टोक्यो में 77वें आईसीसीआर दिवस पर आम्रपाली संस्थान के कलाकारों ने बिखेरी भारतीय संस्कृति की छटा
नृत्य के साथ-साथ वहाँ आयोजित 'भारत प्रदर्शनी' में देश की विविध कलाकृतियों को प्रदर्शित किया गया। इसमें असम का मूगा रेशम, छत्तीसगढ़ के मुखौटे, पश्चिम बंगाल की साड़ियाँ, मिजोरम के आभूषण और उत्तर प्रदेश की पीतल की मूर्ति
जापान के टोक्यो शहर में आयोजित 77वें आईसीसीआर दिवस समारोह में असम के प्रमुख सांस्कृतिक संगठन 'आम्रपाली (सोसाइटी फ़ॉर आर्ट्स)' के कलाकारों ने अपनी शानदार प्रस्तुतियों से दर्शकों का मन मोह लिया। भारतीय दूतावास और स्वामी विवेकानंद कल्चरल सेंटर के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम में डॉ. प्रणामी भगवती ने अपनी छात्राओं के साथ कथक नृत्य पेश किया।
इस नृत्य का निर्देशन रुद्र जयंत भगवती ने किया था। कार्यक्रम की शुरुआत 'बोरगीत' शैली में मंगलाचरण से हुई, जिसके बाद तराना और वंदे मातरम् की मनमोहक प्रस्तुति दी गई। डॉ. भगवती ने जापानी संगीत की धुन पर 'अभिनय' के माध्यम से एक नायिका के विभिन्न भावों को बखूबी दर्शाया, जिसे दर्शकों ने खूब सराहा। संस्थान की छात्राएं वामिएल प्रणामी कश्यप और साईप्रिया नंदी पुरकायस्थ ने भी अपनी कला से सबका ध्यान खींचा।
नृत्य के साथ-साथ वहाँ आयोजित 'भारत प्रदर्शनी' में देश की विविध कलाकृतियों को प्रदर्शित किया गया। इसमें असम का मूगा रेशम, छत्तीसगढ़ के मुखौटे, पश्चिम बंगाल की साड़ियाँ, मिजोरम के आभूषण और उत्तर प्रदेश की पीतल की मूर्तियाँ शामिल थीं। प्रदर्शनी का प्रबंधन अबीगैल न्गाइज़ेमकिम गांगटे और उनके साथियों ने किया। इस सांस्कृतिक दल में सात सदस्य शामिल थे। इस अवसर पर डॉ. भगवती ने 'आम्रपाली पत्रिका' के नए अंक सांस्कृतिक केंद्र के निदेशक अमन आकाश को भेंट किए। समारोह में वामिएल ने अपने भाषण के जरिए भारत और जापान के सांस्कृतिक संबंधों पर भी बात की। डॉ. भगवती ने कहा कि भारतीय संस्कृति और विशेषकर पूर्वोत्तर भारत की कला को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाना उनके लिए सौभाग्य की बात है।
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