Bihar Elections 2025: तेजस्वी यादव का तीखा प्रहार, 'बाहरी सरकार बिहार नहीं चलाएगी, बिहार का लाल ही राज्य संभालेगा'; पूर्व डिप्टी सीएम ने एनडीए पर साधा निशाना। 

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की रणभेरी बज चुकी है, और विपक्षी महागठबंधन के चेहरे तेजस्वी प्रसाद यादव ने एक बार फिर अपनी आक्रामक शैली से सत्ताधारी एनडीए को ललकारा

By INA News Desk
Oct 28, 2025 - 17:50
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Bihar Elections 2025: तेजस्वी यादव का तीखा प्रहार, 'बाहरी सरकार बिहार नहीं चलाएगी, बिहार का लाल ही राज्य संभालेगा'; पूर्व डिप्टी सीएम ने एनडीए पर साधा निशाना। 
Bihar Elections 2025: तेजस्वी यादव का तीखा प्रहार, 'बाहरी सरकार बिहार नहीं चलाएगी, बिहार का लाल ही राज्य संभालेगा'; पूर्व डिप्टी सीएम ने एनडीए पर साधा निशाना। 

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की रणभेरी बज चुकी है, और विपक्षी महागठबंधन के चेहरे तेजस्वी प्रसाद यादव ने एक बार फिर अपनी आक्रामक शैली से सत्ताधारी एनडीए को ललकारा है। 27 अक्टूबर 2025 को पटना के गांधी मैदान में आयोजित एक विशाल रैली में तेजस्वी ने कहा, 'बाहरी आकर सरकार नहीं चलाएगा बिहार का, बिहार का लाल ही बिहार को चलाने का काम करेगा।' यह बयान सीधा नीतीश कुमार और उनके गठबंधन पर तंज कसता है, जहां तेजस्वी ने बिहार के मूल निवासी बनाम बाहरी प्रभाव की बहस छेड़ दी। पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी ने रैली में एनडीए सरकार पर भ्रष्टाचार, बेरोजगारी और पलायन के मुद्दों पर जमकर हमला बोला। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे बिहार को नई दिशा दें, ताकि राज्य दिल्ली-मुंबई की तरह चमके। यह बयान सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, और BiharKaLaal जैसे हैशटैग ट्रेंड करने लगे। महागठबंधन ने तेजस्वी को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किया है, जबकि एनडीए नीतीश कुमार पर दांव लगा रहा है। चुनाव दो चरणों में हो रहे हैं, पहला चरण 6 नवंबर को और दूसरा 11 नवंबर को।

रैली में हजारों समर्थक जुटे थे। तेजस्वी ने मंच पर खड़े होकर कहा कि बिहार के लोग अब बाहरी ताकतों के इशारे पर नहीं चलेंगे। 'नीतीश जी ने कई बार गठबंधन बदले, लेकिन बिहार का विकास रुका रहा। अब समय आ गया है कि बिहार का अपना लाल, जो यहां की मिट्टी से जुड़ा हो, राज्य को संभाले।' उन्होंने नीतीश के पलटावों का जिक्र किया, कहा कि 2015 से 2024 तक नीतीश ने छह बार गठबंधन बदला, लेकिन नतीजा वही रहा- गरीबी और बेरोजगारी। तेजस्वी ने याद दिलाया कि वे खुद बिहार के लाल हैं, लालू प्रसाद यादव के बेटे, जो राज्य की राजनीति में जड़े हैं। उन्होंने कहा, 'मैं दिल्ली या लखनऊ से नहीं आया, मैं बिहार का हिस्सा हूं। मेरी हर सांस बिहार के लिए है।' रैली में मौजूद युवाओं ने जोरदार तालियां बजाईं। तेजस्वी ने आगे कहा कि अगर महागठबंधन सत्ता में आया, तो हर घर में एक नौकरी का कानून बनेगा। '20 दिनों में कार्रवाई होगी, कोई बहाना नहीं।' महिलाओं के लिए 30 हजार रुपये मासिक वेतन, मुफ्त बिजली और गैस सिलेंडर के वादे दोहराए।

