Saharanpur: गागलहेड़ी कांग्रेस सम्मेलन बना सियासी शक्ति प्रदर्शन, आशु मलिक के गढ़ में इमरान मसूद की हुंकार।
आगामी 18 मई को कस्बा गागलहेड़ी में आयोजित होने जा रहे कांग्रेस कार्यकर्ता सम्मेलन को लेकर जिले की राजनीति में हलचल
सहारनपुर: आगामी 18 मई को कस्बा गागलहेड़ी में आयोजित होने जा रहे कांग्रेस कार्यकर्ता सम्मेलन को लेकर जिले की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। राजनीतिक गलियारों में इस सम्मेलन को कांग्रेस सांसद इमरान मसूद की रणनीतिक तैयारी के रूप में देखा जा रहा है, जिसके जरिए वह एक साथ दो राजनीतिक संदेश देने की कोशिश करेंगे। कांग्रेस द्वारा “सृजन अभियान” के तहत आयोजित इस सम्मेलन का आयोजन गागलहेड़ी स्थित रॉयल पैलेस में किया जाएगा। पार्टी प्रवक्ता गणेश दत्त शर्मा के अनुसार सम्मेलन में कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव एवं उत्तर प्रदेश प्रभारी अविनाश पांडे, प्रदेश अध्यक्ष अजय राय, राज्यसभा सांसद प्रमोद तिवारी, विधानमंडल दल की नेता आराधना मिश्रा समेत प्रदेश के कई वरिष्ठ नेता शामिल होंगे।
माना जा रहा है कि यह सम्मेलन केवल संगठनात्मक गतिविधि तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आगामी 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियों का भी संकेत देगा। खास बात यह है कि सम्मेलन के लिए गागलहेड़ी क्षेत्र का चयन किया गया है, जिसे समाजवादी पार्टी विधायक आशु मलिक का प्रभाव क्षेत्र माना जाता है। ऐसे में इस आयोजन को सीधे तौर पर सपा के गढ़ में कांग्रेस की राजनीतिक सक्रियता के रूप में देखा जा रहा है। जिले की राजनीति में सांसद इमरान मसूद और विधायक आशु मलिक के बीच लंबे समय से राजनीतिक मतभेद चर्चा का विषय रहे हैं। हाल ही में इमरान मसूद द्वारा सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव को लेकर की गई टिप्पणी के बाद दोनों दलों के रिश्तों को लेकर भी कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। सूत्रों की मानें तो सम्मेलन के दौरान अन्य दलों के कुछ नेताओं के कांग्रेस में शामिल होने की संभावना भी जताई जा रही है। चर्चा यह भी है कि समाजवादी पार्टी से जुड़े एक एमएलसी कांग्रेस का दामन थाम सकते हैं, हालांकि इसकी अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। उधर, प्रदेश में सपा-कांग्रेस गठबंधन की संभावनाओं को लेकर भी राजनीतिक चर्चाएं जारी हैं, लेकिन दोनों दलों के शीर्ष नेतृत्व की ओर से अब तक कोई स्पष्ट संकेत नहीं मिला है। वहीं सांसद इमरान मसूद पहले ही जिले की सभी विधानसभा सीटों पर कांग्रेस प्रत्याशी उतारने की बात कह चुके हैं। ऐसे में गागलहेड़ी का यह सम्मेलन केवल संगठनात्मक कार्यक्रम नहीं, बल्कि आने वाले विधानसभा चुनाव से पहले शक्ति प्रदर्शन और राजनीतिक समीकरणों की दिशा तय करने वाला आयोजन माना जा रहा है। अब देखना यह होगा कि संभावित गठबंधन की स्थिति में किस दल को कौन-सी सीट मिलती है और जिले की राजनीति किस करवट बैठती है।
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