Hardoi : हरदोई में शीतगृहों से आलू निकासी के लिए दिशा-निर्देश

इस वर्ष बाजार में आलू के दामों में अपेक्षित वृद्धि नहीं हुई है। वर्तमान में हरदोई में आलू के भाव ₹1,400 से ₹1,800 प्रति क्विंटल के बीच हैं, जो सामान्य से कम है।

Jul 24, 2025 - 21:28
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Hardoi : हरदोई में शीतगृहों से आलू निकासी के लिए दिशा-निर्देश
हरदोई में शीतगृहों से आलू निकासी के लिए दिशा-निर्देश

हरदोई : जिले के किसानों ने इस वर्ष लगभग 13,500 हेक्टेयर क्षेत्र में आलू का उत्पादन किया है। इस उत्पादन को मार्च 2025 तक जिले के 36 निजी शीतगृहों में सफलतापूर्वक भंडारित किया गया है, जिसमें कुल 3,68,150 मीट्रिक टन आलू संग्रहित है। हालांकि, वर्तमान में बाजार में आलू की मांग और आपूर्ति में संतुलन की कमी देखी जा रही है, जिसके कारण किसानों को उचित मूल्य प्राप्त करने में चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। बारिश के मौसम में मंडियों में आलू की मांग आमतौर पर बढ़ जाती है, लेकिन इस वर्ष बाजार में आलू के दामों में अपेक्षित वृद्धि नहीं हुई है। वर्तमान में हरदोई में आलू के भाव ₹1,400 से ₹1,800 प्रति क्विंटल के बीच हैं, जो सामान्य से कम है। अभी तक शीतगृहों से केवल 15% आलू की निकासी हुई है, जबकि निकासी के लिए अब केवल पांच महीने शेष हैं। इस वर्ष जिले में आलू की पैदावार सामान्य से अधिक रही है, लेकिन मांग की तुलना में आपूर्ति अधिक होने के कारण बाजार में भाव स्थिर या कमजोर बने हुए हैं।

आलू की निकासी को लेकर निम्नलिखित सलाह दी जाती है ताकि किसानों को आर्थिक नुकसान से बचाया जा सके और बाजार में स्थिरता बनी रहे:

  1. चरणबद्ध निकासी: आलू को एक साथ न निकालकर चरणबद्ध तरीके से निकालें। इससे बाजार में अधिक आपूर्ति की स्थिति से बचा जा सकता है।

  2. बाजार की मांग का ध्यान: निकासी से पहले स्थानीय और क्षेत्रीय मंडियों में मांग और आपूर्ति की स्थिति का आकलन करें। मांग बढ़ने पर ही अधिक मात्रा में आलू निकालें।

  3. लंबे समय तक भंडारण से बचें: यह जरूरी नहीं कि सितंबर तक आलू के दाम बढ़ ही जाएं। लंबे समय तक शीतगृह में आलू रखने से नुकसान की संभावना बढ़ सकती है, क्योंकि अंतिम चरण में अधिक आपूर्ति के कारण दाम और गिर सकते हैं।

  4. संतुलित निकासी: नियमित और संतुलित निकासी से बाजार में स्थिरता बनी रहेगी, जिससे किसानों को उचित मूल्य मिलने की संभावना बढ़ेगी।

  • यदि सभी किसान एक साथ बड़ी मात्रा में आलू निकालते हैं, तो बाजार में आपूर्ति अचानक बढ़ने से दामों में और गिरावट आ सकती है।

  • देर से निकासी करने पर शीतगृहों में आलू की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है, जिससे उसका बाजार मूल्य और कम हो सकता है।

  • बाजार में मांग बढ़ने की प्रतीक्षा में लंबे समय तक भंडारण करने से भंडारण लागत बढ़ेगी, जिससे किसानों का मुनाफा कम हो सकता है।

  • मंडी भाव की निगरानी: किसान नियमित रूप से मंडी भाव की जानकारी लें। वेबसाइट्स जैसे www.kisandeals.com या www.commodityonline.com पर हरदोई मंडी के ताजा भाव उपलब्ध हैं।

  • स्थानीय व्यापारियों से संपर्क: स्थानीय व्यापारियों और मंडी समितियों से संपर्क बनाए रखें ताकि मांग और आपूर्ति की सटीक जानकारी मिल सके।

  • निर्यात की संभावनाएं: यदि संभव हो, तो अन्य राज्यों या क्षेत्रों में आलू की मांग की जानकारी लें, जहां बेहतर दाम मिल सकते हैं।

  • कृषि विभाग से मार्गदर्शन: जिला कृषि विभाग या किसान कल्याण केंद्र से संपर्क करें, जो आलू निकासी और बाजार रुझानों के बारे में मार्गदर्शन प्रदान कर सकते हैं।

हरदोई के किसानों से कहा गया कि वे आलू की निकासी को जल्दबाजी में या देरी से करने के बजाय बाजार की स्थिति के अनुसार धीरे-धीरे और संतुलित तरीके से करें। इससे न केवल आर्थिक नुकसान से बचा जा सकता है, बल्कि बाजार में स्थिरता बनाए रखने में भी मदद मिलेगी। नियमित रूप से मंडी भाव और मांग की जानकारी लेते रहें ताकि सही समय पर सही निर्णय लिया जा सके।

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