Sambhal: सम्भल से जफर अली का विधानसभा चुनाव लड़ने का ऐलान, बर्क बोले—'ये उनका संवैधानिक हक'
सम्भल की राजनीति एक बार फिर नए मोड़ पर है। सम्भल हिंसा के आरोपी रहे और जामा मस्जिद के सदर एडवोकेट जफर अली के विधानसभा चुनाव लड़ने के ऐलान ने जिले
उवैस दानिश, सम्भल
सम्भल की राजनीति एक बार फिर नए मोड़ पर है। सम्भल हिंसा के आरोपी रहे और जामा मस्जिद के सदर एडवोकेट जफर अली के विधानसभा चुनाव लड़ने के ऐलान ने जिले की सियासत में हलचल मचा दी है। हाल ही में जेल से रिहा होने के बाद जफर अली ने ऐलान किया कि वे सम्भल विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ेंगे। उन्होंने कहा कि वे कई राजनीतिक दलों से संपर्क में हैं, और यदि किसी दल से टिकट नहीं मिला तो वे निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में मैदान में उतरेंगे।
उनके इस ऐलान ने सम्भल की सियासत में नई सरगर्मी पैदा कर दी है। राजनीतिक गलियारों में इस कदम को बर्क परिवार और सपा विधायक इकबाल महमूद के परिवार के लिए सीधी चुनौती के रूप में देखा जा रहा है। अब तक सम्भल की राजनीति इन दो परिवारों के इर्द-गिर्द घूमती रही है, ऐसे में मस्जिद के सदर का यह निर्णय समीकरणों को पूरी तरह बदल सकता है।
इस बीच सम्भल के सपा सांसद जियाउर्रहमान बर्क ने भी जफर अली के चुनाव लड़ने के अधिकार का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि "चुनाव लड़ना हर नागरिक का संवैधानिक अधिकार है।" जब उनसे पूछा गया कि क्या जफर अली को समाजवादी पार्टी से टिकट मिल सकता है, तो उन्होंने इस संभावना से इंकार नहीं किया, हालांकि उन्होंने यह जरूर स्पष्ट किया कि वे स्वयं समाजवादी पार्टी के साथ ही हैं।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि जफर अली का मैदान में उतरना आगामी विधानसभा चुनाव में गैर-भाजपाई वोटों के बंटवारे की स्थिति पैदा कर सकता है। फिलहाल यह कयास भी लगाए जा रहे हैं कि एआईएमआईएम, बसपा या सपा में से कोई दल उन्हें टिकट देने पर विचार कर सकता है।
सदर जफर अली ने अपने बयान में कहा था कि वे जनता की आवाज बनकर चुनाव लड़ेंगे और सम्भल के विकास को प्राथमिकता देंगे। वहीं कई स्थानीय नेताओं का कहना है कि अगर जफर अली को मुस्लिम मतदाताओं का एक बड़ा हिस्सा समर्थन देता है तो वे नगर पालिका अध्यक्ष पद पर एआईएमआईएम की तरह विधानसभा चुनाव में भी चौंकाने वाला प्रदर्शन कर सकते हैं।
अब सबकी निगाहें इस बात पर टिक गई हैं कि कौन सी पार्टी जफर अली पर दांव लगाती है और क्या वे सच में सम्भल की सियासत की करवट बदलने में कामयाब होंगे। फिलहाल इतना तय है कि उनके इस ऐलान से सम्भल की राजनीति में नई हलचल और नई लाइनें खिंचती नजर आ रही हैं।
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