राष्ट्रीय हिंदू फ्रंट ने जनसंख्या नियंत्रण कानून बनाने की मांग को लेकर DM हरदोई के माध्यम से  PM को संबोधित ज्ञापन सौंपा। 

Hardoi News: राष्ट्रीय हिंदू फ्रंट जो की जनसंख्या समाधान फाऊंडेशन का एक अंग है उसकी हरदोई शाखा के जिलाध्यक्ष राजीव सिंह के नेतृत्व ....

Jul 11, 2025 - 15:16
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राष्ट्रीय हिंदू फ्रंट ने जनसंख्या नियंत्रण कानून बनाने की मांग को लेकर DM हरदोई के माध्यम से  PM को संबोधित ज्ञापन सौंपा। 
राष्ट्रीय हिंदू फ्रंट ने जनसंख्या नियंत्रण कानून बनाने की मांग को लेकर DM हरदोई के माध्यम से  PM को संबोधित ज्ञापन सौंपा। 

Hardoi News: राष्ट्रीय हिंदू फ्रंट जो की जनसंख्या समाधान फाऊंडेशन का एक अंग है उसकी हरदोई शाखा के जिलाध्यक्ष राजीव सिंह के नेतृत्व में  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संबोधित ज्ञापन जिला अधिकारी हरदोई को सौंपा जिसमे प्रधानमंत्री को पहलगाम में हुए पाकिस्तान समर्थित आतंकवादियों द्वारा हमले पर ऑपरेशन सिंदूर के माध्यम से पाकिस्तान में घुसकर आतंकियों के ठिकाने को नष्ट करने के लिए एवं एवं वक्त संशोधन अधिनियम 2025 पारित करने के उनके साहसिक निर्णय हेतु बधाई दी गई साथ ही जनसंख्या विस्फोट एवं  जनसांख्यिकीय असंतुलन के कारण भारत राष्ट्र के समक्ष उत्पन्न चुनौतियों के समाधान के लिए "जनसंख्या नियंत्रण कानून" बनाकर अविलंब लागू करने की मांग  गई। 

ज्ञापन में प्रधानमंत्री से मुख्य रूप से निम्न मांगे की गई

सरकार जनसंख्या के उचित समाधान के लिए ऐसा कानून बनाए जिसमें भ्रम की स्थिति ना रहे और जाति, धर्म, क्षेत्र व भाधान के लिए ऊपर उठकर, राष्ट्रहित को सर्वोपरि मानते हुए यह कानून देश के सभी नागरिकों पर समान रूप से लागू हो।

इस कानून के सभी दंडात्मक प्रावधान कानून अधिसूचित होने की तिथि के एक वर्ष के पश्चात कानून तोड़कर दूसरी जीवित संतान से अधिक बच्चे की उत्पत्ति करने वाले जैविक माता-पिता पर लागू हों। कानून बनने के पूर्व में उत्पन्न दो से अधिक संतानों के मामले में किसी भी नागरिक पर किसी भी रूप में यह कानून लागू नहीं होगा।

जनसंख्या समाधान विषयक कानून अधिसूचित होने की तिथि के एक वर्ष के पश्चात कानून तोड़कर दूसरी से अधिक संतान उत्पन्न करने वाले दंपत्ति को सरकार द्वारा मिलने वाली सभी प्रकार की सहायता एवं अनुदान आदि समाप्त किए जाने का प्रावधान कानून में किया जाए।

वर्तमान में राजकीय सेवा में नियोजित, दो या दो से अधिक बच्चों वाले माता-पिता सरकार द्वारा कानून अधिसूचित होने की तिथि के एक वर्ष के पश्चात कानून तोड़कर अगली संतान की उत्पत्ति करने पर अपने पद पर नहीं बने रह सकें तथा भविष्य में नियोजित किए जाने की पात्रता भी समाप्त हो जाए, ऐसा प्रावधान कानून में किया जाए।

कानून अधिसूचित होने की तिथि के एक वर्ष के पश्चात कानून तोड़कर दूसरी से अधिक संतान उत्पन्न करने वाले जैविक माता-पिता व संतान को जीवन पर्यन्त मताधिकार एवं किसी भी प्रकार की चुनावी प्रक्रिया में भाग लेने से वंचित किया जाए।

कानून का एक बार उल्लंघन करने के बाद दोबारा उल्लंघन करने अर्थात चौथी संतान की उत्पत्ति की स्थिति में पिछले प्रावधानों के साथ-साथ ऐसे दंपत्ति (पति-पत्नी दोनों) की अनिवार्य नसबंदी करके उनको 10 वर्ष की जेल की सजा का प्रावधान किया जाए ताकि चौथी संतान के बारे में कोई नागरिक स्वप्न में भी ना सोच सके।

दंपत्ति को प्रथम बार में जुड़वाँ संतान उत्पन्न होने की स्थिति में परिवार पूर्ण माना जाए और अगली संतान की उत्पत्ति कानून का उल्लंघन मानी जाए। दूसरे बच्चे के समय जुड़वाँ संतान होना एक अपवाद मानकर ऐसी स्थिति में कानून प्रभावी ना हो।

