Lucknow: ग्रामीण आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम - प्रदेश के 72 जिलों में स्थापित हो रहे बायोगैस संयंत्र, ऊर्जा से लेकर आय तक आत्मनिर्भरता का नया मॉडल

उत्तर प्रदेश के ग्रामीण अंचलों में गोवर्धन योजना अब नई रोशनी लेकर आई है। पंचायती राज विभाग द्वारा संचालित इस महत्वाकांक्षी योजना के अंतर्गत प्रदेश के

By INA News Desk
Oct 13, 2025 - 17:47
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Lucknow: ग्रामीण आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम - प्रदेश के 72 जिलों में स्थापित हो रहे बायोगैस संयंत्र, ऊर्जा से लेकर आय तक आत्मनिर्भरता का नया मॉडल
प्रदेश के 72 जिलों में स्थापित हो रहे बायोगैस संयंत्र, ऊर्जा से लेकर आय तक आत्मनिर्भरता का नया मॉडल

लखनऊ: उत्तर प्रदेश के ग्रामीण अंचलों में गोवर्धन योजना अब नई रोशनी लेकर आई है। पंचायती राज विभाग द्वारा संचालित इस महत्वाकांक्षी योजना के अंतर्गत प्रदेश के सभी 72 जिलों में बायोगैस टैंक स्थापित किए जा रहे हैं। प्रत्येक जिले को 50 लाख रुपये तक की धनराशि स्वीकृत की गई है। अब तक 117 में से 115 बायोगैस संयंत्र पूर्ण रूप से क्रियाशील हो चुके हैं, जहां से न केवल स्वच्छ ऊर्जा का उत्पादन हो रहा है, बल्कि ग्रामीणों की आमदनी के नए अवसर भी सृजित हो रहे हैं।

  • टंडवा महंत बना आदर्श ग्राम — बायोगैस से चल रही आटा चक्की

श्रावस्ती जनपद की टंडवा महंत ग्राम पंचायत इस योजना की सफलता का सशक्त उदाहरण है। यहां 24 लाख रुपये की लागत से स्थापित अत्याधुनिक बायोगैस प्लांट ने गांव की ऊर्जा व्यवस्था को आत्मनिर्भर बना दिया है। इस प्लांट से संचालित आटा चक्की पूरी तरह बायोगैस से चल रही है, जो प्रतिदिन 2 से 3 क्विंटल गेहूं पीसने में सक्षम है। पहले जहां चक्की के संचालन में बिजली और डीजल पर निर्भरता थी, वहीं अब ग्रामीणों को सस्ती दर पर केवल 1 रुपये प्रति किलो में पिसाई सुविधा उपलब्ध है। इससे ग्रामीणों को सीधा आर्थिक लाभ हो रहा है।

  • गोबर और जैविक कचरे से ऊर्जा और खाद — पर्यावरण संरक्षण में योगदान

बायोगैस संयंत्रों में गोबर और जैविक कचरे का उपयोग किया जा रहा है, जिससे न केवल ऊर्जा उत्पादन हो रहा है, बल्कि जैविक खाद का निर्माण भी संभव हुआ है। इससे रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम हुई और खेती अधिक टिकाऊ बनी है।

  • ग्रामीणों को निश्चित आय और प्रशिक्षण का अवसर

इस योजना के संचालन में स्थानीय युवाओं को बायोगैस यूनिट के रखरखाव एवं संचालन का प्रशिक्षण दिया गया है, जबकि महिलाएं खाद निर्माण और स्वच्छता अभियानों में सक्रिय रूप से जुड़ी हैं। इस प्रकार यह योजना रोजगार, सामाजिक सहभागिता और आत्मनिर्भरता — तीनों लक्ष्यों को एक साथ पूरा कर रही है।

  • सौर ऊर्जा से हो रही अतिरिक्त आय

टंडवा महंत ग्राम पंचायत में स्थापित सोलर प्लांट से अब तक ₹51,151 की अतिरिक्त आय अर्जित की जा चुकी है, जो ग्राम पंचायत के विकास कार्यों में उपयोग की जा रही है। इसी प्रकार बायोगैस से चलने वाली चक्की से ₹2,100 की आय दर्ज की गई है, जिससे पंचायत को स्थायी आर्थिक आधार प्राप्त हुआ है।

  • ऊर्जा से आय तक आत्मनिर्भरता का मॉडल

पंचायती राज मंत्री श्री ओम प्रकाश राजभर जी ने कहा कि: “टंडवा महंत ग्राम पंचायत का बायोगैस प्लांट आत्मनिर्भरता और नवाचार का जीवंत उदाहरण है। यह न केवल ऊर्जा बचत कर रहा है, बल्कि ग्रामीणों को निश्चित आय और समय की बचत भी प्रदान कर रहा है। यह मॉडल ‘ऊर्जा से आय’ की दिशा में राज्य के लिए प्रेरक है।”

पंचायती राज विभाग के निदेशक अमित कुमार सिंह ने कहा कि: अत्याधुनिक बायोगैस इकाइयाँ केवल ऊर्जा उत्पादन का माध्यम नहीं हैं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने का बहुआयामी उपकरण हैं। गोवर्धन योजना उत्तर प्रदेश को ग्रामीण आत्मनिर्भरता के नए युग में ले जा रही है।

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