Deoband : सांप्रदायिक दल को समर्थन देने पर बदरुद्दीन अजमल को जमीयत का नोटिस, 24 घंटे में मांगा जवाब
नोटिस में कहा गया है कि जमीयत ने आजादी के बाद 1951 में ही चुनाव और मतदान को लेकर अपनी नीति तय कर दी थी, जिसकी अध्यक्षता सैयद हुसैन अहमद मदनी ने की थी। इस नीति के अनुसार जमीयत के किसी भी
जमीयत उलमा-ए-हिंद ने एआईयूडीएफ के अध्यक्ष बदरुद्दीन अजमल को एक कारण बताओ नोटिस जारी किया है। यह कदम हाल के चुनाव प्रचार के दौरान उनके द्वारा एक सांप्रदायिक राजनीतिक दल के साथ कथित गठबंधन और खुले समर्थन को लेकर उठाया गया है। जमीयत के महासचिव मोहम्मद हकीमुद्दीन कासमी ने नोटिस भेजकर 24 घंटे के भीतर लिखित सफाई मांगी है। नोटिस में कहा गया है कि जमीयत ने आजादी के बाद 1951 में ही चुनाव और मतदान को लेकर अपनी नीति तय कर दी थी, जिसकी अध्यक्षता सैयद हुसैन अहमद मदनी ने की थी। इस नीति के अनुसार जमीयत के किसी भी सदस्य या पदाधिकारी का किसी सांप्रदायिक दल से संबंध रखना या उसे समर्थन देना पूरी तरह गलत है। जमीयत का सिद्धांत केवल उन राजनीतिक शक्तियों के साथ रहने का है जो देश की एकता, लोकतांत्रिक मूल्यों और संविधान की रक्षा करती हों। हकीमुद्दीन कासमी के अनुसार बदरुद्दीन अजमल का एक सांप्रदायिक दल के साथ खड़ा होना संगठन के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है। यदि उनका जवाब संतोषजनक नहीं मिला तो संगठन के नियमों के तहत उन पर कार्यवाही की जाएगी। गौरतलब है कि बदरुद्दीन अजमल जमीयत उलमा-ए-हिंद असम के अध्यक्ष होने के साथ-साथ दारुल उलूम देवबंद की प्रबंध समिति के सदस्य भी हैं।
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