PM मोदी ने पाकिस्तान के सामने रखीं तीन सख्त शर्तें: 'आतंकी ढांचे को पूरी तरह समाप्त करना ही होगा'
यह सख्त रुख 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद आया, जिसमें 26 लोग, ज्यादातर पर्यटक, मारे गए थे। इस हमले की जिम्मेदारी द रेसिस्टेंस फ्रंट (TRF) ने ली, जिसे पाकिस्ता...
नई दिल्ली: भारत ने पाकिस्तान को आतंकवाद के खिलाफ अब तक का सबसे सख्त और स्पष्ट संदेश दे दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में पाकिस्तान के सामने तीन सख्त शर्तें रखीं, जिसमें आतंकी ढांचे को पूरी तरह समाप्त करने की मांग प्रमुख है। पीएम मोदी ने कहा कि पाकिस्तान की सरकार और सेना जिस तरह आतंकवाद को पोषित और संरक्षण दे रही है, वह एक दिन पाकिस्तान को ही नष्ट कर देगा।
भारत ने यह भी स्पष्ट किया कि पाकिस्तान के हर कदम की निगरानी होगी और आतंकवाद के खिलाफ उसका आचरण हर दिन, हर क्षण जांचा जाएगा। यह बयान हाल के भारत-पाकिस्तान तनाव और 10 मई को हुए सीजफायर के बाद आया है, जिसने क्षेत्रीय और वैश्विक मंचों पर व्यापक चर्चा छेड़ दी है।
मोदी की तीन सख्त शर्तें
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में पाकिस्तान के लिए तीन स्पष्ट शर्तें रखीं, जो भारत की आतंकवाद के प्रति जीरो टॉलरेंस नीति को रेखांकित करती हैं:
- आतंकी हमले का मुंहतोड़ जवाब: भारत पर यदि कोई आतंकी हमला होता है, तो उसका जवाब भारत अपनी शर्तों पर और अपनी तरह से देगा। पीएम मोदी ने कहा, "हर आतंकी हमले की जड़ों पर कठोर कार्रवाई होगी। हम आतंकी सरपरस्त सरकार और आतंक के आकाओं को अलग-अलग नहीं देखेंगे।"
- न्यूक्लियर ब्लैकमेल अस्वीकार्य: पाकिस्तान द्वारा परमाणु हथियारों की धमकी को भारत अब बर्दाश्त नहीं करेगा। मोदी ने स्पष्ट किया, "कोई न्यूक्लियर ब्लैकमेल भारत नहीं सहेगा। भारत सटीक प्रहार करेगा।" यह बयान पाकिस्तान के हाल के परमाणु धमकियों के जवाब में आया है, जब उसने 8-9 मई को भारत पर ड्रोन और मिसाइल हमले किए थे।
- आतंकी ढांचे का पूर्ण सफाया: पाकिस्तान को अपने आतंकी ढांचे को पूरी तरह समाप्त करना होगा। पीएम मोदी ने कहा, "पाकिस्तान को अगर बचना है, तो उसे अपने टेरर इंफ्रास्ट्रक्चर का सफाया करना ही होगा। इसके अलावा शांति का कोई रास्ता नहीं है।" उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि आतंक और बातचीत, आतंक और व्यापार, या पानी और खून एक साथ नहीं चल सकते।
पृष्ठभूमि: पहलगाम हमले से ऑपरेशन सिंदूर तक
यह सख्त रुख 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद आया, जिसमें 26 लोग, ज्यादातर पर्यटक, मारे गए थे। इस हमले की जिम्मेदारी द रेसिस्टेंस फ्रंट (TRF) ने ली, जिसे पाकिस्तान समर्थित लश्कर-ए-तैयबा से जोड़ा जाता है। भारत ने इस हमले को पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद का हिस्सा माना और त्वरित कार्रवाई शुरू की।
- सिंधु जल संधि निलंबन: 23 अप्रैल को, कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) की बैठक में भारत ने सिंधु जल संधि को निलंबित कर दिया, जिससे पाकिस्तान की 80% कृषि और प्रमुख शहरों की जल आपूर्ति पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।
- कूटनीतिक कदम: भारत ने पाकिस्तानी नागरिकों के वीजा रद्द किए, अटारी बॉर्डर बंद किया, और पाकिस्तानी विमानों के लिए हवाई क्षेत्र बंद कर दिया।
- ऑपरेशन सिंदूर: 7 मई को, भारत ने 'ऑपरेशन सिंदूर' के तहत पाकिस्तान और POK में 9 आतंकी ठिकानों पर एयरस्ट्राइक की, जिसमें 100 से अधिक आतंकी और 40 पाकिस्तानी सैनिक मारे गए। बहावलपुर में जैश-ए-मोहम्मद और मुरीदके में लश्कर-ए-तैयबा के मुख्यालय ध्वस्त किए गए।
पाकिस्तान ने जवाब में 8-9 मई को भारत के 36 सैन्य ठिकानों पर ड्रोन और मिसाइल हमले किए, लेकिन भारत के मजबूत एयर डिफेंस सिस्टम ने इन्हें नाकाम कर दिया। इसके बाद, 10 मई को पाकिस्तानी DGMO ने भारतीय DGMO से संपर्क कर सीजफायर की गुहार लगाई, जिसे भारत ने स्वीकार किया, लेकिन सशर्त।
