Lucknow News: प्रदेश के कृषकों को आगामी सप्ताह हेतु मौसम आधारित कृषि परामर्श

भारत मौसम विज्ञान विभाग से प्राप्त मौसम पूर्वानुमान के अनुसार इस सप्ताह के आरंभिक चरण में 22 मार्च तक प्रदेश के विंध्य, पूर्वी मैदानी एवं मध्य मैदानी कृषि जलवायु अंचलों में ...

Mar 21, 2025 - 22:16
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Lucknow News: प्रदेश के कृषकों को आगामी सप्ताह हेतु मौसम आधारित कृषि परामर्श

By INA News Lucknow.

क्रॉप वेदर वॉच ग्रुप की वर्ष 2024-25 की सत्ताईसवीं बैठक एस.के. सिंह, सचिव, उ.प्र. कृषि अनुसंधान परिषद की अध्यक्षता में शुक्रवार को परिषद के सभाकक्ष में सम्पन्न हुई। प्रदेश में मौसम के वर्तमान परिप्रेक्ष्य में किसानों को अगले दो सप्ताह हेतु कृषि प्रबन्धन के लिए निम्नलिखित सुझाव दिये गये।

  • आगामी सप्ताह का मौसम पूर्वानुमान (21-27 मार्च, 2025)

भारत मौसम विज्ञान विभाग से प्राप्त मौसम पूर्वानुमान के अनुसार इस सप्ताह के आरंभिक चरण में 22 मार्च तक प्रदेश के विंध्य, पूर्वी मैदानी एवं मध्य मैदानी कृषि जलवायु अंचलों में तड़ित झंझावात एवं झोंकेदार हवाओं (30-40 किमी प्रति घंटा) के साथ कहीं -कहीं हल्की वर्षा होने की संभावना है। इस सप्ताह के आरंभिक चरण में 22 मार्च तक प्रदेश के विंध्य, पूर्वी मैदानी एवं मध्य मैदानी कृषि जलवायु अंचलों में तड़ित झंझावात (वज्रपात) एवं झोंकेदार हवाओं (30-40 किमी प्रति घंटा) के साथ कहीं -कहीं हल्की वर्षा होने की संभावना है।इस सप्ताह के दौरान प्रदेश के भाभर तराई क्षेत्र के पूर्वी भाग में औसत साप्ताहिक अधिकतम तापमान सामान्य के आसपास तथा दक्षिणी-पश्चिमी अर्द्धशुष्क मैदानी क्षेत्र के उत्तरी भाग में यह सामान्य से (2-4 डिग्री सेल्सियस) अधिक जबकि प्रदेश के अन्य कृषि जलवायु अंचलों में औसत साप्ताहिक अधिकतम तापमान सामान्य से आंशिक रूप से (1-2 डिग्री सेल्सियस) अधिक रहने की संभावना है।

  • आगामी द्वितीय सप्ताह के मौसम का दृष्टिकोण (28 मार्च-03 अप्रैल, 2025)

इस सप्ताह के दौरान प्रदेश के समस्त कृषि जलवायु अंचलों में कोई प्रभावी वर्षा होने की संभावना नहीं है। प्रदेश के उत्तर-पूर्वी मैदानी क्षेत्र के अधिकांश भाग एवं संलग्न पूर्वी मैदानी क्षेत्र के उत्तरी भाग में औसत साप्ताहिक अधिकतम तापमान सामान्य से (2-4 डिग्री सेल्सियस) अधिक जबकि प्रदेश के अन्य कृषि जलवायु अंचलों में औसत साप्ताहिक अधिकतम तापमान सामान्य से आंशिक रूप से (1-2 डिग्री सेल्सियस) अधिक रहने की संभावना है।
राहत आयुक्त, उत्तर प्रदेश कार्यालय से प्राप्त सूचना के अनुसार 01 मार्च से आज दिनांक 21.03.2025 तक ओलावृष्टि से कानपुर नगर में 1 किसान की 0.145 हे. फसल, मथुरा में 4,367 किसानों की 1,241 हे. फसल तथा सहारनुपर में 10 किसानों की 2.94 हे. फसल क्षति हुई। इस प्रकार पूरे प्रदेश में 4,378 किसानों की 1,244.09 हे. फसल क्षति हुई।

