सुप्रीम कोर्ट ने मांगे केंद्र और सेबी के जवाब: गौतम अडानी ख़रीदेंगे सहारा की 88 प्रॉपर्टीज कुल क़ीमत 1 लाख करोड़ रुपए, सहारा की 88 संपत्तियों को अडानी को बेचने की मांग। 

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार 14 अक्टूबर 2025 को एक महत्वपूर्ण सुनवाई में सहारा इंडिया कमर्शियल कॉर्पोरेशन लिमिटेड की याचिका पर केंद्र सरकार, सेबी और अन्य पक्षों से जवाब मांगे हैं। सहारा

Oct 15, 2025 - 13:29
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सुप्रीम कोर्ट ने मांगे केंद्र और सेबी के जवाब: गौतम अडानी ख़रीदेंगे सहारा की 88 प्रॉपर्टीज कुल क़ीमत 1 लाख करोड़ रुपए, सहारा की 88 संपत्तियों को अडानी को बेचने की मांग। 
सुप्रीम कोर्ट ने मांगे केंद्र और सेबी के जवाब: गौतम अडानी ख़रीदेंगे सहारा की 88 प्रॉपर्टीज कुल क़ीमत 1 लाख करोड़ रुपए, सहारा की 88 संपत्तियों को अडानी को बेचने की मांग। 

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार 14 अक्टूबर 2025 को एक महत्वपूर्ण सुनवाई में सहारा इंडिया कमर्शियल कॉर्पोरेशन लिमिटेड की याचिका पर केंद्र सरकार, सेबी और अन्य पक्षों से जवाब मांगे हैं। सहारा समूह ने 88 प्रमुख संपत्तियों को अडानी प्रॉपर्टीज प्राइवेट लिमिटेड को बेचने की अनुमति मांगी है, ताकि निवेशकों को रिफंड का भुगतान किया जा सके। वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कोर्ट को बताया कि इससे लगभग 12,000 करोड़ रुपये जमा होंगे, जो समूह की देनदारियों को चुकाने में मदद करेंगे। कोर्ट ने वित्त मंत्रालय और सहकारिता मंत्रालय को पक्षकार बनाया है तथा अमीकस क्यूरी शेखर नफाड़े को 88 संपत्तियों की विस्तृत जानकारी संकलित करने का निर्देश दिया है। सुनवाई 17 नवंबर को होगी। यह सौदा सहारा-सेेबी विवाद के लंबे इतिहास का एक नया अध्याय हो सकता है, जो 2012 से चल रहा है।

सहारा इंडिया कमर्शियल कॉर्पोरेशन लिमिटेड ने वकील गौतम अवस्थी के माध्यम से दो याचिकाएं दायर की हैं। पहली में 88 अचल संपत्तियों की बिक्री की अनुमति मांगी गई है, जो 6 सितंबर 2025 के टर्म शीट के तहत अडानी प्रॉपर्टीज के साथ तय की गई है। दूसरी याचिका में बिक्री से प्राप्त राशि के उपयोग की निगरानी सुप्रीम कोर्ट द्वारा करने की मांग है। समूह का कहना है कि ये संपत्तियां देशभर में फैली हैं, जिनमें महाराष्ट्र का आंबी वैली सिटी प्रोजेक्ट, उत्तर प्रदेश का सहारा शहर लखनऊ और अन्य व्यावसायिक तथा आवासीय संपत्तियां शामिल हैं। आंबी वैली अकेले 8,810 एकड़ में फैला एक प्रमुख टाउनशिप प्रोजेक्ट है। सहारा ने कहा कि अलग-अलग संपत्तियों को बेचने के कई असफल प्रयासों के बाद यह एकमुश्त सौदा एक महत्वपूर्ण सफलता है। इससे संपत्तियों का अधिकतम मूल्य प्राप्त होगा और कोर्ट के आदेशों का पालन संभव होगा।

कपिल सिब्बल ने सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया कि समूह ने एक व्यापक योजना तैयार की है। इसके तहत बिक्री से मिलने वाली राशि को सीधे सेबी-सहारा रिफंड अकाउंट में जमा किया जाएगा। उन्होंने कहा कि पहले की कोशिशों में संपत्तियों को अलग-अलग बेचना मुश्किल साबित हुआ, क्योंकि खरीदार नहीं मिले। अब अडानी प्रॉपर्टीज ने पूरा पोर्टफोलियो खरीदने का प्रस्ताव दिया है, भले ही कुछ संपत्तियों पर विवाद हो। सिब्बल ने जोर दिया कि यह सौदा लंबित मुकदमों को समाप्त करने में मदद करेगा। वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने अडानी की ओर से कहा कि उनका क्लाइंट सभी 88 संपत्तियों को एक साथ खरीदने को तैयार है, ताकि और मुकदमेबाजी न हो। रोहतगी ने कहा कि यह निवेशकों के हित में है और समूह को वित्तीय बोझ से मुक्ति मिलेगी।

