उत्तर प्रदेश में ध्वनि प्रदूषण पर परिवहन विभाग का महाप्रहार: अब मॉडिफाइड साइलेंसर और प्रेशर हॉर्न बजाने पर सीधे रद्द होगी वाहन की आरसी।
उत्तर प्रदेश की सड़कों पर कानफोड़ू शोर मचाने वाले और अवैध रूप से वाहनों में बदलाव करने वाले चालकों के विरुद्ध प्रदेश सरकार ने अब तक
- इलाहाबाद हाईकोर्ट की फटकार के बाद प्रदेशव्यापी अभियान शुरू: गाजियाबाद से हुई सख्त कार्रवाई की शुरुआत, लाइसेंस भी किया जाएगा अमान्य।
- सड़कों पर 'हवाबाजी' करने वालों की अब खैर नहीं: बुलेट के पटाखों और अवैध ह्यूटरों पर परिवहन विभाग ने कसी कमर, 2 अप्रैल के आदेश के बाद बदली रणनीति।
उत्तर प्रदेश की सड़कों पर कानफोड़ू शोर मचाने वाले और अवैध रूप से वाहनों में बदलाव करने वाले चालकों के विरुद्ध प्रदेश सरकार ने अब तक की सबसे कठोर दंडात्मक नीति अपना ली है। परिवहन विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि अब केवल चालान काटकर खानापूर्ति करने का समय बीत चुका है। नए निर्देशों के अनुसार, यदि किसी वाहन में मॉडिफाइड साइलेंसर, प्रेशर हॉर्न या अनाधिकृत ह्यूटर पाया जाता है, तो उस वाहन का पंजीकरण (RC) तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया जाएगा। यह निर्णय सड़कों पर बढ़ते ध्वनि प्रदूषण और इसके कारण आम जनता, विशेषकर बुजुर्गों और हृदय रोगियों को होने वाली स्वास्थ्य समस्याओं को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। गाजियाबाद जिला इस विशेष अभियान का केंद्र बिंदु बना है, जहां से शुरुआत कर अब इसे पूरे प्रदेश के सभी 75 जिलों में युद्ध स्तर पर लागू किया जा रहा है। इस कड़ी कार्रवाई के पीछे न्यायिक सक्रियता की एक बड़ी भूमिका रही है। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ में विचाराधीन एक जनहित याचिका (PIL संख्या-15385/2021) पर सुनवाई के दौरान माननीय न्यायालय ने प्रदेश की वर्तमान स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की थी। 2 अप्रैल 2026 को हुई महत्वपूर्ण सुनवाई में अदालत ने मौखिक रूप से टिप्पणी की थी कि पूर्व में की गई कार्रवाई केवल सांकेतिक प्रतीत होती है और धरातल पर शोर कम करने में विफल रही है। न्यायालय की इसी नाराजगी को संज्ञान में लेते हुए परिवहन आयुक्त कार्यालय ने आनन-फानन में सभी संभागीय परिवहन अधिकारियों (RTO) और पुलिस विभाग को संयुक्त रूप से अभियान चलाने का आदेश दिया है। अब इस अपराध को केवल यातायात नियमों का उल्लंघन नहीं, बल्कि जनस्वास्थ्य के खिलाफ एक गंभीर कृत्य माना जा रहा है।
परिवहन विभाग की इस नई कार्ययोजना में केवल वाहन ही नहीं, बल्कि चालक पर भी व्यक्तिगत रूप से शिकंजा कसा जाएगा। यदि कोई वाहन चालक बार-बार मॉडिफाइड साइलेंसर का उपयोग करते हुए पकड़ा जाता है, तो उसका ड्राइविंग लाइसेंस (DL) हमेशा के लिए अमान्य घोषित किया जा सकता है। विशेष रूप से दोपहिया वाहनों, जैसे बुलेट और स्पोर्ट्स बाइक्स में 'पटाखे' फोड़ने वाले साइलेंसर लगाने वालों के लिए पुलिस ने 'जीरो टॉलरेंस' की नीति अपनाई है। चेकिंग के दौरान यदि किसी वाहन में अवैध उपकरण मिलते हैं, तो उसे मौके पर ही जब्त कर