बिहार चुनाव 2025: चुनाव नहीं लड़ेंगे प्रशांत किशोर, जन सुराज को मजबूत करने पर जोर।
बिहार की राजनीति में बुधवार को एक बड़ा ऐलान हुआ। जन सुराज पार्टी के संस्थापक और प्रमुख रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने स्पष्ट कर दिया कि वे आगामी विधानसभा चुनाव 2025 में
बिहार की राजनीति में बुधवार को एक बड़ा ऐलान हुआ। जन सुराज पार्टी के संस्थापक और प्रमुख रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने स्पष्ट कर दिया कि वे आगामी विधानसभा चुनाव 2025 में किसी भी सीट से उम्मीदवार नहीं बनेंगे। उन्होंने कहा कि यह फैसला पार्टी के हित में लिया गया है और वे संगठन को मजबूत करने तथा प्रचार अभियान पर ध्यान केंद्रित करेंगे। यह घोषणा पटना में पीटीआई को दिए विशेष साक्षात्कार में की गई। किशोर ने कहा कि अगर पार्टी 150 सीटों से कम जीतती है तो इसे हार माना जाएगा। वे पहले रघोपुर सीट से आरजेडी नेता तेजस्वी यादव के खिलाफ लड़ने की अटकलों के केंद्र में थे, लेकिन पार्टी ने वहां स्थानीय उम्मीदवार चंचल सिंह को टिकट दिया है। यह कदम जन सुराज की रणनीति को दर्शाता है, जहां किशोर खुद को उम्मीदवार के बजाय पार्टी बिल्डर के रूप में देखना चाहते हैं। बिहार चुनाव नवंबर में होने हैं और जन सुराज सभी 243 सीटों पर लड़ने का दावा कर रही है।
प्रशांत किशोर का राजनीतिक सफर काफी रोचक रहा है। वे मूल रूप से राजनीतिक रणनीतिकार हैं, जिन्होंने 2011 में नरेंद्र मोदी के गुजरात चुनाव अभियान से शुरुआत की। उसके बाद 2012 में यूपीए के लिए काम किया। 2014 में मोदी की लोकसभा जीत में उनकी अहम भूमिका थी। फिर 2015 में नीतीश कुमार और लालू प्रसाद के महागठबंधन को जिताने में मदद की। लेकिन 2020 में नीतीश से मतभेद हो गए। 2022 में उन्होंने जन सुराज यात्रा शुरू की, जो बिहार की 13,500 किलोमीटर लंबी पैदल यात्रा थी। इस यात्रा का मकसद बिहार की समस्याओं को समझना और एक नई राजनीतिक वैकल्पिक ताकत बनाना था। यात्रा के दौरान उन्होंने शिक्षा, स्वास्थ्य, बेरोजगारी और पलायन जैसे मुद्दों पर जोर दिया। अक्टूबर 2024 में जन सुराज को आधिकारिक रूप से पार्टी का दर्जा मिला। किशोर ने कहा कि यह यात्रा उनके लिए जीवन बदलने वाली साबित हुई। अब वे कहते हैं कि पार्टी को मजबूत बनाने के लिए चुनाव लड़ना जरूरी नहीं।
जन सुराज पार्टी ने अब तक तीन सूचियां जारी की हैं। पहली सूची में 51 उम्मीदवारों के नाम थे, जो 9 अक्टूबर को घोषित हुई। दूसरी में 65 और तीसरी में 66 नाम शामिल हैं। कुल 182 सीटों पर उम्मीदवार तय हो चुके हैं। रघोपुर से चंचल सिंह को टिकट मिला, जो एक स्थानीय व्यवसायी हैं। तेजस्वी यादव ने 2020 में इस सीट से जीत हासिल की थी। किशोर ने कहा कि यह सामूहिक फैसला था। अगर वे खुद लड़ते तो पार्टी की रणनीति पर असर पड़ता। वे अब प्रचार पर फोकस करेंगे। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष उदय सिंह ने कहा कि किशोर जी का नाम लिस्ट में न होने से साफ है कि वे नहीं लड़ेंगे। वे 11 अक्टूबर से रघोपुर से प्रचार अभियान शुरू करेंगे। जन सुराज का लक्ष्य सभी सीटों पर लड़ना है, ताकि बिहार को नई दिशा मिले।
