमपुर खीरी और पीलीभीत के साथ-साथ बिहार के सात जिलों में सीमा को 24 घंटे के लिए बंद कर दिया गया है। सिद्धार्थनगर के सोनौली बॉर्डर पर सैकड़ों भारतीय पर्यटक फंसे हुए हैं। कई लोग पशुपतिनाथ मंदिर की यात्रा के लिए गए थे, लेकिन उड़ानें रद्द होने और सीमा बंद होने के कारण वापस लौट रहे हैं।
भारतीय विदेश मंत्रालय की सलाह
भारतीय विदेश मंत्रालय ने 9 सितंबर को एडवाइजरी जारी की, जिसमें भारतीय नागरिकों से नेपाल की यात्रा टालने और वहां मौजूद लोगों को अपने ठिकाने पर रहने की सलाह दी गई। काठमांडू में भारतीय दूतावास ने हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं:
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+977-980 860 2881 (व्हाट्सएप कॉल सुविधा)
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+977-981 032 6134 (व्हाट्सएप कॉल सुविधा)
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ईमेल: helpdesk.eoiktm@gmail.com
दूतावास ने भारतीय नागरिकों से पंजीकरण करने को कहा है ताकि आपात स्थिति में सहायता दी जा सके। यह आंदोलन नेपाल की राजनीति में बड़ा बदलाव ला सकता है। बालेन शाह और रवि लामिछाने जैसे नेताओं की लोकप्रियता से एक नई राजनीतिक शक्ति उभर सकती है। हालांकि, जेल से कैदियों के भागने और हिंसा ने देश में अराजकता की स्थिति पैदा कर दी है।
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