  • मौसम के परिप्रेक्ष्य में किसानों को फसल प्रबन्धन हेतु निम्नलिखित सुझाव दिये जाते हैः-

सुरक्षा की दृष्टि से आग से बचाव हेतु गेहूं एवं जौ की कटाई के बाद फसल के गट्ठरों को बिजली के तार के नीचे न रखें। तापमान बढ़ने के पूर्वानुमान के दृष्टिगत देर से बोये गये गेहूॅं में 0.5-1 प्रतिशत पोटैशियम नाईट्रेट का पर्णीय छिड़काव पुष्पावस्था व दाना भरने की अवस्था में करें। खेत में नमी बनाये रखने के लिये 15 से 20 दिन के अंतराल पर सिंचाई करें।

जायद मक्के की फसल को 5-6 सिंचाई आवश्यक होती है अतः 10-12 दिन के अंतराल पर आवश्यकतानुसार सिंचाई करें तथा खरपतवार नियंत्रण हेतु निराई-गुड़ाई करें। जायद मक्के में मृदा परीक्षण के आधार पर उर्वरकों का प्रयोग करें। मृदा परीक्षण न होने की दशा में 80ः40ः40 कि.ग्रा. नत्रजन, फास्फोरस व पोटाश की दर से करें।

जायद फसलों की बुवाई लाइन में ही करें ताकि अंतः शस्य क्रियायें आसानी से की जा सकें। गेहूॅ की फसल शीघ्र पकने की अवस्था में है। अतः किसान भाई फसल कटाई-मड़ाई के उपरांत भण्डारण से पूर्व अनाज को अच्छी तरह से सुखा लें, जिससे नमी की मात्रा 10 प्रतिशत से अधिक न हो इसके लिये किसान भाई दानों को दांतों के नीचे दबाने से कट की आवाज आने पर इसे भण्डारण करने योग्य समझें।

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ग्रीष्मकालीन मूंगफली की बुवाई के बाद पहली सिंचाई जमाव के पूर्ण होने पर करें तथा बुवाई के 15 से 20 दिन बाद निराई-गुड़ाई करें। उर्द में थ्रिप्स के लिये निगरानी रखें। प्रथम सिंचाई के पहले नियंत्रण हेतु सुरक्षात्मक जैविक कीटनाशक नीम ऑयल का छिड़काव करें। मूंग की सम्पूर्ण उ.प्र. हेतु अधिक उपज वाली व पीला मोजैक अवरोधी संस्तुत किस्मों यथा के.एम.-2195 (स्वाती) आई.पी.एम.205-7 (विराट), आई.पी.एम.410-3 (शिखा), कनिका, वर्षा, आजाद मूंग-1, आई.पी.एम.312-20, आई.पी.एम.409-4 (हीरा), वसुधा, सूर्या तथा आजाद मूंग-1 की बुवाई यथाशीघ्र समाप्त करें। दलहनी फसलों में बीज को 200 ग्रा./10 कि.ग्रा. राइजोबियम कल्चर से उपचारित कर बुवाई करें।

जायद में सूरजमुखी की विरलीकरण कर पौधों के बीच की दूरी 15 से 20 से.मी. सुनिश्चित करें। गन्ने में काला चिकटा का प्रकोप होने पर 5 लीटर क्लोरपाईरीफॉस 800 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें।

सुनिश्चित सिंचाई की दशा में सूरन, बंडा व अरबी की बुवाई करें। आम के भुनुगा कीट की रोकथाम हेतु इमिडाक्लोप्रिड 30.5 प्रतिशत एस.सी. (0.3 मिली0/लीटर) एवं प्रोफेनोफास 50 प्रतिशत ई.सी. (1 मिली0/लीटर) पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें। आम के पाउड्री मिल्डयू रोग की रोकथाम के लिए डाइनोकैप (कैराथीन) 1.0 मिली प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें।

पशुओं में खुरपका एवं मुंहपका बीमारी (एफ.एम.डी.) का टीकाकरण अवश्य करायें। यह टीकाकरण पशुचिकित्सालयों पर निःशुल्क किसानों के द्वार पर जाकर पशुपालन विभाग द्वारा लगाया जा रहा है। बकरियों में पी.पी.आर. का टीकाकरण पशुचिकित्सालयों पर निःशुल्क पशुपालन विभाग द्वारा लगाया जा रहा है।

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