Politics News: बेंगलुरु भगदड़ त्रासदी- कर्नाटक CM और डिप्टी CM के खिलाफ शिकायत, हाई कोर्ट ने लिया स्वत: संज्ञान, सुनवाई आज।
बेंगलुरु के एम. चिन्नास्वामी स्टेडियम के बाहर रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) की IPL 2025 जीत के उत्सव के दौरान हुई भगदड़ ने ...
4 जून 2025 को बेंगलुरु के एम. चिन्नास्वामी स्टेडियम के बाहर रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) की IPL 2025 जीत के उत्सव के दौरान हुई भगदड़ ने पूरे देश को झकझोर दिया। इस हादसे में 11 लोगों की जान चली गई और 75 से अधिक लोग घायल हो गए। इस त्रासदी ने सुरक्षा व्यवस्था और भीड़ प्रबंधन में गंभीर खामियों को उजागर किया। इसके परिणामस्वरूप, सामाजिक कार्यकर्ता स्नेहमयी कृष्णा ने कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार सहित कई अधिकारियों के खिलाफ कब्बन पार्क पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज की। इस शिकायत में लापरवाही का आरोप लगाया गया है। कर्नाटक हाई कोर्ट ने इस मामले में स्वत: संज्ञान लेते हुए सरकार को नोटिस जारी किया और 6 जून 2025 को दोपहर 2:30 बजे सुनवाई निर्धारित की।
4 जून 2025 को, RCB की 18 साल बाद पहली IPL जीत का जश्न मनाने के लिए बेंगलुरु के चिन्नास्वामी स्टेडियम के बाहर लाखों प्रशंसक जमा हुए। कर्नाटक स्टेट क्रिकेट एसोसिएशन (KSCA) और RCB ने इस उत्सव के लिए एक समारोह आयोजित किया था, जिसे पहले एक विजय परेड के रूप में घोषित किया गया था। हालांकि, सुरक्षा कारणों से इसे स्टेडियम के अंदर टिकटेड इवेंट में बदल दिया गया। इस बदलाव की जानकारी का अभाव और अपर्याप्त भीड़ प्रबंधन ने भारी अव्यवस्था पैदा की। स्टेडियम की क्षमता 35,000 थी, लेकिन अनुमानित 2-3 लाख लोग बाहर जमा हो गए।
दोपहर करीब 4 बजे, गेट नंबर 7 और 15 पर भीड़ बेकाबू हो गई। सोशल मीडिया पर मुफ्त पास वितरण की अफवाहों और ऑनलाइन टिकट डाउनलोड की अचानक घोषणा ने स्थिति को और खराब कर दिया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, केवल दो गेट खोले गए, जिसके कारण लोग बैरिकेड तोड़कर और दीवारों पर चढ़कर अंदर घुसने की कोशिश करने लगे। इस दौरान भगदड़ मच गई, जिसमें 11 लोग कुचल गए और 75 से अधिक घायल हो गए। घायलों को बोवरिंग, व्यदेही, और मणिपाल अस्पतालों में भर्ती कराया गया, जहां 33 लोगों का इलाज चल रहा है, जबकि 42 को प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई।
- मृतकों की पहचान
इस त्रासदी में जान गंवाने वाले 11 लोग 40 वर्ष से कम उम्र के थे। मृतकों में शामिल हैं:
दिव्यांशी (13): येलहंका की एक कक्षा 9 की छात्रा, जो विराट कोहली को देखने के लिए अपनी मां और चाची के साथ आई थी।
दोरेशा (32): मांड्या जिले का सिविल इंजीनियर।
भूमिक (20): इंजीनियरिंग छात्र।
सहाना (25): कोलार की सॉफ्टवेयर इंजीनियर।
अक्षता (27): मंगलुरु की रहने वाली।
मनोज कुमार (33): तुमकुरु का बीबीए छात्र।
श्रवण के.टी. (20): चिक्कबल्लापुर का डेंटल छात्र।
कामाक्षी देवी (29): तमिलनाडु की रहने वाली।
शिवलिंग (17): यदगीर का किशोर।
चिन्मयी शेट्टी (19): यक्षगान और भरतनाट्यम नर्तकी।
प्रज्वल (20): येलहंका का इंजीनियरिंग छात्र।
इनमें से कई लोग अपने परिवारों को बिना बताए उत्सव में शामिल हुए थे, और उनकी कहानियां दिल दहला देने वाली हैं।
- शिकायत और आरोप
सामाजिक कार्यकर्ता स्नेहमयी कृष्णा ने 5 जून 2025 को कब्बन पार्क पुलिस स्टेशन में मुख्यमंत्री सिद्धारमैया, उपमुख्यमंत्री शिवकुमार, और KSCA के अधिकारियों के खिलाफ शिकायत दर्ज की। शिकायत में भारतीय दंड संहिता की धारा 106 के तहत मामला दर्ज करने की मांग की गई, जो लापरवाही से मृत्यु का कारण बनने की स्थिति में जवाबदेही तय करती है। शिकायत में आरोप लगाया गया कि इन नेताओं और आयोजकों ने अपनी जिम्मेदारी निभाने में विफलता दिखाई, जिसके कारण यह त्रासदी हुई।
कृष्णा ने कहा कि सरकार और आयोजकों ने भीड़ के आकार का अनुमान लगाने और पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था करने में चूक की। केवल 1,000 पुलिसकर्मी तैनात थे, जबकि उपमुख्यमंत्री शिवकुमार ने दावा किया था कि 5,000 पुलिसकर्मी मौजूद थे। इस विरोधाभास ने भीड़ प्रबंधन में गंभीर खामियों को उजागर किया।
- कर्नाटक हाई कोर्ट का स्वत: संज्ञान