मोदी का संदेश: आतंक और शांति साथ नहीं
पीएम मोदी ने अपने संबोधन में कहा, "पाकिस्तानी फौज और सरकार जिस तरह आतंकवाद को खाद-पानी दे रही है, वह एक दिन पाकिस्तान को ही समाप्त कर देगा।" उन्होंने बुद्ध पूर्णिमा का जिक्र करते हुए कहा कि भगवान बुद्ध ने शांति का रास्ता दिखाया, लेकिन "शांति का मार्ग भी शक्ति से होकर जाता है।"
Also Click: पाकिस्तान से बात होगी तो POK पर होगी: भारत की सख्त रुख, आसिम मुनीर और ट्रम्प को भी स्पष्ट संदेश
मोदी ने ऑपरेशन सिंदूर को "न्याय की अखंड प्रतिज्ञा" करार दिया और कहा कि यह आतंक के खिलाफ भारत की नई नीति है। उन्होंने यह भी बताया कि भारत ने केवल आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया, न कि पाकिस्तानी नागरिकों को। साथ ही, उन्होंने दुनिया को संदेश दिया कि भारत आतंकवादियों और उनके समर्थकों में कोई अंतर नहीं करेगा।
पाकिस्तान की प्रतिक्रिया और आंतरिक स्थिति
पाकिस्तान ने सीजफायर के बाद शांति की बात शुरू की है। विदेश मंत्री इशाक डार ने कहा, "पाकिस्तान युद्ध नहीं चाहता। यदि भारत रुकता है, तो हम भी रुकेंगे।" हालांकि, श्रीनगर में सीजफायर के कुछ घंटों बाद ही विस्फोटों की खबरें आईं, जिससे भारत ने पाकिस्तान पर "बार-बार उल्लंघन" का आरोप लगाया।
पाकिस्तान की आंतरिक स्थिति भी कमजोर है। कराची में जल संकट, आर्थिक अस्थिरता, और सेना-सरकार के बीच मतभेद ने देश को कमजोर किया है। सोशल मीडिया पर कुछ X पोस्ट्स में दावा किया गया कि पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर और सरकार के बीच तालमेल की कमी है।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया
- अमेरिका: डोनाल्ड ट्रम्प ने सीजफायर को अपनी कूटनीतिक जीत बताया, लेकिन भारत ने उनकी मध्यस्थता के दावे को खारिज किया। भारत ने साफ किया कि कोई तीसरा पक्ष बातचीत में शामिल नहीं था।
- संयुक्त राष्ट्र: UN महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने शांति की अपील की, लेकिन भारत ने इसे अपनी नीति से अलग बताया।
- अन्य देश: इजराइल, कतर, और अन्य देशों ने भारत के आतंकवाद विरोधी रुख का समर्थन किया।
सोशल मीडिया और जनभावना
सोशल मीडिया, खासकर X पर, भारत के रुख को लेकर व्यापक समर्थन दिखा। एक पोस्ट में कहा गया, "मोदी जी ने साफ कहा: अब कश्मीर पर बात नहीं, सिर्फ POK पर होगी। पानी और खून एक साथ नहीं बह सकते।" एक अन्य पोस्ट में लिखा, "भारत ने 3 दिन में पाकिस्तान को उसकी औकात बता दी। अब न्यूक्लियर ब्लैकमेल भी नहीं चलेगा।"
भारत और पाकिस्तान के DGMO 12 मई को दोपहर 12 बजे फिर बात करेंगे। भारत ने साफ कर दिया है कि वह व्यापक मुद्दों पर बातचीत के लिए तैयार नहीं है, और केवल आतंकवाद और POK पर ही चर्चा होगी। पीएम मोदी ने यह भी कहा कि भारत ने अपनी जवाबी कार्रवाई को "केवल स्थगित" किया है, और पाकिस्तान के हर कदम को उसकी आतंकवाद विरोधी प्रतिबद्धता के आधार पर मापा जाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत का यह रुख न केवल पाकिस्तान, बल्कि वैश्विक समुदाय के लिए भी एक संदेश है कि वह आतंकवाद के खिलाफ अपनी नीति में कोई समझौता नहीं करेगा। रक्षा विश्लेषक ब्रह्म चेलानी ने कहा, "भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के जरिए आतंकवाद के खिलाफ नई लकीर खींच दी है।"
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पाकिस्तान को स्पष्ट शब्दों में बता दिया है कि आतंकवाद और शांति एक साथ नहीं चल सकते। उनकी तीन शर्तें—मुंहतोड़ जवाब, न्यूक्लियर ब्लैकमेल की अस्वीकृति, और आतंकी ढांचे का पूर्ण सफाया—भारत की दृढ़ नीति को दर्शाती हैं। पाकिस्तान के सामने अब यह चुनौती है कि वह भारत की इन शर्तों को स्वीकार करता है या तनाव का एक नया दौर शुरू होता है। भारत की यह नीति न केवल क्षेत्रीय स्थिरता, बल्कि वैश्विक आतंकवाद विरोधी लड़ाई के लिए भी एक मिसाल बन सकती है।
What's Your Reaction?









