विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने की प्रधानमंत्री मोदी और गृहमंत्री शाह के साथ डेढ़ घंटे की बैठक, CIC और सतर्कता आयुक्त की नियुक्तियों पर असहमति नोट, सामाजिक न्याय की मांग।
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की, जो लगभग
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की, जो लगभग डेढ़ घंटे तक चली। यह बैठक संसद भवन के प्रधानमंत्री के कक्ष में आयोजित हुई, और इसका मुख्य उद्देश्य केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) के मुख्य सूचना आयुक्त, आठ सूचना आयुक्तों तथा केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) के एक सतर्कता आयुक्त की नियुक्तियों को अंतिम रूप देना था। बैठक तीन सदस्यीय चयन समिति द्वारा बुलाई गई थी, जिसमें प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में विपक्ष के नेता और एक केंद्रीय मंत्री शामिल होते हैं। इस बार गृहमंत्री अमित शाह को केंद्रीय मंत्री के रूप में नामित किया गया था। राहुल गांधी ने बैठक के दौरान कुछ नामों पर औपचारिक असहमति नोट प्रस्तुत किया, जिसमें पिछड़े वर्गों, दलितों, आदिवासियों, अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी), अत्यंत पिछड़ा वर्ग (ईबीसी) तथा अल्पसंख्यक समुदायों के प्रतिनिधित्व की कमी पर जोर दिया गया। उन्होंने कहा कि भारत की 90 प्रतिशत आबादी को शीर्ष संस्थागत नियुक्तियों से बाहर रखा जा रहा है, जो एक व्यवस्थित पैटर्न का हिस्सा है। बैठक में सरकार ने आश्वासन दिया कि इन चिंताओं पर विचार किया जाएगा, हालांकि चयन प्रक्रिया में सरकार के बहुमत के कारण अंतिम निर्णय उसी पर निर्भर करता है।
बैठक का आयोजन सूचना का अधिकार (आरटीआई) अधिनियम की धारा 12(3) के तहत किया गया था, जिसमें चयन समिति के लिए प्रधानमंत्री को अध्यक्ष, लोकसभा में विपक्ष के नेता को सदस्य तथा प्रधानमंत्री द्वारा नामित एक केंद्रीय मंत्री को सदस्य बनाया जाता है। इस समिति का कार्य मुख्य सूचना आयुक्त और सूचना आयुक्तों के नामों का चयन तथा अनुशंसा करना है, जिसके बाद राष्ट्रपति द्वारा नियुक्ति की जाती है। केंद्रीय सूचना आयोग आरटीआई से जुड़े शिकायतों और अपीलों की सुनवाई का सर्वोच्च निकाय है, जहां मुख्य सूचना आयुक्त और अधिकतम 10 सूचना आयुक्त कार्यरत होते हैं। वर्तमान में CIC में केवल दो सूचना आयुक्त कार्यरत हैं, और आठ पद खाली हैं। पूर्व मुख्य सूचना आयुक्त हीरालाल समरिया ने 13 सितंबर को 65 वर्ष की आयु पूरी होने पर पद छोड़ दिया था, जो नवंबर 2023 में नियुक्त हुए थे। इस नियुक्ति में देरी से आरटीआई प्रक्रिया प्रभावित हो रही है, क्योंकि आयोग में अपीलों का निपटारा धीमा पड़ गया है। सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को 1 दिसंबर को सूचित किया था कि चयन समिति 10 दिसंबर को बैठक करेगी। राहुल गांधी ने असहमति नोट में शॉर्टलिस्ट किए गए उम्मीदवारों पर आपत्ति जताई, जिसमें कहा गया कि इनमें दलित, आदिवासी, ओबीसी, ईबीसी और अल्पसंख्यक समुदायों से कोई प्रतिनिधित्व नहीं है। उन्होंने मांग की कि आवेदकों की जातिगत संरचना का विवरण सार्वजनिक किया जाए, ताकि असमानताओं का पता चल सके। कांग्रेस के स्रोतों के अनुसार, मुख्य सूचना आयुक्त के पद के लिए 83 आवेदन प्राप्त हुए थे, जिनमें दलित समुदाय से मात्र 7 प्रतिशत से कम आवेदक थे, और शॉर्टलिस्ट में केवल एक दलित उम्मीदवार शामिल था। इसी प्रकार, आठ सूचना आयुक्तों के पदों के लिए 161 आवेदन आए, लेकिन सामाजिक न्याय के प्रतिनिधित्व की कमी बनी रही। राहुल गांधी ने कहा कि यह बहिष्कार संयोगवश नहीं, बल्कि पूर्व नियुक्तियों में एक पैटर्न है, जहां संवैधानिक और स्वायत्त संस्थाओं में पिछड़े समुदायों को नजरअंदाज किया जाता है। उन्होंने चेतावनी दी कि इससे आरटीआई अधिनियम कमजोर हो रहा है, क्योंकि उम्मीदवारों का पिछला रिकॉर्ड पारदर्शिता के प्रति प्रतिबद्ध न होने का है। बैठक में इन मुद्दों पर विस्तृत चर्चा हुई, और प्रधानमंत्री तथा गृहमंत्री ने आश्वासन दिया कि आवेदकों के पूल से कुछ नामों पर पुनर्विचार किया जाएगा।
