Ayodhya : अयोध्या जिला सहकारी बैंक में वाहन और तेल व्यय पर घोटाले के आरोप, जांच शुरू

बैंक की स्थापना 1906 में हुई थी और पहले इसका नाम फैजाबाद जिला सहकारी बैंक था, जिसे बाद में अयोध्या के रूप में बदला गया। इसका कार्यक्षेत्र अयोध्या और अम्बेडकरनग

Dec 20, 2025 - 00:22
 0  23
Ayodhya : अयोध्या जिला सहकारी बैंक में वाहन और तेल व्यय पर घोटाले के आरोप, जांच शुरू
Ayodhya : अयोध्या जिला सहकारी बैंक में वाहन और तेल व्यय पर घोटाले के आरोप, जांच शुरू
अयोध्या। किसानों, कर्मचारियों और आम जमाकर्ताओं की मेहनत की कमाई की रक्षा करने वाले बैंक में ही अनियमितताओं के आरोप लगे हैं। जिला सहकारी बैंक में वाहनों और डीजल जैसे मदों में अनावश्यक खर्च के मामले ने सहकारिता व्यवस्था को झकझोर दिया है। सूत्रों के अनुसार, सिर्फ डीजल मद में ही बड़ी रकम का दुरुपयोग हुआ लगता है, जबकि बैंक की आर्थिक स्थिति पहले से ही कमजोर बताई जा रही है।

कोऑपरेटिव बैंक इम्प्लॉयी यूनियन के महामंत्री सुधीर कुमार सिंह ने संयुक्त आयुक्त एवं संयुक्त निबंधक सहकारिता अयोध्या मंडल को पत्र भेजकर इस मामले की शिकायत की है। पत्र में स्पष्ट लिखा है कि 2015-16 से अब तक वाहनों, डीजल और अन्य मदों में बेवजह और ज्यादा खर्च दिखाया गया है, जिसका सीधा असर बैंक की वित्तीय हालत और मुनाफे पर पड़ा है। सवाल यह उठता है कि क्या बैंक के वाहन इतने चले कि इतनी बड़ी रकम डीजल में खर्च हो गई, या फिर सिर्फ कागजों पर ही यह खर्च दर्ज किया गया है। बैंक आम लोगों की पूंजी का रखवाला है, इसलिए अगर ऐसा दुरुपयोग हुआ तो इसका नुकसान सीधे जमाकर्ताओं और सहकारिता प्रणाली को पहुंचा है। यूनियन का कहना है कि यह सब सोची-समझी योजना के तहत किया गया, ताकि बैंक की कमाई कुछ चुनिंदा लोगों की जेब में चली जाए। यूनियन ने चेतावनी दी है कि अगर जांच जल्द पूरी नहीं हुई और दोषियों पर मुकदमा नहीं दर्ज हुआ, तो बैंक के सभी कर्मचारी संयुक्त आयुक्त कार्यालय के सामने प्रदर्शन करेंगे। पत्र में यह भी कहा गया है कि किसी भी गलत स्थिति की जिम्मेदारी यूनियन की नहीं होगी।

इस शिकायत पर अब जांच शुरू हो गई है। संयुक्त आयुक्त एवं संयुक्त निबंधक सहकारिता कानपुर मंडल को जांच अधिकारी बनाया गया है। जांच कमेटी गठित कर दी गई है और आरोप-पत्र तैयार करने के लिए एक महीने का समय दिया गया है। जांच के इस पत्र की प्रतियां जिला सहकारी बैंक अयोध्या और बांदा के सचिव/मुख्य कार्यपालक अधिकारी, दोनों बैंकों के अध्यक्ष, प्रशासनिक कमेटी के अध्यक्ष सहकारी बैंक केंद्रीकृत सेवा आयोग और निबंधक सहकारिता उत्तर प्रदेश सहित कई अधिकारियों को भेजी गई हैं। अब सहकारिता विभाग पर नजरें टिकी हैं कि क्या जांच सिर्फ कागजों तक सीमित रहेगी या हर डीजल बिल, वाहन रिकॉर्ड और भुगतान की गहराई से पड़ताल होगी। अगर इस बार भी मामला दब गया, तो यह सहकारिता के भरोसे पर बड़ा आघात होगा।

बैंक की स्थापना 1906 में हुई थी और पहले इसका नाम फैजाबाद जिला सहकारी बैंक था, जिसे बाद में अयोध्या के रूप में बदला गया। इसका कार्यक्षेत्र अयोध्या और अम्बेडकरनगर जिले तक फैला है। बैंक किसानों को कर्ज, बचत खाते और अन्य सहकारी सेवाएं देता है। हाल में बैंक ने मंडल में सबसे ज्यादा सदस्य बनाने का रिकॉर्ड बनाया है, जिससे इसका महत्व और बढ़ गया है। लेकिन ऐसे आरोपों से बैंक की साख पर सवाल उठ रहे हैं। अध्यक्ष धर्मेंद्र प्रताप सिंह के नेतृत्व में बैंक चल रहा है, लेकिन जांच का फोकस मुख्य रूप से सचिव/महाप्रबंधक पर है।

लोग अब पूछ रहे हैं कि इतनी बड़ी रकम डीजल में कहां खर्च हुई? अगर वाहन नहीं चले, तो पैसा कहां गया? जांच से सच्चाई सामने आएगी या यह मामला भी पुरानी फाइलों में दब जाएगा? सहकारिता विभाग को पारदर्शिता दिखानी होगी ताकि जमाकर्ताओं का विश्वास बना रहे। अगर अनियमितताएं साबित हुईं, तो दोषियों पर सख्त कार्रवाई जरूरी है।

Also Click : Sitapur : सीतापुर में डीएम ने की ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी 5.0 की तैयारियों की समीक्षा

What's Your Reaction?

like

dislike

love

funny

angry

sad

wow