'कॉकरोच जनता पार्टी' के बाद अब 'छिपकली राष्ट्र पार्टी' का सोशल मीडिया अकाउंट हुआ वायरल, 'राष्ट्र पहले' के कड़े संकल्प के साथ महज 3 घंटे में बढ़े हजारों फॉलोअर्स।

इस नए डिजिटल अकाउंट की शुरुआत को 'कॉकरोच जनता पार्टी' के समानांतर एक काउंटर-मूवमेंट या जवाब के तौर पर देखा जा रहा

May 23, 2026 - 14:07
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'कॉकरोच जनता पार्टी' के बाद अब 'छिपकली राष्ट्र पार्टी' का सोशल मीडिया अकाउंट हुआ वायरल, 'राष्ट्र पहले' के कड़े संकल्प के साथ महज 3 घंटे में बढ़े हजारों फॉलोअर्स।
'कॉकरोच जनता पार्टी' के बाद अब 'छिपकली राष्ट्र पार्टी' का सोशल मीडिया अकाउंट हुआ वायरल, 'राष्ट्र पहले' के कड़े संकल्प के साथ महज 3 घंटे में बढ़े हजारों फॉलोअर्स।
  • 'राष्ट्र पहले' के कड़े संकल्प के साथ उतरी नई वर्चुअल पार्टी, देशद्रोहियों और अफवाह फैलाने वालों पर करेगी तीखा प्रहार 
  • महज 3 घंटे में बढ़े हजारों फॉलोअर्स: सोशल मीडिया पर छिपकली राष्ट्र पार्टी की एंट्री से बदला डिजिटल विमर्श का रुख

इस नए डिजिटल अकाउंट की शुरुआत को 'कॉकरोच जनता पार्टी' के समानांतर एक काउंटर-मूवमेंट या जवाब के तौर पर देखा जा रहा है। जहां पूर्व में बनी पार्टी युवाओं की बेरोजगारी, व्यवस्था के प्रति असंतोष और व्यंग्य को अपना आधार बनाकर डिजिटल आंदोलन चला रही थी, वहीं इस नई 'छिपकली राष्ट्र पार्टी' ने एक बिल्कुल अलग और आक्रामक वैचारिक रुख अपनाया है। इस वर्चुअल राजनीतिक दल का मुख्य ध्येय वाक्य और स्लोगन 'राष्ट्र पहले' (नेशन फर्स्ट) तय किया गया है, जो सीधे तौर पर देशभक्ति और राष्ट्रीय अखंडता की भावनाओं को लक्षित करता है। इस अकाउंट के लाइव होने के महज 3 घंटे के भीतर ही हजारों की संख्या में इंटरनेट यूजर्स इसके साथ जुड़ गए, जिससे इसकी वायरल होने की रफ्तार का अंदाजा लगाया जा सकता है।

इस नई वर्चुअल पार्टी के प्रोफाइल और शुरुआती पोस्ट्स के विश्लेषण से यह स्पष्ट होता है कि इसका प्राथमिक उद्देश्य देश के भीतर डिजिटल माध्यमों से फैलाई जाने वाली फेक न्यूज (भ्रामक खबरें), अफवाहों और देश विरोधी एजेंडों को रोकना है। अकाउंट के बायो और पोस्ट्स में स्पष्ट रूप से चेतावनी दी गई है कि यह पार्टी देशद्रोहियों, शांति भंग करने वाले तत्वों और समाज में जहर घोलने वाले ऑनलाइन सिंडिकेट्स पर बेहद तीखा और सीधा वार करेगी। छिपकली के स्वभाव को प्रतीकात्मक रूप से दर्शाते हुए यह संदेश देने का प्रयास किया गया है कि जैसे छिपकली दीवारों पर छिपे कीड़े-मकौड़ों को चुन-चुनकर साफ करती है, ठीक वैसे ही यह डिजिटल विंग समाज और इंटरनेट पर मौजूद नकारात्मक तत्वों का सफाया करेगी।

