Pilibhit : पीलीभीत टाइगर रिजर्व- मानव-वन्यजीव संघर्ष को रोकने में डॉक्टरों की भूमिका पर विशेष कार्यशाला आयोजित

चर्चा में शामिल स्वशासी राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय के उप प्राचार्य डॉक्टर अरुण सिंह ने इस प्रयास की तारीफ की और कहा कि डॉक्टरों को पूरी इंसानियत के साथ पीड़ितों की मदद करनी चाहिए। उन्होंने चोटों की सही जांच के लिए एक तय मेडिकल नियम बनाने की सलाह भी दी।

Jun 27, 2026 - 21:41
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Pilibhit : पीलीभीत टाइगर रिजर्व- मानव-वन्यजीव संघर्ष को रोकने में डॉक्टरों की भूमिका पर विशेष कार्यशाला आयोजित
Pilibhit : पीलीभीत टाइगर रिजर्व- मानव-वन्यजीव संघर्ष को रोकने में डॉक्टरों की भूमिका पर विशेष कार्यशाला आयोजित

Report : कुँवर निर्भय सिंह, आईएनए, पीलीभीत-  उत्तर प्रदेश

पीलीभीत टाइगर रिजर्व में इंसान और वन्यजीवों के बीच होने वाले टकराव को कम करने के लिए प्रशासन और विभिन्न संस्थाएं लगातार काम कर रही हैं। इसी कड़ी में टाइगर रिजर्व प्रबंधन ने डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के साथ मिलकर 'मानव-वन्यजीव संघर्ष में डॉक्टरों की भूमिका' विषय पर एक अहम कार्यशाला का आयोजन किया। इस कार्यक्रम में साफ किया गया कि जंगली जानवरों के हमले में किसी के घायल होने पर उसके तुरंत इलाज से लेकर उसे सरकारी मदद दिलाने तक की कानूनी प्रक्रिया में डॉक्टरों का रोल सबसे बड़ा होता है।

इस कार्यक्रम के दौरान वन्यजीव विशेषज्ञों ने पर्यावरण संतुलन और वन्यजीवों के महत्व पर विस्तार से अपनी बात रखी। डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के वरिष्ठ परियोजना अधिकारी नरेश कुमार ने कहा कि पीड़ितों और उनके परिवारों को सरकारी मुआवजा दिलाने की पूरी कागजी कार्रवाई डॉक्टरों की मेडिकल रिपोर्ट पर ही टिकी होती है, इसलिए उनका पूरा सहयोग बहुत जरूरी है। वहीं उप प्रभागीय वनाधिकारी रमेश चौहान ने कानूनी नियमों की जानकारी देते हुए डॉक्टरों के सवालों के जवाब दिए। उन्होंने कहा कि पर्यावरण के लिए जितना वन्यजीवों को बचाना जरूरी है, उतना ही इंसान की जान की सुरक्षा भी सबसे ऊपर है।

चर्चा में शामिल स्वशासी राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय के उप प्राचार्य डॉक्टर अरुण सिंह ने इस प्रयास की तारीफ की और कहा कि डॉक्टरों को पूरी इंसानियत के साथ पीड़ितों की मदद करनी चाहिए। उन्होंने चोटों की सही जांच के लिए एक तय मेडिकल नियम बनाने की सलाह भी दी। वाइल्ड लाइफ बायोडायवर्सिटी कंजर्वेशन सोसायटी के महासचिव डॉक्टर अमिताभ अग्निहोत्री ने बताया कि सही और समय पर तैयार की गई मेडिकल रिपोर्ट से ही पीड़ित को आर्थिक मदद और न्याय मिल पाता है। इस जरूरी कार्यशाला में पूरनपुर, न्यूरिया, जटपुरा, शिवनगर और ललौरीखेड़ा समेत कई सरकारी अस्पतालों और मेडिकल कॉलेज के विशेषज्ञ डॉक्टरों ने हिस्सा लिया और इस समस्या को कम करने में अपना पूरा सहयोग देने का वादा किया।

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