थाने ले जाया जा रहा है और वहां से आरसी निलंबन की रिपोर्ट सीधे परिवहन मुख्यालय भेजी जा रही है। इस प्रक्रिया को पूरी तरह से डिजिटल कर दिया गया है ताकि किसी भी स्तर पर पैरवी या ढिलाई की गुंजाइश न रहे। मोटर वाहन अधिनियम की धारा 190(2) और पर्यावरण संरक्षण नियमों के तहत, वाहनों में शोर का स्तर निर्धारित मानकों से अधिक होना दंडनीय है। इसके अतिरिक्त, धारा 53 के अंतर्गत परिवहन विभाग को यह अधिकार है कि वह सुरक्षा और प्रदूषण मानकों का उल्लंघन करने पर किसी भी वाहन की आरसी को निलंबित या रद्द कर सके। इस अभियान के तहत अवैध साइलेंसर बेचने और लगाने वाले मैकेनिकों एवं दुकानदारों पर भी कानूनी कार्रवाई की तैयारी की गई है। अभियान के पहले चरण में गाजियाबाद, नोएडा, लखनऊ और कानपुर जैसे महानगरों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इन शहरों में शोर का स्तर साइलेंसर के मॉडिफिकेशन के कारण सामान्य से तीन गुना अधिक पाया गया है। गाजियाबाद में तो आरटीओ और ट्रैफिक पुलिस ने संयुक्त टीमें बनाकर रात के समय गश्त बढ़ा दी है, क्योंकि अक्सर रात के सन्नाटे में तेज हॉर्न और मॉडिफाइड साइलेंसर का शोर अधिक घातक होता है। प्रशासन ने आम जनता से भी अपील की है कि वे ऐसे वाहनों की सूचना हेल्पलाइन नंबर या सोशल मीडिया के माध्यम से साझा करें। सूचना मिलते ही तत्काल कार्रवाई की जाएगी और दोषी वाहन स्वामी को अपना पक्ष रखने का मौका दिए बिना कड़ी सजा भुगतनी होगी।
सड़क सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि प्रेशर हॉर्न और अचानक तेज आवाज पैदा करने वाले साइलेंसर सड़क दुर्घटनाओं का एक बड़ा कारण बनते हैं। सड़क पर अचानक हुई तेज आवाज से अन्य वाहन चालक, विशेषकर साइकिल या पैदल चलने वाले लोग सकपका जाते हैं, जिससे संतुलन बिगड़ने का खतरा रहता है। जनस्वास्थ्य के दृष्टिकोण से भी, अत्यधिक शोर मानसिक तनाव, बहरापन और नींद की कमी जैसी समस्याओं को जन्म दे रहा है। अस्पतालों और स्कूलों के पास स्थित 'साइलेंस जोन' में इन नियमों का उल्लंघन करने वालों पर जुर्माने की राशि भी बढ़ा दी गई है। अब ह्यूटर और प्रेशर हॉर्न को मौके पर ही निकलवाकर नष्ट किया जा रहा है ताकि उनका दोबारा उपयोग संभव न हो सके। इस विशेष अभियान का एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू उन दुकानों और वर्कशॉप्स पर शिकंजा कसना है, जहां ये अवैध बदलाव किए जाते हैं। पुलिस ने ऐसे मार्केट की सूची तैयार की है जहां मॉडिफाइड साइलेंसर और अवैध लाइटें बेची जाती हैं। ऐसी दुकानों को नोटिस जारी किए जा रहे हैं और यदि वे इन सामानों की बिक्री जारी रखते हैं, तो उनके ट्रेड लाइसेंस निरस्त करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। परिवहन विभाग का लक्ष्य है कि मांग और आपूर्ति दोनों ही सिरों पर प्रहार कर इस समस्या को जड़ से समाप्त किया जाए। अब तक की रिपोर्ट के अनुसार, प्रदेश भर में सैकड़ों वाहनों के चालान के साथ-साथ दर्जनों आरसी निलंबन की कार्रवाई प्रक्रियाधीन है, जिसने नियम तोड़ने वालों में हड़कंप मचा दिया है।
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