पाकिस्तान से बात होगी तो POK पर होगी: भारत की सख्त रुख, आसिम मुनीर और ट्रम्प को भी स्पष्ट संदेश

भारत और पाकिस्तान के बीच हाल के दिनों में तनाव चरम पर पहुंच गया था। 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले में 26 लोग, ज्यादातर पर्यटक, मारे गए थे। भारत ने इस हमले के...

May 12, 2025 - 23:46
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पाकिस्तान से बात होगी तो POK पर होगी: भारत की सख्त रुख, आसिम मुनीर और ट्रम्प को भी स्पष्ट संदेश

नई दिल्ली: भारत ने पाकिस्तान के साथ किसी भी बातचीत को लेकर अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है। भारत ने साफ कहा है कि यदि पाकिस्तान के साथ कोई बातचीत होगी, तो वह केवल पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (POK) और आतंकवाद के मुद्दे पर होगी। यह बयान हाल ही में भारत-पाकिस्तान के बीच अमेरिका की मध्यस्थता से हुए सीजफायर के बाद आया है, जिसे लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और उनके विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने व्यापक मुद्दों पर बातचीत की बात कही थी।

भारत ने न केवल पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर, बल्कि ट्रम्प प्रशासन को भी अपनी शर्तों पर बातचीत का सख्त संदेश दे दिया है। इस कदम ने भारत की कूटनीतिक दृढ़ता और क्षेत्रीय मुद्दों पर उसकी अडिग नीति को फिर से हाईलाइट किया है।

मामले की पृष्ठभूमि

भारत और पाकिस्तान के बीच हाल के दिनों में तनाव चरम पर पहुंच गया था। 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले में 26 लोग, ज्यादातर पर्यटक, मारे गए थे। भारत ने इस हमले के लिए पाकिस्तान समर्थित आतंकवादियों को जिम्मेदार ठहराया। इसके जवाब में, भारत ने 7 मई को 'ऑपरेशन सिंदूर' के तहत पाकिस्तान और POK में नौ आतंकी ठिकानों पर सटीक हमले किए। इसके बाद पाकिस्तान ने 'ऑपरेशन बुनयान-अल-मरसूस' शुरू किया, जिसमें उसने जम्मू-कश्मीर, पंजाब, राजस्थान और गुजरात में 26 स्थानों पर ड्रोन और मिसाइल हमले किए।

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इस बढ़ते संघर्ष के बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने मध्यस्थता की पेशकश की। 10 मई को, ट्रम्प ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर घोषणा की कि भारत और पाकिस्तान ने अमेरिकी मध्यस्थता के बाद "पूर्ण और तत्काल सीजफायर" पर सहमति जताई है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने दावा किया कि दोनों देश "एक तटस्थ स्थान पर व्यापक मुद्दों पर बातचीत शुरू करेंगे।" हालांकि, भारत ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा कि कोई तीसरे पक्ष की मध्यस्थता नहीं थी और बातचीत केवल दोनों देशों के बीच सीधे हुई।

भारत का सख्त रुख: केवल POK और आतंकवाद पर बात

भारत ने स्पष्ट किया कि वह कश्मीर मुद्दे पर किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता को स्वीकार नहीं करेगा। भारतीय विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने 10 मई को एक प्रेस ब्रीफिंग में कहा, "पाकिस्तान के डायरेक्टर जनरल ऑफ मिलिट्री ऑपरेशंस (DGMO) ने भारतीय DGMO से 3:35 बजे संपर्क किया। दोनों पक्षों ने सहमति जताई कि 5 बजे से जमीन, हवा और समुद्र में सभी गोलीबारी और सैन्य कार्रवाई बंद होगी।" उन्होंने यह भी जोड़ा कि दोनों देशों के DGMO 12 मई को दोपहर 12 बजे फिर बात करेंगे, लेकिन किसी अन्य मुद्दे पर बातचीत का कोई फैसला नहीं हुआ है।

भारत ने इस मौके पर अपनी स्थिति को और मजबूत करते हुए कहा कि यदि पाकिस्तान के साथ कोई बातचीत होगी, तो वह केवल POK और आतंकवाद पर केंद्रित होगी। भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने X पर पोस्ट किया, "भारत और पाकिस्तान ने गोलीबारी और सैन्य कार्रवाई रोकने पर सहमति जताई है। भारत आतंकवाद के सभी रूपों और अभिव्यक्तियों के खिलाफ अपनी दृढ़ और अटल स्थिति बनाए रखेगा।"

सोशल मीडिया पर भी भारत के इस रुख की व्यापक चर्चा हुई। एक X पोस्ट में कहा गया, "मोदी जी ने कहा: हम अपनी शर्तों पर पाकिस्तान से बात करेंगे, बात सिर्फ POK और आतंकवाद पर होगी।" एक अन्य पोस्ट में लिखा गया, "अंतरराष्ट्रीय समुदाय भी समझ ले - पाक से बात सिर्फ PoK पर होगी।"

आसिम मुनीर और पाकिस्तान की स्थिति

पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर इस पूरे संकट में अग्रणी भूमिका में रहे हैं। अप्रैल 2025 में, मुनीर ने कश्मीर को "गले की नस" बताया था, जिसके जवाब में भारत ने कहा कि "विदेशी चीज गले में कैसे अटक सकती है, POK को खाली करना पड़ेगा।" मुनीर की कठोर बयानबाजी और पाकिस्तान की सैन्य कार्रवाइयों ने तनाव को और बढ़ाया।

