मोहम्मद रिजवान के करियर पर मंडराया संकट: बांग्लादेश के खिलाफ फ्लॉप शो के बाद चयनकर्ताओं के निशाने पर आए सीनियर बल्लेबाज।

भारतीय उपमहाद्वीप के क्रिकेट गलियारों में इन दिनों मोहम्मद रिजवान का नाम काफी चर्चा में है, लेकिन यह चर्चा उनके रनों के लिए

Mar 18, 2026 - 14:38
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मोहम्मद रिजवान के करियर पर मंडराया संकट: बांग्लादेश के खिलाफ फ्लॉप शो के बाद चयनकर्ताओं के निशाने पर आए सीनियर बल्लेबाज।
मोहम्मद रिजवान के करियर पर मंडराया संकट: बांग्लादेश के खिलाफ फ्लॉप शो के बाद चयनकर्ताओं के निशाने पर आए सीनियर बल्लेबाज।
  • पाकिस्तान क्रिकेट में बदलाव की लहर: टी20 वर्ल्ड कप से बाहर होने के बाद वनडे सीरीज में भी रिजवान की तकनीक पर उठे गंभीर सवाल
  • मोहम्मद रिजवान अपडेट 2026: 'लर्न ही लर्न' वाले बयान पर पूर्व दिग्गजों ने घेरा, टीम में जगह बचाने की कड़ी चुनौती

भारतीय उपमहाद्वीप के क्रिकेट गलियारों में इन दिनों मोहम्मद रिजवान का नाम काफी चर्चा में है, लेकिन यह चर्चा उनके रनों के लिए नहीं बल्कि उनकी गिरती फॉर्म और बल्लेबाजी तकनीक के लिए हो रही है। पाकिस्तान की राष्ट्रीय टीम के लिए पिछले कुछ वर्षों में संकटमोचक की भूमिका निभाने वाले रिजवान के लिए साल 2026 अब तक किसी बुरे सपने से कम साबित नहीं हुआ है। बांग्लादेश के खिलाफ हाल ही में समाप्त हुई तीन मैचों की एकदिवसीय श्रृंखला में पाकिस्तान को 1-2 से करारी हार का सामना करना पड़ा, जहाँ रिजवान का बल्ला पूरी तरह खामोश रहा। इस हार ने न केवल टीम के मनोबल को प्रभावित किया है, बल्कि रिजवान जैसे वरिष्ठ खिलाड़ी की टीम में उपयोगिता पर भी प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं। श्रृंखला के निर्णायक मैच में 11 रनों की हार के बाद, प्रशंसकों और पूर्व खिलाड़ियों का गुस्सा सातवें आसमान पर है, क्योंकि टीम से उम्मीद थी कि वे टी20 विश्व कप की विफलता के बाद जोरदार वापसी करेंगे।

मोहम्मद रिजवान के लिए सबसे बड़ा झटका तब लगा जब उन्हें फरवरी-मार्च 2026 में आयोजित टी20 विश्व कप के लिए पाकिस्तान की टीम में जगह नहीं दी गई। बोर्ड और टीम प्रबंधन ने आधुनिक टी20 क्रिकेट की बढ़ती मांगों और आक्रामक स्ट्राइक रेट की आवश्यकता को देखते हुए युवा खिलाड़ियों पर दांव लगाने का फैसला किया। रिजवान, जो कभी टी20 अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग में शीर्ष पर काबिज थे, उनकी धीमी बल्लेबाजी शैली और लेग-साइड पर अत्यधिक निर्भरता उनके लिए बाधक बन गई है। टी20 विश्व कप में पाकिस्तान की टीम सुपर-8 चरण से ही बाहर हो गई, जिसके बाद यह उम्मीद की जा रही थी कि एकदिवसीय श्रृंखला में रिजवान अपने अनुभव से टीम को संभालेंगे। हालांकि, बांग्लादेश के विरुद्ध तीन मैचों में वे केवल 58 रन ही बना सके, जिसमें उनका सर्वोच्च स्कोर 44 रन रहा। इस खराब प्रदर्शन ने उन दावों को और मजबूती दी है कि उनकी तकनीक अब अंतरराष्ट्रीय स्तर के तेज गेंदबाजों के सामने बेअसर साबित हो रही है।