किशोर का यह बयान सियासी हलकों में चर्चा का विषय बन गया। उन्होंने कहा कि चुनाव जीतना आसान नहीं। हम या तो 10 से कम सीटें जीतेंगे या 150 से ज्यादा। बीच का कोई विकल्प नहीं। अगर 150 से ज्यादा जीत गए तो बिहार की राजनीति बदल जाएगी और राष्ट्रीय स्तर पर असर पड़ेगा। उन्होंने एनडीए या इंडिया गठबंधन के साथ गठजोड़ की संभावना से इनकार किया। कहा कि जन सुराज तीसरा विकल्प है। न नीतीश कुमार की सरकार चलेगी, न तेजस्वी यादव की। वे बिहार को विकास के पथ पर ले जाना चाहते हैं। किशोर ने शिक्षा पर जोर दिया। कहा कि बिहार में 40 प्रतिशत बच्चे स्कूल नहीं जाते। लड़कियों की शिक्षा पर विशेष ध्यान दें। स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार और रोजगार सृजन के लिए योजना है। उन्होंने कहा कि यात्रा के दौरान लोगों की आवाज सुनी, अब उसे अमल में लाएंगे।
बिहार चुनाव 2025 के लिए तैयारियां जोरों पर हैं। चुनाव आयोग ने 6 और 11 नवंबर को दो चरणों में मतदान का ऐलान किया है। नतीजे 14 नवंबर को आएंगे। कुल 7.42 करोड़ मतदाता हैं। जन सुराज ने कहा कि वे जातिगत समीकरण से ऊपर उठकर काम करेंगे। पार्टी में युवाओं को मौका दिया जा रहा है। कई उम्मीदवार पहली बार मैदान में हैं। विपक्ष ने किशोर के फैसले पर तंज कसा। आरजेडी ने कहा कि वे पहले ही हार मान चुके। भाजपा ने स्वागत किया, लेकिन कहा कि जन सुराज एनडीए का हिस्सा बने। किशोर ने साफ किया कि वे किसी गठबंधन में नहीं जाएंगे। उनका फोकस बिहार की जनता पर है।
प्रशांत किशोर की यात्रा ने बिहार को हिला दिया था। 2022 से 2024 तक चली यह यात्रा बक्सर से शुरू हुई और पूरे राज्य को कवर की। हजारों लोग जुड़े। किशोर ने कहा कि बिहार पिछड़ा इसलिए है क्योंकि नेताओं ने गलत प्राथमिकताएं चुनीं। वे अब संगठन निर्माण पर लगेंगे। पार्टी कार्यालयों को मजबूत करेंगे। युवाओं को ट्रेनिंग देंगे। महिलाओं के लिए विशेष अभियान चलाएंगे। किशोर ने कहा कि चुनाव लड़ना आसान लगता है, लेकिन संगठन चलाना कठिन। इसलिए वे पीछे रहकर काम करेंगे। उनके समर्थक खुश हैं। एक युवा कार्यकर्ता ने कहा कि किशोर जी का फैसला सही है। वे पार्टी को मजबूत बनाएंगे।
यह फैसला जन सुराज के लिए महत्वपूर्ण है। पार्टी नई है, इसलिए किशोर का चेहरा महत्वपूर्ण रहा। लेकिन अब वे उम्मीदवारों को आगे बढ़ाएंगे। रघुनाथपुर से राहुल कीर्ति सिंह, सहरसा से किशोर कुमार मुन्ना और छपरा से जयप्रकाश सिंह जैसे नाम हैं। ये स्थानीय नेता हैं। जन सुराज ने कहा कि उम्मीदवारों का चयन यात्रा के फीडबैक पर आधारित है। पार्टी का घोषणा पत्र जल्द आएगा। इसमें शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार पर वादे होंगे। किशोर ने कहा कि बिहार को 10 साल में बदलना है। अगर जीते तो सरकार बनाएंगे।
बिहार की राजनीति में किशोर का प्रभाव रहा है। 2015 में महागठबंधन की जीत उनके रणनीति का कमाल था। लेकिन 2020 में हार के बाद वे अलग हो गए। अब जन सुराज उनके नए सपने का हिस्सा है। किशोर ने कहा कि वे राजनीति में रहेंगे, लेकिन उम्मीदवार नहीं बनेंगे। यह फैसला पार्टी को एकजुट रखेगा। कार्यकर्ताओं में उत्साह है। पटना में सभा हुई, जहां किशोर ने संबोधन दिया। उन्होंने कहा कि बिहार की जनता तय करेगी कि कौन सही है। जन सुराज का लक्ष्य साफ है। विकास और न्याय।
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