वर्चुअल ट्रेंड की टाइमिंग

देश में चल रहे विभिन्न सामाजिक-राजनीतिक विमर्शों और हाल ही में न्यायपालिका की कुछ टिप्पणियों के बाद पैदा हुए युवाओं के गुस्से के बीच, इस तरह की काल्पनिक और व्यंग्यात्मक डिजिटल पार्टियों का उदय इंटरनेट संस्कृति (मीम कल्चर) में एक नए अध्याय की शुरुआत को दर्शाता है।

सोशल मीडिया पर इस नए हैंडल के सक्रिय होते ही इसके फॉलोअर्स की संख्या में अभूतपूर्व उछाल देखा गया है। इसकी लोकप्रियता की सबसे बड़ी वजह इसकी कड़क और राष्ट्रवादी भाषा शैली है, जो उन इंटरनेट यूजर्स को बहुत तेजी से आकर्षित कर रही है जो कॉकरोच जनता पार्टी के व्यंग्यात्मक और व्यवस्था-विरोधी रुख से असहमत थे। इस नए मंच के माध्यम से यह संदेश प्रसारित किया जा रहा है कि राष्ट्र की सुरक्षा, अस्मिता और अखंडता से किसी भी स्तर पर समझौता नहीं किया जा सकता, भले ही वह डिजिटल मनोरंजन या मीम्स का ही हिस्सा क्यों न हो। इसके चलते अब इंटरनेट पर दो अलग-अलग काल्पनिक और व्यंग्यात्मक विचारधाराएं आमने-सामने आ खड़ी हुई हैं, जिससे सोशल मीडिया पर एक नया वैचारिक युद्ध छिड़ गया है।

इस अकाउंट के संचालकों की वास्तविक पहचान अभी तक पूरी तरह से गुप्त रखी गई है, और यह केवल एक वर्चुअल प्रोफाइल के माध्यम से ही संचालित हो रहा है। इसके बावजूद, जिस तरह से इसके पोस्ट्स को ग्राफिकली डिजाइन किया जा रहा है और उसमें राष्ट्रीय प्रतीकों व कड़े संदेशों का मिश्रण किया जा रहा है, वह किसी सुसंगठित डिजिटल टीम की मौजूदगी का संकेत देता है। इस पार्टी ने अपने शुरुआती घोषणापत्र या डिजिटल संकल्प में यह भी साझा किया है कि वे इंटरनेट पर भारत विरोधी दुष्प्रचार करने वाले विदेशी और घरेलू हैंडल्स की निगरानी करेंगे और उन्हें तथ्यों के साथ बेनकाब करने का काम करेंगे। इस रणनीति ने उन युवाओं को एक नया मंच दे दिया है जो ऑनलाइन राष्ट्रवाद के समर्थक हैं।

इस तरह के डिजिटल आंदोलनों और काल्पनिक राजनीतिक दलों की बाढ़ ने समाजशास्त्रियों और तकनीकी विश्लेषकों को भी सोचने पर मजबूर कर दिया है। यह पूरी प्रक्रिया यह दर्शाती है कि देश का युवा वर्ग अब अपनी बात रखने, अपना विरोध दर्ज कराने या अपनी वैचारिक निष्ठा को प्रदर्शित करने के लिए पारंपरिक तरीकों के बजाय मीम आधारित डिजिटल आंदोलनों का बहुत तेजी से उपयोग कर रहा है। ये वर्चुअल पार्टियां बिना किसी आधिकारिक पंजीकरण या चुनाव आयोग की अनुमति के ही लाखों-करोड़ों लोगों को अपने साथ जोड़ रही हैं, जो आने वाले समय में मुख्यधारा की राजनीति और जनमत निर्माण की प्रक्रिया को बहुत गहराई से प्रभावित कर सकता है।

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