रिजवान की तकनीक को लेकर क्रिकेट विशेषज्ञों ने काफी कड़ा रुख अपनाया है। यह देखा गया है कि जब गेंदबाज 140 किमी प्रति घंटे से अधिक की गति से गेंद फेंकते हैं, तो रिजवान के पैर सही स्थिति में नहीं आ पाते, जिससे बल्ले और गेंद के बीच एक बड़ा अंतराल पैदा हो जाता है। बांग्लादेशी तेज गेंदबाज नाहिद राणा की गति के सामने वे पूरी तरह बेबस नजर आए और बार-बार शरीर से दूर खेलने के प्रयास में अपना विकेट गंवाते रहे। आलोचकों का तर्क है कि आधुनिक क्रिकेट अब केवल लेग-साइड पर फ्लिक करने या पैडल स्वीप खेलने तक सीमित नहीं रह गया है; बल्लेबाजों को मैदान के चारों ओर रन बनाने की क्षमता विकसित करनी होगी। रिजवान के मामले में यह देखा जा रहा है कि वे क्रीज पर काफी हलचल करते हैं, जिसे विशेषज्ञों ने 'पिच पर नृत्य करने' जैसा करार दिया है, लेकिन उनके शॉट्स में वह सटीकता और शक्ति नहीं दिख रही है जो एक अंतरराष्ट्रीय स्तर के सलामी या मध्यक्रम के बल्लेबाज से अपेक्षित होती है।

बिग बैश लीग में 'रिटायर्ड आउट' का अपमान

साल 2026 की शुरुआत में मोहम्मद रिजवान के साथ ऑस्ट्रेलिया की बिग बैश लीग (BBL) में एक अभूतपूर्व घटना घटी थी। मेलबर्न रेनेगेड्स की ओर से खेलते हुए सिडनी थंडर के खिलाफ एक मैच में, उनकी धीमी बल्लेबाजी के कारण टीम प्रबंधन ने उन्हें 'रिटायर्ड आउट' कर वापस बुला लिया था। वे टी20 क्रिकेट के इतिहास में इस तरह आउट होने वाले पहले विदेशी खिलाड़ी बने। इस घटना ने दुनिया भर में सुर्खियां बटोरीं और पाकिस्तान क्रिकेट के लिए इसे एक बड़ी शर्मिंदगी के रूप में देखा गया, जिससे उनके स्ट्राइक रेट पर चल रही बहस और तेज हो गई।

रिजवान के सार्वजनिक बयानों को लेकर भी अब उन पर कटाक्ष किए जा रहे हैं। अक्सर मैचों के बाद हार की समीक्षा करते समय वे यह कहते नजर आते रहे हैं कि "हम या तो जीतते हैं या सीखते (लर्न करते) हैं।" उनके इस 'लर्न ही लर्न' वाले दर्शन पर अब पूर्व क्रिकेटरों ने तंज कसना शुरू कर दिया है। जानकारों का कहना है कि एक दशक से अधिक समय से अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेल रहे खिलाड़ी के लिए अब सीखने का समय खत्म हो जाना चाहिए और उन्हें प्रदर्शन करके दिखाना चाहिए। यह तर्क दिया जा रहा है कि केवल बातें करने से या आध्यात्मिक दर्शन देने से मैदान पर रन नहीं बनते। टीम प्रबंधन ने भी अब संकेत दे दिए हैं कि यदि वे घरेलू क्रिकेट या आगामी सीरीज में अपनी फॉर्म और तकनीक में सुधार नहीं करते हैं, तो उनकी जगह किसी युवा विकेटकीपर-बल्लेबाज को स्थायी रूप से टीम में शामिल किया जा सकता है। पाकिस्तान क्रिकेट में इस समय नेतृत्व परिवर्तन और टीम के पुनर्गठन की प्रक्रिया चल रही है। शाहीन अफरीदी की कप्तानी में टीम नए संयोजन तलाश रही है। ऐसे में रिजवान जैसे खिलाड़ियों पर यह दबाव है कि वे न केवल रन बनाएं बल्कि तेजी से रन बनाने की जिम्मेदारी भी उठाएं। बांग्लादेश के खिलाफ मिली हार के बाद टीम की चयन प्रक्रिया पर भी सवाल उठे हैं कि क्या केवल वरिष्ठता के आधार पर खिलाड़ियों को मौके मिलते रहने चाहिए। रिजवान के आंकड़ों पर गौर करें तो उनकी औसत में पिछले एक साल में भारी गिरावट आई है। विशेष रूप से विदेशी पिचों और तेज उछाल वाली गेंदों के खिलाफ उनका संघर्ष साफ दिखाई दे रहा है। बोर्ड के भीतर भी यह चर्चा गरम है कि आगामी चैंपियंस ट्रॉफी और अन्य महत्वपूर्ण टूर्नामेंटों के लिए क्या रिजवान को टीम की योजनाओं का हिस्सा बने रहना चाहिए या नहीं।

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