Lucknow : ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक महत्व के 40 स्मारकों/पुरास्थलों को संरक्षित करने का निर्णय 

इसी प्रकार यज्ञशाला, बरूआसागर, तह0 बड़ागांव, झांसी, शिवमंदिर तह0 सदर, झांसी, मगलगढ़ का किला, ग्राम चरखारी, तह0 चरखारी, महोबा, गुमान बिहारी मंदिर, ग्राम रायनपुर, तह0 चरखारी, महोबा, श्री वासुदेव जी मंदिर महोबा, तालकोठी ग्राम चरखारी

May 11, 2026 - 22:35
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Lucknow : ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक महत्व के 40 स्मारकों/पुरास्थलों को संरक्षित करने का निर्णय 
Lucknow : ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक महत्व के 40 स्मारकों/पुरास्थलों को संरक्षित करने का निर्णय 

  • जीर्ण-शीर्ण एवं खंडहर में  बदलते स्मारकों को संरक्षित कर बुनियादी सुविधाएं सुलभ करायी जाएगी-जयवीर सिंह
  • अनूठी शैली में बने इन स्मारकों को नया स्वरूप देकर पर्यटन को बढ़ावा दिया जाएगा

लखनऊ : उत्तर प्रदेश पुरातत्व विभाग द्वारा प्रदेश में स्थित 40 स्मारकों, पुरास्थलों को संरक्षित किए जाने का निर्णय लिया गया है। इसके अलावा 03 स्मारक, पुरास्थलों और असंरक्षित घोषित किया गया है। संरक्षित किए जाने वाले स्मारक पुरातात्विक एवं ऐतिहासिक दृष्टिकोण से अति महत्वपूर्ण है। इसमें से कुछ ढाई हजार से लेकर तीन हजार वर्ष पुराने है। कुछ स्मारक कुषाण काल के प्रतीत होते है। 

यह जानकारी आज यहां उ0प्र0 के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री जयवीर सिंह ने दी। उन्होनंे बताया कि प्रदेश में प्राचीन एवं अति प्राचीन स्मारक, स्थापत्य कला के अनूठे धरोहर है। यह स्मारक अपने आप में तत्कालीन समय की सांस्कृतिक भव्यता एवं इतिहास समेटे हुए है। मौजूदा समय में जीर्ण-शीर्ण तथा खंडहर में परिवर्तित हो चुके है। राज्य सरकार इन स्मारकों को संरक्षित कर नया स्वरूप देने का निर्णय लिया है। साथ ही इन स्मारकों के आस-पास अवस्थापना सुविधाएं विकसित कर पर्यटकों एवं श्रद्धालुओं को आकर्षित करना है। इसके अलावा प्राचीन स्थलों को बचाना भी है। 

पर्यटन मंत्री ने बताया कि जिन स्मारकों को संरक्षित करने का निर्णय लिया गया है। उनमें सीतापुर के 02, उन्नाव के 03, हरदोई एवं बाराबंकी के 01-01, कानपुर नगर के 02, रायबरेली का 01, लखनऊ के 02, प्रतापगढ़ का 01, फतेहपुर के 02 तथा सिद्धार्थनगर महाराजगंज, देवरिया के 01-01, जालौन के 05, ललितपुर का 01, झांसी के 05, महोबा के 04, गाजीपुर के 01, वाराणसी के 02, आगरा, मैनपुरी, सहारनुपर तथा रामपुर के 01-01 शामिल है। जिन स्मारकों को असंक्षित घोषित किया गया है, उनमें कंसकिला तहसील सदर मथुरा, गोण्डवानी मंदिर ग्राम पिपरई, तहसील तालबेहट, जनपद ललितपुर तथा अमरगढ़ का शिवमंदिर ग्राम उदई शाहपुरं तहसील पट्टी जनपद प्रतापगढ़ शामिल है। 

