Lucknow : उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने प्रधानमंत्री के आह्वान को बताया राष्ट्रहित में, विदेशी मुद्रा बचत पर दिया जोर

उन्होंने यह भी बताया कि उन्होंने व्यक्तिगत रूप से अपने सरकारी काफिले को सीमित करते हुए अब केवल एक वाहन का उपयोग करने का संकल्प लिया है तथा अन्य वाहनों को हटा दिया गया है। उन्होंने कहा कि यह निर्णय प्रधान

May 15, 2026 - 00:16
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Lucknow : उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने प्रधानमंत्री के आह्वान को बताया राष्ट्रहित में, विदेशी मुद्रा बचत पर दिया जोर
Lucknow : उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने प्रधानमंत्री के आह्वान को बताया राष्ट्रहित में, विदेशी मुद्रा बचत पर दिया जोर

  • मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने काफिला घटाकर एक वाहन तक सीमित किया, बताया राष्ट्रहित का संकल्प
  • अनावश्यक विदेशी मुद्रा व्यय से बचना आर्थिक मजबूती के लिए जरूरी — मंत्री योगेंद्र उपाध्याय
  • आत्मनिर्भरता की दिशा में आर्थिक अनुशासन समय की मांग — मंत्री योगेंद्र उपाध्याय

लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार में उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान का उद्देश्य राष्ट्रहित और देश की आर्थिक मजबूती को बढ़ाना है। उन्होंने कहा कि ऐसे सभी कार्यों से बचना चाहिए जिनमें अनावश्यक रूप से विदेशी मुद्रा का अधिक व्यय होता हो।

मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने उदाहरण देते हुए कहा कि अनावश्यक ईंधन खर्च, स्वर्ण का अत्यधिक क्रय तथा खाद्य तेलों का अधिक आयात, जिसमें लगभग 55 प्रतिशत तेल विदेशों से आता है, जैसे क्षेत्रों में संयम अपनाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि इन विषयों पर आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ना समय की मांग है और यह देश की अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाएगा।

उन्होंने यह भी बताया कि उन्होंने व्यक्तिगत रूप से अपने सरकारी काफिले को सीमित करते हुए अब केवल एक वाहन का उपयोग करने का संकल्प लिया है तथा अन्य वाहनों को हटा दिया गया है। उन्होंने कहा कि यह निर्णय प्रधानमंत्री के आह्वान के अनुरूप राष्ट्रहित में लिया गया है और वे आगे भी इसी नीति पर चलते रहेंगे।

मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने आम जनता से भी अपील की कि वे ऐसे कार्यों से बचें जिनसे विदेशी मुद्रा का अनावश्यक व्यय होता हो, क्योंकि विदेशी मुद्रा किसी भी देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करती है। उन्होंने वैश्विक परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए कहा कि रूस-यूक्रेन संघर्ष और ईरान-अमेरिका तनाव जैसे अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों का अप्रत्यक्ष प्रभाव सभी देशों की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है, इसलिए सतर्कता आवश्यक है। “प्रिवेंशन इज़ बेटर दैन क्योर” की भावना के साथ हमें पहले से ही सतर्क रहते हुए आर्थिक अनुशासन अपनाना चाहिए।

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