Ballia : बलिया में दलदल में फंसकर दर्जनों घोड़ों की दर्दनाक मौत, एसडीएम सदर के आदेश पर तहसीलदार जांच में जुटे
हाल ही में गंगा और सरयू नदियों में पानी बढ़ने से कई गांव पानी में डूब गए हैं। इससे दलदल वाले क्षेत्र बढ़ गए हैं। किसान बताते हैं कि बारिश और बाढ़ के कारण जमीन
Report : S.ASIF HUSSAIN ZAIDI
बलिया : जिले के नरही थाना क्षेत्र में एक दुखद घटना हुई है। यहां दलदल में फंसने से दर्जनों घोड़ों की मौत हो गई। ये घोड़े किसानों के थे और वे खेतों में काम के लिए इस्तेमाल होते थे। घटना सदर तहसील के अंतर्गत आई है। जानकारी मिलते ही एसडीएम सदर ने जांच के लिए तहसीलदार को मौके पर भेजा।
घटना के बारे में बताया जा रहा है कि घोड़े चरने के लिए मैदान में गए थे। अचानक वे दलदल वाले इलाके में फंस गए। दलदल इतना गहरा था कि घोड़े खुद को निकाल नहीं पाए। किसानों ने उन्हें बचाने की कोशिश की, लेकिन सफल नहीं हो सके। परिणामस्वरूप, कई घोड़ों की मौत हो गई। विशेष रूप से, इच्छा चौबे का पूरा में चार घोड़ों की, शाहपुर बभनौली में दो घोड़ों की और कोट अजौरपुर में तीन घोड़ों की मौत हुई। कुल मिलाकर दर्जनों घोड़ों का नुकसान हुआ है।
यह इलाका बाढ़ प्रभावित है। हाल ही में गंगा और सरयू नदियों में पानी बढ़ने से कई गांव पानी में डूब गए हैं। इससे दलदल वाले क्षेत्र बढ़ गए हैं। किसान बताते हैं कि बारिश और बाढ़ के कारण जमीन नरम हो गई है, जिससे ऐसी घटनाएं हो रही हैं। घोड़ों की मौत से किसानों को बड़ा आर्थिक नुकसान हुआ है। घोड़े उनके लिए महत्वपूर्ण साधन थे, जो खेती-बाड़ी में मदद करते थे। अब किसानों को नए घोड़े खरीदने पड़ेंगे, जो उनकी आर्थिक स्थिति को और खराब करेगा।
एसडीएम सदर को जैसे ही इस घटना की सूचना मिली, उन्होंने तुरंत कार्रवाई की। उन्होंने तहसीलदार को जांच के लिए भेजा। तहसीलदार मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने प्रभावित किसानों से बात की और घटना की वजहों की जांच शुरू की। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी। प्रशासन ने किसानों को सहायता देने का आश्वासन दिया है। हालांकि, अभी तक कोई ठोस मदद नहीं मिली है। किसान प्रशासन से मुआवजे की मांग कर रहे हैं।
नरही थाना क्षेत्र में यह पहली ऐसी घटना नहीं है। पहले भी बाढ़ के दौरान जानवरों के फंसने की खबरें आती रही हैं। लेकिन इस बार घोड़ों की इतनी संख्या में मौत ने सबको चौंका दिया है। स्थानीय लोग बताते हैं कि दलदल वाले इलाकों को चिन्हित करने की जरूरत है। प्रशासन को ऐसे क्षेत्रों में चेतावनी बोर्ड लगाने चाहिए ताकि जानवर और इंसान दोनों सुरक्षित रहें। किसान भी सतर्क रहने की बात कह रहे हैं।
घटना से प्रभावित किसानों का कहना है कि उनके घोड़े परिवार के सदस्य जैसे थे। वे रोजाना उनके साथ काम करते थे। अब उनके बिना खेती का काम मुश्किल हो जाएगा। एक किसान ने बताया कि उसका घोड़ा कई सालों से उसके साथ था। उसकी मौत से वह बहुत दुखी है। अन्य किसान भी इसी तरह की भावनाएं व्यक्त कर रहे हैं। गांव में शोक का माहौल है। लोग एक-दूसरे को सांत्वना दे रहे हैं।
प्रशासन की ओर से बाढ़ प्रभावित इलाकों में राहत कार्य चल रहे हैं। लेकिन जानवरों के नुकसान पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया जा रहा है। किसान संगठनों ने इस मुद्दे को उठाया है। वे मांग कर रहे हैं कि घोड़ों की मौत पर मुआवजा दिया जाए। किसानों का कहना है कि घोड़ों की मौत सिर्फ प्राकृतिक आपदा नहीं, बल्कि लापरवाही का नतीजा भी है। अगर समय पर दलदल को साफ किया जाता तो यह नहीं होता। वे प्रशासन से अपील कर रहे हैं कि जल्द से जल्द मदद दी जाए। जांच पूरी होने के बाद रिपोर्ट आने का इंतजार है। उम्मीद है कि इससे किसानों को न्याय मिलेगा।
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