Saharanpur : सहारनपुर में झोलाछाप डॉक्टरों पर लगाम लगाने में स्वास्थ्य विभाग नाकाम

स्वास्थ्य विभाग कभी-कभी खानापूर्ति के लिए छापे मारता है, लेकिन कार्रवाई सतही रहती है। सूत्र बताते हैं कि कुछ झोलाछाप डॉक्टरों ने विभाग के कर्मचारियों से सेटिंग कर मेडि

By INA News Desk
Oct 10, 2025 - 22:13
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Saharanpur : सहारनपुर में झोलाछाप डॉक्टरों पर लगाम लगाने में स्वास्थ्य विभाग नाकाम
सहारनपुर में झोलाछाप डॉक्टरों पर लगाम लगाने में स्वास्थ्य विभाग नाकाम

सहारनपुर के जिला स्वास्थ्य एवं चिकित्सा विभाग के अधिकारियों की उदासीनता के कारण गांव-देहात, कस्बों और शहरों में कई जगहों पर झोलाछाप डॉक्टर बेधड़क क्लिनिक चला रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों और कस्बों में मेडिकल स्टोर्स के नाम पर अनधिकृत दवा बांटने का धंधा भी फल-फूल रहा है। सूत्रों के अनुसार, शहर के खाता खेड़ी नूर बस्ती, पीर वाली गली, खान आलमपुरा के मंदिर वाली गली, घोसीयों वाली गली, जनक नगर और माई तकिया में कई मेडिकल स्टोर्स पर अवैध क्लिनिक चलाए जा रहे हैं। यहां नशीली गोलियां और इंजेक्शन भी बेचे जा रहे हैं।

स्वास्थ्य विभाग कभी-कभी खानापूर्ति के लिए छापे मारता है, लेकिन कार्रवाई सतही रहती है। सूत्र बताते हैं कि कुछ झोलाछाप डॉक्टरों ने विभाग के कर्मचारियों से सेटिंग कर मेडिकल स्टोर के लाइसेंस हासिल कर लिए हैं। इन स्टोर्स पर वे खुलेआम इलाज कर रहे हैं। उत्तर प्रदेश या केंद्र सरकार से मान्यता प्राप्त मेडिकल कॉलेज से डी फार्मा या बी फार्मा की डिग्री या डिप्लोमा होना अनिवार्य है, लेकिन शहर और ग्रामीण इलाकों में सैकड़ों स्टोर्स ऐसे चल रहे हैं जहां प्रशिक्षित फार्मासिस्ट नहीं हैं। इससे जाहिर होता है कि स्वास्थ्य विभाग अपनी जिम्मेदारी निभाने में कितना गंभीर है।

उत्तर प्रदेश में झोलाछाप डॉक्टरों की समस्या आम है। हाल ही में संभल में 10 अवैध क्लिनिक सील किए गए, जहां फर्जी डिग्री और एलोपैथिक दवाओं का इस्तेमाल हो रहा था। फरीदाबाद में भी एक झोलाछाप डॉक्टर मुबीन खान को गिरफ्तार किया गया, उसके पास 20 प्रकार की दवाएं बरामद हुईं। श्रावस्ती के सिरसिया ब्लॉक में सीमा क्षेत्रों में अवैध मेडिकल स्टोर्स और क्लिनिकों का बोलबाला है, जहां बंगाल से आए लोग बिना योग्यता के इलाज कर रहे हैं। शाहजहांपुर में अवैध अस्पतालों का पर्दाफाश हुआ, जहां बिना रजिस्ट्रेशन के संचालन हो रहा था। स्वास्थ्य विभाग ने अभियान चलाने की कोशिश की, लेकिन जमीनी स्तर पर कार्रवाई कमजोर रही। विशेषज्ञों का कहना है कि झोलाछाप डॉक्टरों से मरीजों की जान को खतरा है, क्योंकि वे एंटीबायोटिक्स और स्टेरॉयड का गलत इस्तेमाल करते हैं। सरकार ने क्वैक हंट जैसे अभियान शुरू किए, लेकिन सहारनपुर जैसे जिलों में अभी भी चुनौती बरकरार है।

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