डिंपल यादव ने मौलाना साजिद रशीदी की टिप्पणी पर एनडीए के विरोध को लेकर उठाए सवाल, मणिपुर हिंसा और ऑपरेशन सिंदूर पर बीजेपी की चुप्पी पर तंज। 

New Delhi News: नई दिल्ली में 28 जुलाई 2025 को समाजवादी पार्टी (सपा) की सांसद डिंपल यादव ने ऑल इंडिया इमाम एसोसिएशन (एआईआईए) के अध्यक्ष मौलाना....

Jul 29, 2025 - 14:01
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डिंपल यादव ने मौलाना साजिद रशीदी की टिप्पणी पर एनडीए के विरोध को लेकर उठाए सवाल, मणिपुर हिंसा और ऑपरेशन सिंदूर पर बीजेपी की चुप्पी पर तंज। 
डिंपल यादव ने मौलाना साजिद रशीदी की टिप्पणी पर एनडीए के विरोध को लेकर उठाए सवाल, मणिपुर हिंसा और ऑपरेशन सिंदूर पर बीजेपी की चुप्पी पर तंज। 

नई दिल्ली में 28 जुलाई 2025 को समाजवादी पार्टी (सपा) की सांसद डिंपल यादव ने ऑल इंडिया इमाम एसोसिएशन (एआईआईए) के अध्यक्ष मौलाना साजिद रशीदी की उनके खिलाफ की गई आपत्तिजनक टिप्पणी पर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के सांसदों के विरोध प्रदर्शन पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि यह अच्छा है कि उनके खिलाफ टिप्पणी पर कार्रवाई हो रही है, लेकिन एनडीए सांसदों को मणिपुर में महिलाओं के खिलाफ हुई हिंसा और ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारतीय सेना के अधिकारियों पर बीजेपी नेताओं की बयानबाजी के खिलाफ भी इसी तरह का विरोध करना चाहिए था।

यह विवाद तब शुरू हुआ जब मौलाना साजिद रशीदी ने एक टेलीविजन डिबेट में डिंपल यादव के दिल्ली के संसद मार्ग पर एक मस्जिद में उनके दौरे के दौरान उनके पहनावे और बैठने के तरीके पर आपत्तिजनक टिप्पणी की। 26 जुलाई 2025 को डिंपल यादव अपने पति और सपा प्रमुख अखिलेश यादव, सपा सांसद इकरा हसन, धर्मेंद्र यादव, जिया उर रहमान बर्क और अन्य के साथ इस मस्जिद में एक बैठक के लिए गई थीं। रशीदी ने डिबेट में कहा कि डिंपल ने साड़ी पहनकर और सिर न ढककर मस्जिद की गरिमा का उल्लंघन किया। उन्होंने डिंपल की तुलना सपा सांसद इकरा हसन से की, जिन्होंने सिर ढका था, और कहा, "उनकी (डिंपल की) पीठ नंगी थी।" इस टिप्पणी को व्यापक रूप से स्त्री-विरोधी और भड़काऊ माना गया।

लखनऊ के गोमतीनगर के निवासी और सपा कार्यकर्ता प्रवेश यादव ने रशीदी के खिलाफ 27 जुलाई को विभूति खंड पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज की। शिकायत में रशीदी पर न केवल महिलाओं की गरिमा को ठेस पहुंचाने, बल्कि धार्मिक उन्माद और सांप्रदायिक तनाव भड़काने का भी आरोप लगाया गया। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 79 (महिला की गरिमा का अपमान), 196 (धर्म के आधार पर शत्रुता को बढ़ावा देना), 197 (राष्ट्रीय एकता के लिए हानिकारक बयान), 299 (धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाना), 352 (जानबूझकर अपमान) और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 67 के तहत प्राथमिकी दर्ज की। मामले की जांच शुरू हो चुकी है।