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हालांकि, सीजफायर की घोषणा के बाद पाकिस्तान के उप-प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार ने X पर लिखा, "पाकिस्तान और भारत ने तत्काल प्रभाव से सीजफायर पर सहमति जताई है। पाकिस्तान हमेशा क्षेत्र में शांति और सुरक्षा के लिए प्रयासरत रहा है, बिना अपनी संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता से समझौता किए।" लेकिन, सीजफायर के कुछ ही घंटों बाद श्रीनगर में विस्फोटों की खबरें आईं, और भारत ने पाकिस्तान पर "बार-बार उल्लंघन" का आरोप लगाया। इससे संकेत मिलता है कि पाकिस्तानी सेना, जो मुनीर के नेतृत्व में है, और नागरिक सरकार के बीच तालमेल की कमी हो सकती है।

ट्रम्प की मध्यस्थता और भारत की प्रतिक्रिया

डोनाल्ड ट्रम्प ने इस सीजफायर को अपनी कूटनीतिक जीत के रूप में पेश किया। उन्होंने कहा, "लंबी रात की बातचीत के बाद, मैं यह घोषणा करते हुए प्रसन्न हूं कि भारत और पाकिस्तान ने पूर्ण और तत्काल सीजफायर पर सहमति जताई है। दोनों देशों को सामान्य ज्ञान और महान बुद्धिमत्ता का उपयोग करने के लिए बधाई।" उनके विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि उन्होंने और उप-राष्ट्रपति जेडी वेंस ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, विदेश मंत्री जयशंकर, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल, और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, सेना प्रमुख आसिम मुनीर और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार आसिम मलिक के साथ बातचीत की।

हालांकि, भारत ने ट्रम्प के दावों को सिरे से खारिज कर दिया। भारतीय अधिकारियों ने कहा कि सीजफायर का फैसला दोनों देशों के बीच सीधे हुआ, और इसमें किसी तीसरे पक्ष की भूमिका नहीं थी। भारत ने यह भी स्पष्ट किया कि वह कश्मीर को अपना अभिन्न अंग मानता है और इस पर किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता को स्वीकार नहीं करेगा। सोशल मीडिया पर भी ट्रम्प की मध्यस्थता की भूमिका को लेकर तंज कसा गया। एक X पोस्ट में लिखा गया, "मोदी ने आज के संबोधन में एक बार भी ट्रम्प का धन्यवाद नहीं किया, जबकि सीजफायर तो ट्रम्प ने करवाया था। निकाल दी सारी चौधराहट ट्रम्प की।"

POK पर भारत की नीति

भारत ने हमेशा से POK को अपना अभिन्न हिस्सा माना है और इसे पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाला क्षेत्र करार दिया है। हाल के वर्षों में, भारत ने POK को वापस लेने की अपनी मंशा को और मजबूत किया है। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत ने POK में आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया, जिससे पाकिस्तान को भारी नुकसान हुआ। 

भारत की यह नीति न केवल पाकिस्तान, बल्कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए भी एक स्पष्ट संदेश है। रक्षा विश्लेषक ब्रह्म चेलानी ने कहा, "अमेरिकी दबाव में केवल तीन दिन की सैन्य कार्रवाई को रोककर, भारत ने कश्मीर विवाद की ओर अंतरराष्ट्रीय ध्यान आकर्षित किया, न कि पाकिस्तान के सीमा पार आतंकवाद की ओर, जिसने इस संकट को जन्म दिया।" लेकिन भारत ने यह सुनिश्चित किया कि उसकी शर्तें स्पष्ट रहें: कोई भी बातचीत POK और आतंकवाद तक सीमित होगी।

भारत और पाकिस्तान के DGMO 12 मई को दोपहर 12 बजे फिर बात करेंगे। लेकिन, भारत ने साफ कर दिया है कि वह व्यापक मुद्दों पर बातचीत के लिए तैयार नहीं है, जैसा कि ट्रम्प और रुबियो ने सुझाया था। भारत का यह रुख न केवल पाकिस्तान के लिए, बल्कि अमेरिका जैसे शक्तिशाली मित्र देशों के लिए भी एक संदेश है कि वह अपनी संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता पर कोई समझौता नहीं करेगा।

पाकिस्तान के लिए यह एक मुश्किल स्थिति है। जनरल आसिम मुनीर के नेतृत्व में पाकिस्तानी सेना और नागरिक सरकार के बीच मतभेद उजागर हो रहे हैं। साथ ही, आर्थिक संकट और जल संकट जैसे आंतरिक मुद्दों ने पाकिस्तान की स्थिति को और कमजोर किया है। दूसरी ओर, भारत अपनी आर्थिक और कूटनीतिक ताकत का उपयोग करते हुए क्षेत्रीय और वैश्विक मंचों पर अपनी स्थिति को मजबूत कर रहा है।

भारत ने अपनी सख्त नीति के जरिए न केवल पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर, बल्कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को भी स्पष्ट संदेश दे दिया है कि वह अपनी शर्तों पर ही बातचीत करेगा। POK और आतंकवाद पर केंद्रित यह रुख भारत की कूटनीतिक परिपक्वता और रणनीतिक दृढ़ता को दर्शाता है। जैसे-जैसे भारत और पाकPakistan के बीच बातचीत का अगला दौर शुरू होगा, सभी की नजरें इस बात पर टिकी होंगी कि क्या पाकिस्तान भारत की शर्तों को स्वीकार करता है या फिर तनाव का एक नया दौर शुरू होता है।

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