Gorakhpur : फर्जी IAS का जाल फंसा AI से ठगे करोड़ों, चार प्रेमिकाओं में तीन गर्भवती, SDM को जड़ा था थप्पड़
जांच में सामने आया कि ललित ने यूपी में नेटवर्क बढ़ाने के लिए परमानंद को चुना। परमानंद स्थानीय संपर्कों से बिल्डरों तक पहुंचाता। अभिषेक तकनीकी सहायता देता। तीनों का ता
उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में पुलिस ने एक बड़े धोखाधड़ी नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। बिहार के सीतामढ़ी जिले के मेहसौल थाना क्षेत्र के रहने वाले ललित किशोर उर्फ गौरव कुमार सिंह को गिरफ्तार किया गया। वह खुद को 2022 बैच का IAS अधिकारी बताकर लोगों को ठग रहा था। एमएससी पास यह युवक पहले सीतामढ़ी में सुपर 100 कोचिंग सेंटर में गणित का शिक्षक था। 2023 में एडमिशन के नाम पर दो लाख रुपये लेने के आरोप में वहां से निकाल दिया गया। उसके बाद उसने फर्जी IAS बनकर अपराध की दुनिया में कदम रखा। गिरफ्तारी गुलरिहा थाना क्षेत्र में हुई, जहां वह एक सहयोगी से मिलने आया था। पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी, जिसके आधार पर उसे पकड़ा गया। पूछताछ में सामने आया कि ललित का नेटवर्क उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और मध्य प्रदेश तक फैला हुआ था। तीन सालों में उसने इस जाल को इतना मजबूत बना लिया कि बिल्डरों और कारोबारियों को सरकारी ठेके दिलाने के नाम पर करोड़ों रुपये की ठगी की। ललित किशोर ने IAS प्रोटोकॉल बनाए रखने के लिए हर महीने करीब पांच लाख रुपये खर्च किए। उसके पास किराए पर 10 से 15 लोगों की टीम रहती थी, जिसमें गनर, मैनेजर और ड्राइवर शामिल थे। प्रत्येक गनर को 30 हजार रुपये मासिक वेतन दिया जाता था। मैनेजर को 60 हजार रुपये मिलते थे। उसके पास सफेद इनोवा और अन्य लग्जरी वाहन थे, जिनकी मासिक ईएमआई 30-30 हजार रुपये थी। इनोवा पर लाल-नीली बत्तियां लगाकर वह गांवों और स्कूलों का दौरा करता था। फर्जी आईडी कार्ड, बैच और रैंक के साथ वह खुद को उच्च अधिकारी साबित करता था। सोशल मीडिया पर साले अभिषेक कुमार की मदद से फर्जी प्रोफाइल बनाए रखता था। अभिषेक सॉफ्टवेयर इंजीनियर है, जिसने AI टूल्स का इस्तेमाल कर नकली अखबार क्लिपिंग, टेंडर पेपर और फोटो एडिटिंग की। परमानंद गुप्ता नामक गोरखपुर निवासी, जो अभिषेक का दोस्त था, नेटवर्क को यूपी में फैलाने में मदद करता था। परमानंद को भी गिरफ्तार किया गया। अभिषेक को बिहार से हिरासत में लिया गया।
यह नेटवर्क छह महीने से गोरखपुर में सक्रिय था। ललित ने बीआरडी मेडिकल कॉलेज के पास एक मकान किराए पर लिया था, जो गिरफ्तारी के समय ताला लगा मिला। वह चिलुआताल इलाके के झुंगिया के पास रहता था। ठगी का तरीका साफ था। वह बिल्डरों और कारोबारियों से संपर्क करता, सरकारी ठेके दिलाने का वादा करता। AI से जेनरेटेड टेंडर दस्तावेज दिखाकर विश्वास जीतता। बदले में नकद, ज्वेलरी और गिफ्ट्स ले लेता। एक बिहार के कारोबारी से 450 करोड़ का टेंडर दिलाने के नाम पर पांच करोड़ रुपये और दो इनोवा कारें रिश्वत में ले लीं। कुल मिलाकर 40 से ज्यादा लोगों को ठगा गया। ठगी की रकम दो करोड़ रुपये से ऊपर बताई जा रही है। पुलिस ने उसके पास से दो मोबाइल फोन बरामद किए। इनमें फर्जी दस्तावेजों के अलावा निजी चैट्स मिलीं। जांच में पता चला कि ललित के चार प्रेमिकाएं थीं, जो उसे IAS समझकर फंस गईं। तीन प्रेमिकाएं गर्भवती हैं। एक बिहार की लड़की से उसने मंदिर में शादी कर ली। शादीशुदा होने के बावजूद वह प्रेमिकाओं को महंगी ज्वेलरी और मोबाइल देकर लुभाता रहा। ललित की गिरफ्तारी का मुख्य कारण बिहार चुनाव के दौरान गोरखपुर रेलवे स्टेशन पर पकड़े गए 99.09 लाख रुपये का मामला बना। ग्रामीण क्षेत्र में एक व्यक्ति को संदिग्ध पाया गया। पूछताछ में उसने बताया कि यह रकम IAS गौरव कुमार ने उसे मोकामा ले जाने को दी थी। जांच में पाया गया कि गौरव कोई असली अधिकारी नहीं। सर्विलांस से ललित का पता चला। वह लखनऊ भागा था, लेकिन गोरखपुर लौटा तो फंस गया। बिहार के भागलपुर में एक घटना ने उसके रौब का लोहा मनवाया। वहां गांव का दौरा कर रहा था। असली एसडीएम ने बैच और रैंक पूछे। ललित आपा खो बैठा और एसडीएम को दो थप्पड़ जड़ दिए। एसडीएम हैरान रह गया और शिकायत तक नहीं की। इस घटना से ललित का आत्मविश्वास और बढ़ा। वह फर्जी निरीक्षण करता, लोगों को डराता और पैसे ऐंठता। नेटवर्क में किराए के लोग रौब बढ़ाने के लिए साथ चलते।
