Sambhal : मुहर्रम पर उमड़ा अकीदतमंदों का सैलाब, इमाम हुसैन की शहादत की याद में निकले ताज़िये और मातमी जुलूस
उन्होंने बताया कि 9 मुहर्रम की रात को शहादत की रात के रूप में मनाया जाता है, जिसमें पारंपरिक रूप से घोड़ा निकाला जाता है। वहीं 10 मुहर्रम को शहर और आसपास के गांवों से सैकड़ों छोटे-बड़े ताज़िये एकत्र होकर निर्धारित मार्गों से गुज़रते हुए अपने अंतिम पड़ाव तक पहुंचते हैं।
Report : उवैस दानिश, सम्भल
मुहर्रम की 10वीं तारीख़ (यौमे आशूरा) पर शहर में अकीदत और ग़म का माहौल देखने को मिला। मुहर्रम के अवसर पर नवाब साद आदिल ने बताया कि यह महीना हज़रत इमाम हुसैन और कर्बला के 72 शहीदों की कुर्बानी की याद में मनाया जाता है।
उन्होंने कहा कि मुहर्रम का सिलसिला पहली तारीख़ से शुरू होकर 10वीं तारीख़ तक पूरे एहतराम के साथ चलता है, जिसमें मजलिस, मातम और विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
उन्होंने बताया कि 9 मुहर्रम की रात को शहादत की रात के रूप में मनाया जाता है, जिसमें पारंपरिक रूप से घोड़ा निकाला जाता है। वहीं 10 मुहर्रम को शहर और आसपास के गांवों से सैकड़ों छोटे-बड़े ताज़िये एकत्र होकर निर्धारित मार्गों से गुज़रते हुए अपने अंतिम पड़ाव तक पहुंचते हैं।
नवाब साद आदिल ने कहा कि पहले 50 से 60 फीट ऊंचे ताज़िये निकाले जाते थे, लेकिन अब सरकारी दिशा-निर्देशों के अनुरूप लगभग 12 फीट ऊंचे ताज़िये ही निकाले जा रहे हैं।
उन्होंने बताया कि शहर और ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले सभी ताज़िये चन्दौसी चौराहे पर इकट्ठा होते हैं और वहां से बाल विध्या स्कूल, आर्य समाज स्कूल, चन्दौसी चौक होते हुए निर्धारित मार्ग से आगे बढ़ते हैं।
उन्होंने कहा कि मुहर्रम केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि कर्बला की कुर्बानी, इंसानियत, सब्र और सच के लिए दी गई महान शहादत की याद को ताज़ा करने का अवसर है। इस दौरान बड़ी संख्या में अकीदतमंद शामिल होकर इमाम हुसैन को खिराज-ए-अकीदत पेश करते हैं।
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