जाति, धर्म व संप्रदायों से ऊपर उठकर यह प्रावधान स्पष्ट रूप से रहे कि पहली शादी से दो जीवित संतानों के साथ तलाक होने की स्थिति में स्त्री या पुरूष में से कोई भी दूसरी शादी के बाद संतानोत्पत्ति के अधिकारी नहीं रहेंगे, भले ही दूसरे जीवनसाथी को पहले से अथवा पहली शादी से कोई संतान ना हो। अगर एक बच्चा हो तो केवल एक बच्चे की उत्पत्ति का अधिकार रहे। 

बहुविवाह (एक से अधिक पत्नी) एवं बहुपतित्व विवाहों के मामले में कहीं कोई भ्रम की स्थिति नहीं रहनी चाहिए। अगर कानूनन भी कोई पुरुष एक से अधिक पत्नी रखता है और उन्हें तलाक देकर अदल-बदल करते हुए अपने जीवनकाल में अनेक शादियां करता है तो उसे सभी पत्नियों के माध्यम से अलग अलग दो-दो बच्चे पैदा करने की छूट नहीं दी जा सकती। किसी एक अथवा दो पत्नियों से कुल दो बच्चों की उत्पत्ति पर (पत्नियों अथवा पतियों की संख्या जो भी हो) परिवार पूर्ण माना जाए। कुल मिलाकर पत्नियों अथवा पतियों की संख्या कितनी भी क्यों ना हो, उसे एक परिवार मानते हुए बच्चों की कुल संख्या 2 से अधिक होना कानून का उल्लंघन माना जाए।

पूर्वोत्तर भारत के राज्यों असम, सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मिजोरम, मणिपुर, मेघालय एवं त्रिपुरा तथा बिहार, झारखण्ड, उड़ीसा एवं छत्तीसगढ़ सहित सभी आदिवासी राज्यों की मूल धार्मिक जनजातियों की जनसंख्या अवैध घुसपैठ के कारण अनुपातिक रूप से घटते जाने के कारण कुछ निश्चित समय के लिए वहां की मूल धार्मिक जनजातियों को जनसंख्या नियंत्रण कानून की परिधि से बाहर रखा जाए। अवैध घुसपैठ के पश्चात स्थानीय लड़कियों से शादी करके वहीं बस जाने वाले किसी भी बाहरी व्यक्ति / घुसपैठियों को किसी प्रकार की छूट नहीं मिलनी चाहिए।

उपरोक्त प्रावधानों के क्रियान्वयन हेतु आवश्यक होने पर संविधान में उपयुक्त संशोधन किया जाए।

देशभर के हमारे कार्यकर्ताओं की फीडबैक है कि राष्ट्रीय महत्व के विषयों के प्रति चिंतन करने वाले आम नागरिकों का स्पष्ट मानना है कि भारत में अवैध घुसपैठियों की अनुमानित संख्या करोड़ों में है जो कि भारत के पहले से ही कम पड़ रहे संसाधनों को कुतरने के साथ-साथ भारत की सुरक्षा के लिए बहुत बड़ा खतरा बन गए हैं। इसके लिए सरकार नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजंस (NRC) बिल लाकर देशभर में रह रहे अवैध घुसपैठियों की पहचान करके उन्हें अविलंब उनके देशों को निर्वासित करे। कठोर घुसपैठ नियंत्रण कानून बनाकर भारत की सीमाओं में किसी भी प्रकार की अवैध घुसपैठ को पूर्ण रूप से नियंत्रित करने की आवश्यकता है।

राष्ट्रीय विषयों की समझ रखने वाले नागरिकों का मानना है कि वक्फ कानून में संशोधन पर्याप्त नहीं है। इस विषय में हमारे संगठन की ओर से 30 मार्च 2025 को दिल्ली जंतर-मंतर पर एक महापंचायत का आयोजन किया गया था जिसमें कई हजार लोगों ने भाग लिया। सबका कहना था कि जनसंख्या विस्फोट एवं जनसांख्यिकीय असंतुलन पर कुशल एवं प्रभावी नियंत्रण के साथ ही समाज में विभेद पैदा करने वाले वक्फ कानून को समाप्त करके वक्फ बोर्ड को निरस्त कर दिया जाए तथा वक्फ बोर्ड के आधीन तमाम संपत्तियों का राष्ट्रीयकरण करके इस संपत्ति का उपयोग हॉस्पिटल तथा स्कूल-कॉलेज आदि सार्वजनिक कार्यों के लिए करने के साशा समाज के दलित वंचित वर्ग में इसका आवश्यकता अनुसार वितरण कर दिया जाए। 

इस अवसर पर प्रमुख रूप से जिला संयोजक अशोक अग्निहोत्री वरिष्ठ अधिवक्ता इंद्रेश्वर नाथ गुप्ता उपाध्यक्ष राकेश सिंह अशोक सिंह लालू महासचिव आलोक गुप्ता अखिलेश सिंह सिकरवार अरविंद सिंह रहीस  सिंह गोविंद जी रजनीश तिवारी महेंद्र पाल सिंह  प्रगट सिंह आदि काफी बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे। 

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