तेजस्वी ने एनडीए के घोषणापत्र पर भी कटाक्ष किया। उन्होंने कहा कि सात निश्चय भाग-2 सिर्फ कागजों पर है। 'नीतीश जी कहते हैं कि बिहार विशेष राज्य बनेगा, लेकिन केंद्र ने क्या किया? बिहार के 75 लाख प्रवासी मजदूर आज भी दूसरे राज्यों में भटक रहे हैं।' उन्होंने पलायन को सबसे बड़ा मुद्दा बताया, कहा कि बिहार के युवा ट्रेनों में खड़े होकर गुजरात-महाराष्ट्र जाते हैं, क्योंकि यहां नौकरी नहीं। 'हम रोकेंगे यह पलायन। नई फैक्टरियां लगेंगी, आईटी पार्क बनेंगे।' तेजस्वी ने जातिगत जनगणना का मुद्दा उठाया, कहा कि महागठबंधन सत्ता में आते ही इसे लागू करेगा, ताकि आरक्षण सही हो। उन्होंने भाजपा पर निशाना साधा कि वे बिहार को सिर्फ वोट बैंक मानते हैं। 'मोदी जी आते हैं, सभा करते हैं, लेकिन विकास का नामोनिशान नहीं।' रैली में राहुल गांधी का भी जिक्र किया, कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष 29 अक्टूबर से प्रचार शुरू करेंगे। तेजस्वी ने समर्थकों से कहा कि छठ पूजा के बाद वोट डालें, और बिहार को नई सरकार दें।

यह बयान बिहार की राजनीति में नया मोड़ ला सकता है। महागठबंधन में आरजेडी 143 सीटों पर लड़ेगा, कांग्रेस 61 पर। तेजस्वी का 'बिहार का लाल' बयान नीतीश कुमार को निशाने पर लेता है, जो बिहार के मूल निवासी हैं, लेकिन गठबंधनों के कारण 'पलटू' कहलाते हैं। विपक्ष का कहना है कि यह बयान बिहार की अस्मिता पर केंद्रित है। एनडीए ने तुरंत प्रतिक्रिया दी। जनता दल यूनाइटेड के प्रवक्ता ने कहा कि तेजस्वी युवा हैं, लेकिन अनुभव की कमी है। 'नीतीश कुमार ही बिहार के लाल हैं, जिन्होंने राज्य को पटरी पर उतारा।' भाजपा नेता चिराग पासवान ने कहा कि तेजस्वी के वादे जुमले हैं। उन्होंने याद दिलाया कि एनडीए ने बिहार को 10 लाख करोड़ की योजनाएं दीं। अमित शाह ने पटना में कहा कि नीतीश के नेतृत्व में बिहार मजबूत होगा। लेकिन तेजस्वी का बयान एनडीए में खलबली मचा रहा है। कुछ विश्लेषकों का कहना है कि यह स्थानीय बनाम बाहरी की बहस तेज करेगा।

तेजस्वी यादव का राजनीतिक सफर संघर्षपूर्ण रहा है। 2015 में वे उपमुख्यमंत्री बने, लेकिन 2017 में एनडीए की जीत से बाहर हो गए। 2020 में फिर महागठबंधन से उपमुख्यमंत्री बने, लेकिन 2022 में हार गए। अब 2025 में वे सीएम पद के मजबूत दावेदार हैं। रैली में उन्होंने लालू प्रसाद को याद किया, कहा कि पिता ने हमेशा बिहार के लिए लड़ाई लड़ी। 'मैं वही विरासत निभाऊंगा।' तेजस्वी ने युवाओं से कहा कि सोशल मीडिया पर सक्रिय रहें, फेक न्यूज का मुकाबला करें। रैली में सांस्कृतिक कार्यक्रम भी हुए, जहां भोजपुरी गाने बजे। समर्थकों ने 'बिहार का लाल' के नारे लगाए। यह बयान महागठबंधन के लिए प्रचार का नया हथियार बनेगा। प्राशांत किशोर की जन सुराज पार्टी ने इसे तंज कसा, कहा कि तेजस्वी खुद राजपरिवार से हैं, बिहार के आम लाल नहीं।

बिहार चुनाव के मुद्दे जटिल हैं। बेरोजगारी 12 प्रतिशत से ऊपर है, और प्रति वर्ष 20 लाख युवा नौकरी तलाशते हैं। महागठबंधन का घोषणापत्र 'तेजस्वी प्रण पत्र' में रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य पर जोर है। एनडीए का फोकस विकास पर है। चुनाव आयोग ने 243 सीटों पर मतदान की तारीखें तय कीं। महिलाओं के वोट निर्णायक होंगे। सोशल मीडिया पर तेजस्वी का बयान वायरल है। ट्विटर पर लाखों व्यूज हो गए। एक यूजर ने लिखा, 'तेजस्वी सही कह रहे हैं, बिहार को बिहारी चाहिए।' मीडिया ने इसे प्रमुखता से दिखाया। आज तक, एबीपी न्यूज, दैनिक जागरण और हिंदुस्तान ने कवर किया। एक रिपोर्ट में कहा गया कि यह बयान जातिगत समीकरण बदल सकता है। तेजस्वी ने रैली के बाद कार्यकर्ताओं से कहा कि घर-घर जाकर वादे पहुंचाएं।

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