  • एनडीए का विरोध प्रदर्शन

28 जुलाई को एनडीए सांसदों ने संसद परिसर में मौलाना रशीदी की टिप्पणी के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। बीजेपी सांसद बांसुरी स्वराज और लोक जनशक्ति पार्टी (राम विलास) की सांसद शांभवी चौधरी सहित कई सांसदों ने तख्तियां लेकर प्रदर्शन किया, जिन पर लिखा था, "नारी गरिमा पर प्रहार, नहीं करेंगे कभी स्वीकार।" उन्होंने रशीदी की टिप्पणी को "स्त्री-विरोधी और भड़काऊ" बताते हुए इसकी निंदा की और सपा प्रमुख अखिलेश यादव से इस पर जवाब मांगा। बीजेपी की महिला कल्याण मंत्री ने कहा कि यह टिप्पणी न केवल डिंपल यादव, बल्कि सभी महिलाओं का अपमान है। शांभवी चौधरी ने कहा, "हम सांप्रदायिक आधार पर किसी महिला की गरिमा पर हमले के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं।"

बीजेपी के अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के प्रमुख जमाल सिद्दीकी ने इस मुद्दे को और बढ़ाते हुए कहा कि डिंपल ने मस्जिद में सिर न ढककर और महिलाओं के लिए प्रतिबंधित क्षेत्र में बैठकर इस्लामी नियमों का उल्लंघन किया। उन्होंने सपा सांसद और मस्जिद के इमाम मोहिबुल्लाह नदवी पर भी मस्जिद को सपा का "अघोषित कार्यालय" बनाने का आरोप लगाया।

  • डिंपल यादव की प्रतिक्रिया

संसद के बाहर पत्रकारों से बात करते हुए डिंपल यादव ने रशीदी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज होने का स्वागत किया, लेकिन एनडीए के विरोध प्रदर्शन पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा, "यह अच्छा है कि कार्रवाई हो रही है और प्राथमिकी दर्ज की गई है। लेकिन अगर बीजेपी और एनडीए के नेता मणिपुर में महिलाओं के खिलाफ हुई हिंसा पर इसी तरह का विरोध प्रदर्शन करते और उनके साथ खड़े होते, तो यह ज्यादा सार्थक होता। ऑपरेशन सिंदूर के बाद बीजेपी के नेताओं और बड़े मंत्रियों ने हमारे सेना के अधिकारियों के खिलाफ मंच से जिस तरह की टिप्पणियां कीं, अगर एनडीए ने उनके खिलाफ आवाज उठाई होती, तो यह ज्यादा बेहतर होता।"

डिंपल ने मणिपुर में 2023 में हुई हिंसा का जिक्र किया, जहां महिलाओं के खिलाफ क्रूर हिंसा की घटनाएं सामने आई थीं और सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो ने देश को झकझोर दिया था। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि ऑपरेशन सिंदूर, जो 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में हुए आतंकी हमले के जवाब में शुरू किया गया सैन्य अभियान था, के बाद बीजेपी नेताओं ने सेना के अधिकारियों के खिलाफ आपत्तिजनक बयान दिए थे। डिंपल ने इन मुद्दों पर बीजेपी की चुप्पी को पाखंड करार दिया।

  • मौलाना साजिद रशीदी का जवाब

मौलाना रशीदी ने अपनी टिप्पणी का बचाव करते हुए कहा कि उन्होंने इस्लामी सिद्धांतों के आधार पर डिंपल यादव के मस्जिद में बैठने के तरीके पर आपत्ति जताई थी। उन्होंने कहा, "इस्लाम के अनुसार, मस्जिद में इस तरह बैठना उचित नहीं है। डिंपल को इकरा हसन से सीखना चाहिए था, जिन्होंने सिर ढका था। मैंने कुछ गलत नहीं कहा। अगर कोई मुस्लिम महिला भी ऐसा करती, तो मैं वही कहता।" रशीदी ने यह भी दावा किया कि उनकी टिप्पणी को अनावश्यक रूप से तूल दिया जा रहा है और उन्हें सपा कार्यकर्ताओं से धमकियां मिल रही हैं। उन्होंने कहा कि अगर डिंपल अपनी गलती मानकर माफी मांगती हैं, तो वह भी माफी मांग लेंगे।

रशीदी ने सपा सांसद मोहिबुल्लाह नदवी पर भी निशाना साधा, जो उस मस्जिद के इमाम हैं। उन्होंने कहा कि नदवी को डिंपल को उनके बैठने के तरीके पर टोकना चाहिए था और मस्जिद में चाय और नाश्ता परोसना इस्लाम के खिलाफ है। उन्होंने नदवी को "गुलाम की तरह बैठने" वाला और "अब इमाम नहीं, बल्कि सपा का सांसद" कहकर तंज कसा।

