योगी सरकार की पहल: 13,991 दिव्यांग बच्चों को एस्कॉर्ट एलाउन्स योजना से मिलेगी शैक्षिक ताकत।

Lucknow News: जब एक दिव्यांग बच्चा अकेले स्कूल नहीं जा सकता, तब शिक्षा महज किताबों की बातें रह जाती हैं। लेकिन उत्तर प्रदेश की योगी सरकार की समग्र ...

By INA News Desk
Jul 29, 2025 - 13:44
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योगी सरकार की पहल: 13,991 दिव्यांग बच्चों को एस्कॉर्ट एलाउन्स योजना से मिलेगी शैक्षिक ताकत।
योगी सरकार की पहल: 13,991 दिव्यांग बच्चों को एस्कॉर्ट एलाउन्स योजना से मिलेगी शैक्षिक ताकत।
  • योजना के तहत योगी सरकार ने स्वीकृत किये ₹839.46 लाख
  • दिव्यांग बच्चों की पात्रता प्रेरणा और समर्थ पोर्टल के माध्यम से डिजिटल रूप से होगी तय
  • विद्यालय से जिला स्तर तक बहुस्तरीय समिति निगरानी और सत्यापन की निभाएगी जिम्मेदारी
  • परिषदीय प्राथमिक, उच्च प्राथमिक और कंपोजिट विद्यालयों के कक्ष 1 से 8 तक के दिव्यांग बच्चों को मिलेगा लाभ
  • समावेशी शिक्षा के इस मॉडल में तकनीक और संवेदना साथ‑साथ चल रही हैं: संदीप सिंह

Lucknow News: जब एक दिव्यांग बच्चा अकेले स्कूल नहीं जा सकता, तब शिक्षा महज किताबों की बातें रह जाती हैं। लेकिन उत्तर प्रदेश की योगी सरकार की समग्र शिक्षा योजना इस मौन पीड़ा को समझती है। अब सरकार ने वर्ष 2025-26 में परिषदीय प्राथमिक, उच्च प्राथमिक और कंपोजिट विद्यालयों के कक्षा-1 से 8 तक के 13,991 गंभीर और बहु-दिव्यांग छात्र-छात्राओं को एस्कॉर्ट एलाउन्स योजना के अंतर्गत ₹839.46 लाख की सहायता देने का फैसला लिया है और उनमें शिक्षा के प्रति भरोसा को एक बार फिर लौटाने का काम किया है। सरकार ने यह भी जताने का प्रयास किया है कि शिक्षा सबकी और सबके लिए है।

एस्कॉर्ट एलाउन्स की इस योजना के तहत दृष्टिहीन, बौद्धिक रूप से दिव्यांग, सेरेब्रल पाल्सी से पीड़ित और जेई/एईएस प्रभावित बच्चों को ₹600 प्रतिमाह की दर से 10 माह तक डीबीटी के माध्यम से सहायता दी जाएगी, ताकि वे नियमित रूप से स्कूल आ सकें। केवल वित्तीय सहायता नहीं यह समावेशी शिक्षा की ओर एक ठोस कदम है। जिसमें प्रेरणा पोर्टल से लेकर PFMS प्रणाली तक एक साथ चलते हैं, जिसमें तकनीक, पारदर्शिता और करुणा का समन्वित रूप है। यह एक नीतिगत निर्णय के साथ संवेदनशील शासन की पहचान है। जहां वह बच्चा भी पढ़ने के सपने देख सकता है, जो चलने-फिरने तक में अक्षम हो। 

  • प्रेरणा और समर्थ पोर्टल की मदद से होगी पहचान

इस योजना की क्रियान्वयन प्रक्रिया में प्रेरणा पोर्टल और समर्थ पोर्टल की महत्वपूर्ण भूमिका है, जहाँ पहले बच्चों की पात्रता की पुष्टि की जाएगी। 40% या उससे अधिक की दिव्यांगता प्रमाणित करने वाले दस्तावेज़ अनिवार्य होंगे और विद्यालयों की नियमित उपस्थिति भी इस योजना की पात्रता की शर्त है।

  • हर स्तर पर तय है जिम्मेदारी और पारदर्शिता

संपूर्ण प्रक्रिया को निष्पक्ष और पारदर्शी बनाने के लिए विद्यालय से लेकर जिला स्तर तक हर स्तर पर जिम्मेदारी तय की गई हैं। विद्यालय के प्रधानाध्यापक पात्र छात्र-छात्राओं को चिह्नित करेंगे, खंड शिक्षा अधिकारी उसे सत्यापित करेंगे और अंततः जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी के माध्यम से अंतिम अनुमोदन होगा। इसके बाद PFMS पोर्टल के माध्यम से आधार सत्यापन और बैंक वेरिफिकेशन की प्रक्रिया पूरी कर भुगतान सुनिश्चित किया जाएगा।

  • 30 सितंबर तक पूर्ण होनी है प्रक्रिया

एफएमएंडपी मैनुअल-2024 के दिशा-निर्देशों के अनुसार पूरी योजना 30 सितंबर तक क्रियान्वित हो जाएगी। सभी भुगतान संबंधित मद के अंतर्गत ही किए जाएंगे और इसका दोहरे भुगतान या धनराशि विचलन की स्थिति में संबंधित अधिकारियों को जिम्मेदार माना जाएगा।

बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह का कहना है कि यह योजना, आर्थिक सहायता तो है ही, एक सोच भी है। ताकि कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे। उत्तर प्रदेश सरकार की नीतियों में दया, दृष्टि और दृष्टिकोण तीनों का समन्वय है। समावेशी शिक्षा के इस मॉडल में तकनीक और संवेदना साथ‑साथ चल रही हैं। क्योंकि शिक्षा तब ही सार्थक है, जब वह हर बच्चे तक पहुंचे। चाहे वह चल सके या न चल सके।

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