Deoband : जमीअत उलमा-ए-हिंद- मौलाना महमूद मदनी को दूसरी बार अध्यक्ष चुना, वक्फ संशोधन कानून और मुस्लिमों पर आरोपों की कड़ी निंदा

समिति ने प्रधानमंत्री और गृह मंत्री द्वारा मुसलमानों पर जनसंख्या बदलने और घुसपैठ के आरोप लगाने पर विचार किया। इन्हें राष्ट्रीय एकता, सामाजिक सद्भाव और

By INA News Desk
Oct 29, 2025 - 21:29
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Deoband : जमीअत उलमा-ए-हिंद- मौलाना महमूद मदनी को दूसरी बार अध्यक्ष चुना, वक्फ संशोधन कानून और मुस्लिमों पर आरोपों की कड़ी निंदा

देवबंद। जमीअत उलमा-ए-हिंद की कार्यकारी समिति की बैठक में सर्वसम्मति से मौलाना महमूद मदनी को नए कार्यकाल 2024-2027 के लिए दूसरी बार अध्यक्ष चुना गया। दिल्ली के मदनी हॉल में हुई इस बैठक में वक्फ संशोधन अधिनियम 2025, मुसलमानों पर अवैध घुसपैठ के झूठे आरोप, फिलिस्तीन शांति समझौता और देश में मुस्लिम अल्पसंख्यकों पर बढ़ते दबाव जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तृत चर्चा हुई।

बैठक में मौलाना महमूद मदनी ने देश की मौजूदा स्थिति पर चिंता जताई। उन्होंने धार्मिक प्रतीकों का अपमान, बुलडोजर कार्रवाई, धार्मिक स्वतंत्रता पर रोक और हलाल उत्पादों के खिलाफ अभियान जैसे मुद्दों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि सरकार और मीडिया संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन कर रहे हैं। इनका व्यवहार न्याय, ईमानदारी और सत्यनिष्ठा से खाली है, बल्कि इन मूल्यों के पूरी तरह विपरीत है। इन प्रयासों का मकसद मुसलमानों को देश में गुलाम बनाना और दूसरे दर्जे के नागरिक का दर्जा देना है, जो सांप्रदायिक ताकतों की लंबी अवधि की नीति का हिस्सा है।

समिति ने प्रधानमंत्री और गृह मंत्री द्वारा मुसलमानों पर जनसंख्या बदलने और घुसपैठ के आरोप लगाने पर विचार किया। इन्हें राष्ट्रीय एकता, सामाजिक सद्भाव और संवैधानिक समानता के लिए हानिकारक बताया। एक प्रस्ताव में कहा गया कि केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट और संसद में कई बार लिखित रूप से स्वीकार किया है कि उसके पास अवैध घुसपैठियों की कोई पुष्ट संख्या नहीं है। इसलिए ये आरोप झूठे हैं। जमीअत ऐसे भड़काऊ और विभाजनकारी बयानों का कड़ा विरोध करती है। जमीअत शुरू से ही अवैध घुसपैठ के खिलाफ रही है और मानती है कि अगर कोई घुसपैठ हो रही है तो इसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार और गृह मंत्रालय की है।

समिति ने वक्फ संशोधन कानून को धार्मिक पहचान और वक्फ संपत्तियों की स्वायत्तता के लिए बड़ा खतरा बताया। इसे संविधान के अनुच्छेद 14, 15, 21, 25, 26, 29 और 300-ए का उल्लंघन माना। कानून में गैर-मुस्लिमों को केंद्रीय वक्फ परिषद और राज्य वक्फ बोर्डों में शामिल करने को धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप कहा। जमीअत ने कानून को तुरंत वापस लेने की मांग की। साथ ही सभी वक्फ म्यूटवाल्लियों, संस्थाओं और जिम्मेदार व्यक्तियों से वक्फ संपत्तियों का पंजीकरण वेब पोर्टल पर समय पर पूरा करने की अपील की। साथ ही पंजीकरण की समय सीमा कम से कम दो साल बढ़ाने की मांग की।

फिलिस्तीन मुद्दे पर समिति ने कहा कि मध्य पूर्व में शांति 1967 की सीमाओं के अंदर फिलिस्तीन की संप्रभु राज्य की स्थापना पर निर्भर है, जिसकी राजधानी पूर्वी जेरूसलम हो। अल-अक्सा मस्जिद जैसे महत्वपूर्ण धार्मिक स्थलों की सुरक्षा सुनिश्चित हो। जमीअत ने नवंबर के अंत में केंद्रीय प्रबंध समिति की बैठक बुलाने का फैसला किया। बैठक में दिवंगत हाफिज पीर शब्बीर अहमद, पूर्व महासचिव अब्दुल्लाह उमर नसीफ, सऊदी अरब के मुफ्ती अजीज अल-शेख जैसे प्रमुख व्यक्तियों को श्रद्धांजलि दी। मौलाना हकीमुद्दीन कासमी (महासचिव), दारुल उलूम देवबंद के मुफ्ती अबुल कासिम नोमानी, उपाध्यक्ष मौलाना मोहम्मद सलमान बाजनौरी, मुफ्ती अहमद देवला, नायब अमीर-ए-हिंद मुफ्ती सैयद मोहम्मद सलमान मंसूरपुरी, मौलाना रहमतुल्लाह कश्मीरी, मौलाना निजाम अहमद फारूकी, हाजी मोहम्मद हारून भोपाल, मौलाना मोहम्मद आबिद कासमी (दिल्ली), हाजी मोहम्मद हसन (तमिलनाडु), मौलाना मोहम्मद इब्राहिम (केरल), मुफ्ती मोहम्मद जावेद इकबाल (किशनगंज), मौलाना मोहम्मद नाजिम (पटना), मुफ्ती हबीबुर रहमान (इलाहाबाद), मौलाना याह्या करीमी (मेवात), मौलाना रफीक अहमद (बड़ोदा), प्रोफेसर निसार अंसारी (अहमदाबाद), मौलाना सिद्दीकुल्लाह चौधरी (पश्चिम बंगाल), मुफ्ती याह्या (असम), मुफ्ती अब्दुल सलाम (पश्चिम बंगाल), मौलाना अब्दुल कादिर (असम), मौलाना गुलाम कादिर (पुंछ), मौलाना मोहम्मद अकील (शामली), मुफ्ती मोहम्मद राशिद आजमी, मुफ्ती अब्दुल रहमान (अंबेडकर नगर), मौलाना कलीमुल्लाह (अंबेडकर नगर), मौलाना मोहम्मद सलमान बाजनौरी, कारी मोहम्मद शौकत (वैत), मौलाना अब्दुल हई मुफ्ताही (मऊ), हाफिज उबैदुल्लाह (वाराणसी), हाफिज नदीम सिद्दीकी (महाराष्ट्र), मौलाना सिराजुद्दीन चिश्ती (अजमेर), मुफ्ती इफ्तिखार अहमद कासमी (कर्नाटक) और मौलाना सैयद मोहम्मद मदनी (देवबंद) सहित कई नेता मौजूद रहे।

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