बोर्ड परीक्षा 2026: शत-प्रतिशत अंक लाने वाले छात्रों की कॉपियों की होगी दोबारा जांच, पारदर्शिता के लिए शिक्षा विभाग का सख्त आदेश।

शिक्षा बोर्ड ने इस वर्ष की मूल्यांकन प्रक्रिया को अत्यधिक पारदर्शी बनाने के लिए नए दिशानिर्देश जारी किए हैं। इन निर्देशों के तहत, राज्य के सभी

Apr 10, 2026 - 12:33
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बोर्ड परीक्षा 2026: शत-प्रतिशत अंक लाने वाले छात्रों की कॉपियों की होगी दोबारा जांच, पारदर्शिता के लिए शिक्षा विभाग का सख्त आदेश।
बोर्ड परीक्षा 2026: शत-प्रतिशत अंक लाने वाले छात्रों की कॉपियों की होगी दोबारा जांच, पारदर्शिता के लिए शिक्षा विभाग का सख्त आदेश।
  • 10वीं और 12वीं के मेधावी सावधान: 'सेंटम' स्कोर वाली उत्तर पुस्तिकाओं के पुनर्मूल्यांकन का निर्देश जारी, त्रुटिहीन परिणाम पर बोर्ड का जोर।
  • सटीकता की कसौटी पर मेधा: सार्वजनिक परीक्षाओं में पूर्ण अंक पाने वाले परीक्षार्थियों की उत्तर पुस्तिकाओं के लिए विशेष जांच दल गठित।

शिक्षा बोर्ड ने इस वर्ष की मूल्यांकन प्रक्रिया को अत्यधिक पारदर्शी बनाने के लिए नए दिशानिर्देश जारी किए हैं। इन निर्देशों के तहत, राज्य के सभी मूल्यांकन केंद्रों के मुख्य परीक्षकों को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है कि यदि किसी छात्र ने किसी भी विषय में पूर्णांक प्राप्त किए हैं, तो उसकी उत्तर पुस्तिका को कम से कम दो वरिष्ठ विशेषज्ञों द्वारा फिर से परखा जाए। यह प्रक्रिया परिणाम घोषित होने से पहले की अंतिम कड़ी होगी। विभाग का तर्क है कि अक्सर पूर्ण अंक देने में परीक्षकों से छोटी-मोटी चूक हो जाती है, जिसे बाद में सुधारना कठिन होता है। इस बार बोर्ड ने डिजिटल और भौतिक दोनों माध्यमों से उत्तर पुस्तिकाओं की सघन जांच करने की योजना बनाई है, ताकि मेधावी छात्रों की रैंकिंग में किसी भी प्रकार का विवाद न रहे।

पुनर्मूल्यांकन की इस विशेष प्रक्रिया में केवल वही शिक्षक शामिल होंगे जिनके पास संबंधित विषय में न्यूनतम 15 वर्षों का अध्यापन अनुभव है। इन विशेषज्ञों को यह निर्देश दिया गया है कि वे न केवल सही उत्तरों की जांच करें, बल्कि यह भी देखें कि क्या छात्र ने विषय की गहराई और प्रस्तुति में उन मानकों को छुआ है जो 100 प्रतिशत अंक प्राप्त करने के लिए आवश्यक होते हैं। उत्तर पुस्तिकाओं की जांच के दौरान लिखावट, तार्किक प्रवाह और चित्रों के सटीक अंकन को विशेष महत्व दिया जाएगा। बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि यह जांच किसी भी छात्र को कम अंक देने के लिए नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करने के लिए है कि जो अंक उन्हें मिले हैं, वे पूरी तरह से उनकी योग्यता के अनुरूप हों।