सपा सांसद इकरा हसन ने रशीदी की टिप्पणी की निंदा की और इसे शर्मनाक बताया। उन्होंने कहा, "किसी महिला सांसद के पहनावे पर टिप्पणी करना अनुचित है। ऐसे लोगों का सामाजिक बहिष्कार होना चाहिए। वे न तो धार्मिक नेता हैं और न ही किसी धर्म के ठेकेदार।"

कांग्रेस नेता रेणुका चौधरी ने भी रशीदी की टिप्पणी की निंदा की और कहा कि यह कुछ लोगों की रूढ़िगत सोच को दर्शाता है। उन्होंने सवाल उठाया कि कोई भी व्यक्ति किसी महिला, चाहे वह डिंपल यादव हों या कोई और, के बारे में इस तरह की टिप्पणी करने की हिम्मत कैसे कर सकता है।

हालांकि, सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने इस मामले पर सार्वजनिक रूप से कोई बयान नहीं दिया, जिस पर बीजेपी ने सवाल उठाए। बीजेपी सांसद बांसुरी स्वराज ने कहा, "अखिलेश यादव और सपा की चुप्पी हैरान करने वाली है। क्या उनकी राजनीतिक प्राथमिकताएं महिलाओं की गरिमा से ज्यादा महत्वपूर्ण हैं?"

इस घटना ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में तीव्र उथल-पुथल मचाई है। बीजेपी और एनडीए ने इस मुद्दे को सपा के खिलाफ "तुष्टिकरण की राजनीति" के रूप में इस्तेमाल करने की कोशिश की, जबकि सपा ने इसे बीजेपी की पाखंडी रणनीति करार दिया। मणिपुर हिंसा और ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र करके डिंपल ने बीजेपी को कठघरे में खड़ा किया, जिससे यह मामला केवल एक टिप्पणी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा और महिलाओं के अधिकारों जैसे बड़े मुद्दों से जुड़ गया।

मणिपुर में 2023 में हुई हिंसा, जिसमें महिलाओं के खिलाफ क्रूर अत्याचार के वीडियो वायरल हुए थे, देश के लिए एक संवेदनशील मुद्दा रहा है। ऑपरेशन सिंदूर, जो भारत की सेना द्वारा पहलगाम में आतंकी हमले के जवाब में शुरू किया गया था, भी हाल के महीनों में चर्चा में रहा है। डिंपल की टिप्पणी ने इन मुद्दों पर बीजेपी की कथित चुप्पी को उजागर करने की कोशिश की।

सोशल मीडिया पर भी इस मामले ने जोर पकड़ा। कुछ लोगों ने डिंपल के बयान का समर्थन करते हुए कहा कि बीजेपी को मणिपुर और सेना के खिलाफ बयानबाजी पर भी उतनी ही तत्परता दिखानी चाहिए थी। वहीं, कुछ ने रशीदी की टिप्पणी को गलत ठहराते हुए कहा कि यह महिलाओं की गरिमा पर हमला है

मौलाना साजिद रशीदी की डिंपल यादव के खिलाफ टिप्पणी ने न केवल व्यक्तिगत गरिमा, बल्कि धार्मिक संवेदनशीलता और राजनीतिक रणनीति के मुद्दों को सामने ला दिया। डिंपल यादव ने इस मौके का इस्तेमाल बीजेपी और एनडीए पर मणिपुर हिंसा और ऑपरेशन सिंदूर से जुड़े मुद्दों पर चुप्पी के लिए तंज कसने के लिए किया। प्राथमिकी दर्ज होने और एनडीए के विरोध प्रदर्शन के बावजूद, रशीदी अपनी टिप्पणी पर कायम हैं, जिससे यह विवाद और गहरा गया है। यह मामला महिलाओं की गरिमा, धार्मिक नियमों और राजनीतिक जवाबदेही पर एक बड़ी बहस का हिस्सा बन गया है। पुलिस जांच और इस मामले में सपा और बीजेपी के अगले कदम इसकी दिशा तय करेंगे।

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