सुप्रीम कोर्ट ने सहारा-सेेबी मामले में कई अहम फैसले लिए हैं। 2012 में कोर्ट ने सहारा की दो कंपनियों- सहारा इंडिया रीयल एस्टेट कॉर्पोरेशन लिमिटेड और सहारा हाउसिंग इन्वेस्टमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड- को अवैध रूप से जारी किए गए वैकल्पिक रूप से पूर्ण परिवर्तनीय डिबेंचर (ओएफसीडी) के 24,029 करोड़ रुपये निवेशकों को ब्याज सहित लौटाने का आदेश दिया था। सेबी ने इन्हें गैरकानूनी माना था। सहारा ने अब तक संपत्तियों की बिक्री से लगभग 16,000 करोड़ रुपये जमा किए हैं। लेकिन अभी भी 9,000 करोड़ रुपये बाकी हैं। मार्च 2023 और सितंबर 2025 में कोर्ट ने सहकारिता सोसाइटियों के जमा राशि से 5,000 करोड़ रुपये प्रत्येक बार जारी करने का आदेश दिया, ताकि जमा धारकों को भुगतान हो। सेबी के वकील अरविंद दतर ने कहा कि बिक्री की अनुमति दी जा सकती है, बशर्ते मूल्य बाजार मूल्य के 90 प्रतिशत से कम न हो। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में यह लेन-देन होना चाहिए।

कोर्ट ने कुछ पक्षों द्वारा संपत्तियों पर दावा उठाए जाने पर चिंता जताई। वकील गोपाल शंकरनारायणन ने कहा कि कई संपत्तियां पहले से विवादित हैं या अन्य पक्षों से समझौते बंधे हैं। अमीकस क्यूरी शेखर नफाड़े को निर्देश दिया गया कि वे 88 संपत्तियों की सूची तैयार करें- एक 'क्लीन' यानी विवादरहित और दूसरी विवादित। नफाड़े ने सुझाव दिया कि पहले 9,000 करोड़ रुपये जमा किए जाएं। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने वित्त और सहकारिता मंत्रालयों को पक्षकार बनाने का समर्थन किया। कोर्ट ने इन मंत्रालयों से 17 नवंबर तक जवाब मांगा। साथ ही, सहारा के कर्मचारियों और अन्य दावेदारों को नफाड़े के समक्ष अपने दावे पेश करने को कहा। यह सुनिश्चित करेगा कि बिक्री से कोई हित प्रभावित न हो।

सहारा समूह का यह सौदा उसके वित्तीय संकट से निपटने का प्रयास है। समूह ने कहा कि संपत्तियों को अधिकतम मूल्य पर बेचना और देनदारियां चुकाना ही अब प्राथमिकता है। इससे अवमानना कार्यवाही का अंत हो सकता है। अडानी ग्रुप के लिए यह एक बड़ा अवसर है। गौतम अडानी की कंपनी पहले से रियल एस्टेट क्षेत्र में सक्रिय है। आंबी वैली जैसी संपत्ति पर्यटन और आवास के लिए मूल्यवान है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सौदा 12,000 करोड़ रुपये से अधिक का है, लेकिन सटीक राशि टर्म शीट में गोपनीय रखी गई है। सहारा ने कहा कि यह लेन-देन सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के अनुरूप है। समूह के प्रवक्ता ने कहा कि निवेशकों को भुगतान प्राथमिकता है।

यह मामला भारतीय कॉर्पोरेट जगत के लिए एक मिसाल है। सहारा समूह पर 2012 से कई नियामक और जांच एजेंसियों का दबाव रहा है। प्रवर्तन निदेशालय ने पहले 707 एकड़ जमीन जब्त की थी, जो 1,460 करोड़ रुपये की थी। अब संपत्तियों की बिक्री से समूह को राहत मिल सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में यह सौदा पारदर्शी होगा। लेकिन कुछ आलोचक पूछ रहे हैं कि क्या यह कॉर्पोरेट डील्स में न्यायिक हस्तक्षेप की सीमा है। सेबी ने कहा कि रिफंड अकाउंट में कमी पूरी होनी चाहिए। कोर्ट ने साफ किया कि बिक्री निवेशकों के हित में ही होगी।

सुनवाई के बाद वकीलों ने मीडिया से बात की। कपिल सिब्बल ने कहा कि यह सौदा समूह के लिए जीवन रेखा है। मुकुल रोहतगी ने अडानी की प्रतिबद्धता दोहराई। सहारा के कर्मचारी चिंतित हैं कि बिक्री से नौकरियां प्रभावित होंगी। समूह ने आश्वासन दिया कि कर्मचारियों के हित सुरक्षित रहेंगे। यह सौदा पूरा होने पर सहारा समूह के लिए नया दौर शुरू हो सकता है। निवेशक अब राहत की उम्मीद कर रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट का फैसला सभी को प्रभावित करेगा।

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