पुलिस ने बताया कि ललित का अपराधी जीवन 2022 से शुरू हुआ। पहली एफआईआर नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी की थी। इसके बाद वह अंडरग्राउंड हो गया। कोचिंग बंद करने के बाद उसने फर्जी आईडी बनाईं। सोशल मीडिया पर 2022 बैच IAS के रूप में प्रचार किया। फोटो एडिटिंग से पुरानी तस्वीरों को आधिकारिक लुक दिया। AI से नकली समाचार और दस्तावेज तैयार किए। ठगी के शिकार मुख्य रूप से बिल्डर और व्यापारी थे। सरकारी विभागों में 200 करोड़ का टेंडर दिलाने का झांसा दिया। बदले में लाखों-करोड़ों वसूले। एक मामले में 200 करोड़ ठेके के नाम पर दो करोड़ ठगे। नकद लेन-देन कैश में होता, जिसका हिसाब मोबाइल में चैट्स से मिला। पुलिस अब इन चैट्स की जांच कर रही है। प्रेमिकाओं से संबंधों का खुलासा भी इन्हीं से हुआ। तीन गर्भवती प्रेमिकाओं के मामले संवेदनशील हैं। पुलिस उन्हें सहायता पहुंचाने पर विचार कर रही। गिरफ्तारी के बाद ललित, अभिषेक और परमानंद को जेल भेज दिया गया। गोरखपुर के एसपी सिटी अभिनव त्यागी ने बताया कि नेटवर्क की गहन जांच चल रही। और मामले सामने आ सकते हैं। विभिन्न जिलों में धोखाधड़ी की शिकायतें दर्ज हैं। ललित का तार गोरखपुर-वाराणसी रूट पर सक्रिय था। बिहार चुनाव फंडिंग से जुड़े पैसे भी उसके नेटवर्क से जुड़े पाए गए। मोबाइल से रिकवर डेटा से ठगी का पैटर्न साफ हो रहा। वह छोटे-बड़े ठगी दोनों करता। नौकरी, प्रमोशन और ठेके सभी के नाम पर। किराए के होटलों में रहता, एलीट लाइफस्टाइल अपनाता। मासिक खर्च में ईएमआई, वेतन और यात्रा शामिल थी। स्कॉर्पियो और अर्टिगा जैसे वाहन नेटवर्क का हिस्सा थे। पुलिस ने इन वाहनों को जब्त किया। फर्जी दस्तावेजों की लिस्ट भी बरामद हुई। AI टूल्स के इस्तेमाल से दस्तावेज असली जैसे लगते।
जांच में सामने आया कि ललित ने यूपी में नेटवर्क बढ़ाने के लिए परमानंद को चुना। परमानंद स्थानीय संपर्कों से बिल्डरों तक पहुंचाता। अभिषेक तकनीकी सहायता देता। तीनों का तालमेल ठगी को सफल बनाता। ललित गांवों में फर्जी निरीक्षण कर रौब जमाता। स्कूलों में जाकर अफसरों को डांटता। इससे उसकी पहचान मजबूत होती। भागलपुर घटना के बाद भी वह सक्रिय रहा। एसपी ने कहा कि अंतरराज्यीय नेटवर्क होने से अन्य राज्यों की पुलिस से संपर्क किया जा रहा। बिहार में और मामले दर्ज हो सकते। ठगी की रकम का हिसाब लगाया जा रहा। दो करोड़ से ऊपर की राशि जब्त हो चुकी। प्रेमिकाओं के मामले में काउंसलिंग की व्यवस्था हो रही। ललित की शादी बिहार की लड़की से हुई, जो अब परिवार के साथ है। पुलिस पूछताछ में ललित ने अधिकांश अपराध कबूल किए। वह फर्जी नाम से आईडी बनवाने की बात स्वीकारी। सोशल मीडिया प्रमोशन साले की देन था। AI से टेंडर पेपर जेनरेट करने का तरीका बताया। ठगी के शिकार 40 से ज्यादा हैं। बिल्डरों से मुख्य रकम वसूली। छोटे व्यापारियों से नौकरी के नाम पर। नेटवर्क छह महीने से गोरखपुर में था। पहले लखनऊ में सक्रिय। वहां से भागा। गोरखपुर लौटने पर फंस गया। पुलिस ने उसके ठिकानों की तलाशी ली। बीआरडी के पास मकान से दस्तावेज मिले। मोबाइल से चैट्स डिकोड हो रही। प्रेमिकाओं की लोकेशन ट्रेस की जा रही। तीन गर्भवती प्रेमिकाओं को मेडिकल सहायता दी जाएगी। एक शादीशुदा प्रेमिका का मामला जटिल। ललित ने उन्हें IAS बताकर धोखा दिया।
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