संरक्षित स्थलों में शिवमंदिर, वकुंड तहसील लहरपुर, जनपद सीतापुर परेवा जाल का टीला तहसील सिधौली, सीतापुर, माहे पासी का टीला तहसील सदर जनपद उन्नाव, प्राचीन टीला, मोहान, तहसील हसनगंज उन्नाव, शिव मंदिर औरास, उन्नाव, नागेश्वर महादेव मंदिर तहसील संडीला जनपद हरदोई, राजा कंुंवर गिरधारी सिंह की समाधि तहसील नवाबगंज, बाराबंकी, पंचमुखी शिव मंदिर तहसील घाटमपुर, कानपुर नगर, प्राचीन शिव मंदिर बिठूर कानुपर नगर, गंगकुण्ड, तहसील डलमऊ, रायबरेली, शामिल है। इसके अलावा लखनऊ के प्राचीन भवन मूसाबाग, तहसील सदर, कालाकांकर भवन मोहल्ला हैदराबाद तहसील सदर लखनऊ शामिल है।

इसके अलावा प्राचीन शिव मंदिर व तालाब रामपुर बेला, तहसील पट्टी प्रतापगढ़, राधाकृष्ण मंदिर, तहसील बिंदकी, फतेहपुर, पासी बाबा मंदिर, तहसील बिंदकी, फतेहपुर, डब्लू0सी0 पेप्पे से संबंधित भवन सिद्धार्थनगर, खड़खौला टीला तह0 फरेदा महराजगंज, खुदिया बजुर्ग टीला तह0 बरहज, देवरिया, रामजानकी व हनुमान जी का मंदिर तह0 कोंच, जालौन, लटक बिहारी मंदिर उरई, जालौन, सराफी मंदिर उरई, जालौन, मदरघाट शिवालय उरई, जालौन तथा प्राचीन स्थल सूर्य मंदिर तह0 कालपी जालौन प्राचीन बावली, तह0 मडावरा, ललितपुर, गढ़वई दुर्ग तह0 गरौठा, झांसी, दो प्रस्तर शिवमंदिर तह0 बड़ागांव, झांसी तथा हजारिया महादेव मंदिर के सम्मुख स्थित शिवालय ग्राम0 डिमरौनी, बड़ागांव , झांसी शामिल है। 

इसी प्रकार यज्ञशाला, बरूआसागर, तह0 बड़ागांव, झांसी, शिवमंदिर तह0 सदर, झांसी, मगलगढ़ का किला, ग्राम चरखारी, तह0 चरखारी, महोबा, गुमान बिहारी मंदिर, ग्राम रायनपुर, तह0 चरखारी, महोबा, श्री वासुदेव जी मंदिर महोबा, तालकोठी ग्राम चरखारी, महोबा, पंच मंदिर, तह0 कासिमाबाद, गाजीपुर, शिव मंदिर, ग्राम असवारी, राजाबा तालाब, वाराणसी, एलटी कॉलेज स्थित गोपाल लाल विला, तह0 सदर, वाराणसी, हतकठ का किला, तह0 बाह, आगरा, किरथुवा खेड़ा का किला, तह0 करहल, मैनपुरी, मिर्जा देहलवी का मकबरा, तह0 सदर, सहारनपुर तथा तूती का मकबरा, तह0 सदर, जनपद रामपुर शामिल है।

जयवीर सिंह ने बताया कि इन स्मारकों को संरक्षित एवं अतिक्रमण से बचाने के लिए बाउण्ड्रीवाल आदि का निर्माण किया जाएगा। इसके अलावा पर्यटन की दृष्टि से विकसित किया जाएगा। अधिकांश स्मारक स्थापत्य कला के दुलर्भ नमूने है जो जीर्ण-शीर्ण हो गए है। यह स्मारक हमारे प्राचीन विरासत है एवं प्राचीन इतिहास को समेटे हुए है। पर्यटन मंत्री ने बताया कि यह स्मारक हमारे गौरवशाली इतिहास और समृद्धि संस्कृति का प्रतिनिधित्व करते है। नई पीढ़ी को अपने अतीत का स्मरण कराने तथा संरक्षण के प्रति जागरूकता उत्पन्न करने के लिए इन स्मारकों को संरक्षित घोषित किया गया है। 

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