कर्नाटक हाई कोर्ट ने इस त्रासदी का स्वत: संज्ञान लेते हुए एक जनहित याचिका (PIL) दर्ज की और सरकार को नोटिस जारी किया। कोर्ट ने सरकार से इस हादसे के कारणों, इसे रोकने की संभावनाओं, और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए उपायों पर विस्तृत स्थिति रिपोर्ट मांगी। सुनवाई 6 जून 2025 को दोपहर 2:30 बजे निर्धारित की गई है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश वी. कामेश्वर राव और न्यायमूर्ति सी.एम. जोशी की खंडपीठ ने कहा, “हमने महाधिवक्ता से अपनी बात रखी है, और उन्होंने एक स्थिति रिपोर्ट दाखिल की है, जिसे रिकॉर्ड पर लिया गया है। रजिस्ट्री को इस स्वत: संज्ञान को एक रिट याचिका के रूप में दर्ज करने का निर्देश दिया गया है।” अगली सुनवाई 10 जून को होगी।
महाधिवक्ता शशिकिरण शेट्टी ने कोर्ट को आश्वासन दिया कि सरकार इस मामले में विरोधी रुख नहीं अपनाएगी और कोर्ट के निर्देशों का पालन करेगी। कोर्ट ने यह भी पूछा कि क्या भीड़ नियंत्रण के लिए कोई मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) मौजूद थी, जिसके जवाब में सरकार ने कहा कि नई SOP तैयार की जा रही है।
मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने त्वरित कार्रवाई करते हुए बेंगलुरु पुलिस कमिश्नर बी. दयानंद, सेंट्रल डिवीजन डीसीपी, एसीपी, कब्बन पार्क पुलिस स्टेशन के इंस्पेक्टर, स्टेशन हाउस ऑफिसर, और स्टेडियम के क्रिकेट प्रभारी को निलंबित कर दिया। इसके अलावा, RCB, DNA इवेंट मैनेजमेंट, और KSCA के प्रतिनिधियों की गिरफ्तारी का आदेश दिया गया। एक मजिस्ट्रेट जांच का भी आदेश दिया गया, जिसकी अगुवाई बेंगलुरु शहरी उपायुक्त जी. जगदीशा करेंगे।
सिद्धारमैया ने मृतकों के परिवारों के लिए 10 लाख रुपये और KSCA ने 5 लाख रुपये की मुआवजा राशि की घोषणा की। घायलों के लिए मुफ्त इलाज का आश्वासन दिया गया। गृह मंत्री जी. परमेश्वर ने भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए नई SOP तैयार करने की बात कही।
इस हादसे ने राजनीतिक तूफान खड़ा कर दिया। विपक्षी नेता और कर्नाटक विधानसभा में विपक्ष के नेता आर. अशोक ने सिद्धारमैया और शिवकुमार को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराते हुए उनके इस्तीफे की मांग की। उन्होंने कहा, “जो लोग कल ट्रॉफी उठाकर और हवाई अड्डे पर सेल्फी लेकर उत्सव मना रहे थे, वे आज मृतकों के परिवारों के पास आंसू बहाने नहीं गए।” उन्होंने हाई कोर्ट के जज की निगरानी में विशेष जांच दल (SIT) की मांग की।
BJP सांसद संबित पात्रा ने इस घटना को “सरकार द्वारा निर्मित त्रासदी” करार दिया और सिद्धारमैया और शिवकुमार की गिरफ्तारी की मांग की, इसे अभिनेता अल्लू अर्जुन से जुड़े एक पिछले भगदड़ मामले से जोड़ते हुए।
उपमुख्यमंत्री शिवकुमार ने इस त्रासदी पर दुख व्यक्त किया और कहा, “हमारी सरकार इस पर राजनीति नहीं करेगी। भीड़ को नियंत्रित करना मुश्किल था।” हालांकि, उनकी यह टिप्पणी कि 5,000 पुलिसकर्मी तैनात थे, बाद में गलत साबित हुई, क्योंकि सरकार ने कोर्ट को बताया कि केवल 1,000 पुलिसकर्मी मौजूद थे।
इस त्रासदी ने बेंगलुरु में भीड़ प्रबंधन और सार्वजनिक आयोजनों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल उठाए। प्रत्यक्षदर्शियों और पीड़ितों के परिजनों ने बताया कि घटनास्थल पर न तो एम्बुलेंस थीं और न ही प्राथमिक चिकित्सा की सुविधा। सोशल मीडिया पर कई यूजर्स ने सरकार और आयोजकों की लापरवाही की आलोचना की। @DainikBhaskar ने लिखा, “RCB की जीत का जश्न मातम में बदला।”
कानूनी रूप से, यह मामला महत्वपूर्ण है क्योंकि कर्नाटक हाई कोर्ट की सक्रियता और स्वत: संज्ञान ने प्रशासन की जवाबदेही तय करने की दिशा में एक मजबूत कदम उठाया है। यह मामला भविष्य में बड़े आयोजनों के लिए सुरक्षा मानकों को और सख्त करने का आधार बन सकता है।
बेंगलुरु के चिन्नास्वामी स्टेडियम में हुई भगदड़ एक ऐसी त्रासदी है, जिसने 11 युवा जीवन छीन लिए और कई परिवारों को गहरे दुख में डुबो दिया। सामाजिक कार्यकर्ता स्नेहमयी कृष्णा की शिकायत और कर्नाटक हाई कोर्ट का स्वत: संज्ञान इस मामले में जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री शिवकुमार के खिलाफ दर्ज शिकायत ने इस त्रासदी को राजनीतिक रंग भी दे दिया है।
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