इस वर्ष की मूल्यांकन पद्धति में एक और महत्वपूर्ण बदलाव डिजिटल इवैल्यूएशन के रूप में देखा जा रहा है। 12वीं कक्षा की अधिकांश उत्तर पुस्तिकाओं को स्कैन करके ऑनलाइन माध्यम से जांचा जा रहा है, जिससे अंकों के योग में होने वाली गलतियों की संभावना शून्य हो गई है। हालांकि, 10वीं कक्षा के लिए अभी भी भौतिक मूल्यांकन प्रक्रिया अपनाई जा रही है। ऐसे में 'सेंटम' स्कोर वाली कॉपियों को अलग से बंडल बनाकर मुख्यालय भेजने का आदेश दिया गया है। बोर्ड के उच्च अधिकारियों की एक टीम इन चुनिंदा उत्तर पुस्तिकाओं का औचक निरीक्षण भी कर सकती है, जिससे पूरी प्रणाली में जवाबदेही तय की जा सके। यह निर्णय पिछले वर्षों में आए कुछ विवादों और अंकों के पुनर्गणना आवेदनों की बढ़ती संख्या को देखते हुए लिया गया है। यदि पुनर्मूल्यांकन के दौरान 'सेंटम' स्कोर वाली किसी उत्तर पुस्तिका में अंकों का अंतर पाया जाता है, तो संबंधित मूल परीक्षक (Evaluator) के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई भी की जा सकती है। इससे परीक्षकों में सतर्कता बढ़ेगी और वे अधिक जिम्मेदारी से कॉपियों की जांच करेंगे।

मूल्यांकन केंद्रों पर कार्यरत शिक्षकों के लिए भी यह एक नई चुनौती है। उन्हें अब सामान्य कॉपियों की तुलना में शत-प्रतिशत अंक पाने वाली कॉपियों पर अतिरिक्त समय देना होगा। विभाग ने यह भी आदेश दिया है कि एक दिन में एक परीक्षक को दी जाने वाली उत्तर पुस्तिकाओं की संख्या सीमित रखी जाए, ताकि वे थकान के कारण किसी महत्वपूर्ण बिंदु को नजरअंदाज न करें। मूल्यांकन के दौरान गुणवत्ता को मात्रा पर वरीयता देने का यह दृष्टिकोण छात्रों के शैक्षणिक भविष्य के लिए मील का पत्थर साबित हो सकता है। विशेष रूप से विज्ञान और गणित जैसे विषयों में, जहां पूर्ण अंक मिलना अधिक आम है, वहां जांच की प्रक्रिया और भी सख्त रखी गई है।

शिक्षा विभाग के इस आदेश का उद्देश्य केवल गलतियों को पकड़ना ही नहीं है, बल्कि मेधावी छात्रों की उत्तर पुस्तिकाओं को एक 'मॉडल' के रूप में सुरक्षित रखना भी है। बोर्ड की योजना है कि सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाली इन उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैन कॉपी वेबसाइट पर अपलोड की जाए, ताकि आने वाले वर्षों में छात्र यह समझ सकें कि पूर्ण अंक प्राप्त करने के लिए उत्तरों को किस प्रकार प्रस्तुत किया जाना चाहिए। इससे भविष्य के परीक्षार्थियों को एक स्पष्ट दिशा मिलेगी और वे परीक्षा की तैयारी अधिक व्यवस्थित तरीके से कर सकेंगे। पारदर्शिता की इस मुहिम को शिक्षाविदों द्वारा व्यापक समर्थन मिल रहा है, क्योंकि इससे बोर्ड की विश्वसनीयता में इजाफा होगा।

परीक्षा परिणाम तैयार करने के अंतिम चरण में इस जांच प्रक्रिया को शामिल करने से परिणामों की घोषणा में कुछ दिनों की देरी की संभावना भी जताई जा रही है। हालांकि, बोर्ड ने आश्वासन दिया है कि वे निर्धारित समय सीमा के भीतर ही परिणाम जारी करने का प्रयास करेंगे। अप्रैल के अंत या मई के प्रथम सप्ताह तक परिणामों के आने की उम्मीद है। छात्रों और अभिभावकों को सलाह दी गई है कि वे केवल आधिकारिक पोर्टल पर ही अपने अंक देखें। बोर्ड ने इस बार परिणामों के विश्लेषण के लिए एक नया सॉफ्टवेयर भी तैयार किया है जो जिलावार और स्कूलवार प्रदर्शन का विस्तृत डेटा प्रदान करेगा, जिससे शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के लिए भविष्य की नीतियां बनाने में मदद मिलेगी।

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