रिश्तों को कलंकित करने वाले दरिंदे को मां ने ही पहुंचाया सलाखों के पीछे, दो बहुओं के साथ दुष्कर्म करने वाले कलयुगी बेटे को मिली सजा।
राजस्थान के जोधपुर जिले से एक ऐसी हृदयविदारक लेकिन प्रेरणादायक घटना सामने आई है, जिसने समाज में न्याय और नैतिकता के
- ममता पर भारी पड़ा न्याय का धर्म: जोधपुर में सगी मां ने रेप के आरोपी बेटे के खिलाफ कोर्ट में दी गवाही
- न्याय की अनूठी मिसाल: जब एक मां ने मोह का त्याग कर अपनी बहुओं के सम्मान के लिए अपने ही बड़े बेटे को चुनवाई जेल की राह
राजस्थान के जोधपुर जिले से एक ऐसी हृदयविदारक लेकिन प्रेरणादायक घटना सामने आई है, जिसने समाज में न्याय और नैतिकता के मापदंडों को एक नई ऊंचाई प्रदान की है। यहां एक मां ने अपने ही बड़े बेटे के विरुद्ध न्यायालय के कटघरे में खड़े होकर गवाही दी, जिसने अपने ही दो छोटे भाइयों की पत्नियों यानी अपनी सगी बहुओं की अस्मत के साथ खिलवाड़ किया था। आमतौर पर भारतीय समाज में परिवार की प्रतिष्ठा और मोह-माया के चलते ऐसे गंभीर अपराधों को घर की चहारदीवारी के भीतर ही दबा दिया जाता है, लेकिन इस बहादुर मां ने 'ममता' से ऊपर 'न्याय' को स्थान दिया। इस मामले में आरोपी ने एक के बाद एक अपने ही घर की दो बहुओं को अपनी हवस का शिकार बनाया था, जिससे पूरा परिवार बिखरने की कगार पर पहुंच गया था।
घटनाक्रम के अनुसार, आरोपी ने इस घिनौनी वारदात को अलग-अलग समय पर अंजाम दिया था। वह घर का बड़ा बेटा होने के नाते परिवार में एक रसूख रखता था और इसी का फायदा उठाकर उसने डरा-धमकाकर अपनी दोनों छोटी बहुओं का शारीरिक शोषण किया। जब पहली पीड़िता ने इस बारे में परिवार को बताने की कोशिश की, तो आरोपी ने उसे जान से मारने की धमकी देकर चुप करा दिया। हालांकि, जब दूसरी बहू के साथ भी इसी तरह की दरिंदगी दोहराई गई, तो घर की मुखिया यानी आरोपी की मां को इसकी भनक लग गई। अपनी बहुओं की आंखों में खौफ और आंसू देखकर इस मां का कलेजा कांप उठा और उन्होंने तय किया कि वे इस पाप में अपने बेटे का साथ देने के बजाय उसे कानून के हवाले करेंगी।
जोधपुर की विशेष अदालत में इस मामले की सुनवाई के दौरान मां की गवाही सबसे निर्णायक साबित हुई। जब अभियोजन पक्ष ने मां को गवाह के रूप में पेश किया, तो पूरे कोर्ट रूम में सन्नाटा पसर गया। एक मां के लिए अपने ही उस बेटे के खिलाफ बोलना जिसे उसने जन्म दिया और पाल-पोसकर बड़ा किया, दुनिया का सबसे कठिन कार्य होता है। लेकिन इस मां ने बिना हिचकिचाए जज के सामने अपनी बहुओं के साथ हुई ज्यादती का पूरा ब्योरा पेश किया। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि जो व्यक्ति अपने ही भाइयों की पत्नियों का सम्मान नहीं कर सकता, वह उनका बेटा कहलाने के लायक नहीं है। उनकी इस अटल गवाही ने अभियोजन के पक्ष को इतना मजबूत कर दिया कि आरोपी के पास बचने का कोई रास्ता नहीं बचा।
मां का अडिग फैसला
इस मामले में मां को अपने ही रिश्तेदारों और समाज के कुछ वर्गों से भारी विरोध का सामना करना पड़ा था। कई लोगों ने उन्हें 'घर की बात घर में रखने' और 'वंश बचाने' की सलाह दी थी, लेकिन उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि जो वंश बहुओं के सम्मान की रक्षा नहीं कर सकता, उसका अंत ही बेहतर है। उन्होंने न केवल पुलिस को मामले की जानकारी दी, बल्कि जांच के हर चरण में अपनी बहुओं का साथ दिया ताकि वे अपना बयान दर्ज कराने से न डरें। उनकी इस हिम्मत ने दोनों पीड़िताओं को भी समाज में सिर उठाकर जीने का संबल प्रदान किया।
कानूनी प्रक्रिया के दौरान यह भी पता चला कि आरोपी ने वारदात को अंजाम देने के लिए उस समय का चुनाव किया था जब उसके छोटे भाई काम के सिलसिले में घर से बाहर रहते थे। वह घर में अपनी सत्ता का दुरुपयोग करता था और बहुओं को सामाजिक लोक-लाज का डर दिखाकर उनका शोषण करता रहा। पुलिस ने अपनी जांच में पाया कि आरोपी का आचरण पहले भी संदिग्ध रहा था, लेकिन परिवार के अन्य सदस्यों ने उसे सुधारने की उम्मीद में मामले को नजरअंदाज किया था। हालांकि, मां की सक्रियता और गवाही के कारण पुलिस ने वैज्ञानिक साक्ष्य और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों को इतनी मजबूती से संकलित किया कि कोर्ट ने इसे एक गंभीर और विरल मामला माना।
अदालत ने अपने फैसले में मां की भूमिका की विशेष सराहना करते हुए इसे 'असाधारण साहस' करार दिया। जज ने टिप्पणी की कि यदि हर परिवार में इस तरह की सजगता हो, तो घरेलू हिंसा और यौन शोषण जैसे अपराधों पर लगाम लगाई जा सकती है। आरोपी को उम्रकैद और भारी जुर्माने की सजा सुनाई गई है। यह सजा केवल एक अपराधी को दंड देने के लिए नहीं है, बल्कि उन सभी लोगों के लिए एक कड़ा संदेश है जो रिश्तों की मर्यादा को तार-तार करते हैं। मां ने फैसला आने के बाद केवल इतना कहा कि आज उनकी आत्मा को शांति मिली है क्योंकि वे अपनी उन बेटियों (बहुओं) को न्याय दिला पाईं, जिन्हें उन्होंने बड़े अरमानों के साथ अपने घर की लक्ष्मी बनाकर लाया था।
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