केंद्रीय सतर्कता आयोग के सतर्कता आयुक्त की नियुक्ति भी इसी समिति द्वारा की जाती है, जो भ्रष्टाचार निवारण और सतर्कता मामलों की जांच का प्रमुख निकाय है। सीवीसी में एक केंद्रीय सतर्कता आयुक्त और दो सतर्कता आयुक्त होते हैं, और वर्तमान में एक पद खाली है। चयन प्रक्रिया में भी सामाजिक प्रतिनिधित्व का मुद्दा उठा, जहां राहुल गांधी ने कहा कि शीर्ष पदों पर बहुमत की आबादी का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करना आवश्यक है। बैठक के दौरान सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देशों का हवाला दिया, जिसमें चयन के लिए खोज समिति का गठन और शॉर्टलिस्टिंग का प्रावधान है। कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) ने पदों के लिए विज्ञापन जारी किए थे, और आवेदनों को खोज समिति को भेजा गया, जो कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता में कार्य करती है। समिति द्वारा शॉर्टलिस्ट किए गए नाम चयन समिति को सौंपे जाते हैं, जो अंतिम अनुशंसा करती है। राहुल गांधी ने प्रक्रिया में पर्याप्त समय न दिए जाने की भी शिकायत की, जिससे उम्मीदवारों की जांच प्रभावित हो रही है। यह बैठक लोकसभा विंटर सत्र के दौरान हुई, जब संसद में चुनाव सुधारों पर बहस चल रही थी। राहुल गांधी ने मंगलवार को लोकसभा में मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) और निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया पर सवाल उठाए थे, जहां उन्होंने कहा कि चयन समिति में प्रधानमंत्री, गृहमंत्री और विपक्ष के नेता के बीच असंतुलन है। उन्होंने कहा कि कमरे में एक तरफ प्रधानमंत्री और गृहमंत्री हैं, दूसरी तरफ विपक्ष का नेता, जिसकी आवाज का कोई महत्व नहीं। यह टिप्पणी CIC और सीवीसी की नियुक्तियों के संदर्भ में भी प्रासंगिक थी, क्योंकि सभी समितियों की संरचना समान है। राहुल गांधी ने चुनाव कानूनों में संशोधनों पर भी चिंता जताई, जैसे मुख्य न्यायाधीश को चयन पैनल से हटाना, आयोग को कानूनी छूट देना तथा सीसीटीवी फुटेज 45 दिनों में नष्ट करने का प्रावधान। इन मुद्दों ने बैठक को और विस्तृत बना दिया, हालांकि मुख्य फोकस नियुक्तियों पर रहा।
नियुक्ति प्रक्रिया के तहत, CIC और सूचना आयुक्तों का कार्यकाल पांच वर्ष या 65 वर्ष की आयु तक होता है, और वे आरटीआई अपीलों का निपटारा करते हैं। आयोग में रिक्त पदों के कारण हजारों अपीलें लंबित हैं, जो पारदर्शिता को प्रभावित कर रही हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कई बार सरकार को पदों को भरने का निर्देश दिया है, और 1 दिसंबर को सुनवाई में कहा गया कि देरी अस्वीकार्य है। चयन समिति ने बैठक में कुछ नामों पर सहमति जताई, लेकिन राहुल गांधी की असहमति के कारण प्रक्रिया लंबी खिंची। कांग्रेस के स्रोतों के अनुसार, राहुल गांधी ने हर प्रस्तावित नाम को खारिज कर दिया, और सामाजिक न्याय सुनिश्चित करने की मांग की। सरकार ने कहा कि आवेदनों में ही प्रतिनिधित्व कम है, लेकिन विपक्ष ने इसे प्रक्रिया की कमी बताया। बैठक के बाद, अनुशंसित नामों को राष्ट्रपति को भेजा जाएगा, और नियुक्तियां शीघ्र होंगी। CIC की भूमिका आरटीआई अधिनियम 2005 के तहत महत्वपूर्ण है, जो नागरिकों को सरकारी सूचनाओं तक पहुंच प्रदान करता है। आयोग शिकायतों की सुनवाई करता है, और असंतोषजनक सरकारी जवाबों पर जुर्माना लगाता है। वर्तमान में आयोग की क्षमता सीमित होने से कार्यभार बढ़ गया है। इसी प्रकार, सीवीसी भ्रष्टाचार के मामलों की जांच करता है, और सतर्कता आयुक्त लोकपाल के साथ समन्वय रखते हैं। रिक्त पदों के कारण इन संस्थाओं का कार्य प्रभावित हो रहा है। राहुल गांधी ने बैठक में कहा कि नियुक्तियां पारदर्शी और समावेशी होनी चाहिए, ताकि संस्थाएं निष्पक्ष रहें। उन्होंने मांग की कि शॉर्टलिस्ट में सामाजिक विविधता सुनिश्चित की जाए। सरकार ने आश्वासन दिया कि अगली प्रक्रियाओं में सुधार पर विचार होगा।
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