Politics News: असदुद्दीन ओवैसी का पाकिस्तान पर करारा प्रहार- मौलवियों की बकवास पर तंज, आतंकवाद और गरीबी पर खोली पोल। 

ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के प्रमुख और हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने 5 जून 2025 को पाकिस्तान और उसके...

Jun 6, 2025 - 14:04
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Politics News: असदुद्दीन ओवैसी का पाकिस्तान पर करारा प्रहार- मौलवियों की बकवास पर तंज, आतंकवाद और गरीबी पर खोली पोल। 

ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के प्रमुख और हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने 5 जून 2025 को पाकिस्तान और उसके मौलवियों पर तीखा हमला बोला। एक अंतरराष्ट्रीय मंच पर पाकिस्तान की आतंकवाद-प्रायोजित नीतियों को बेनकाब करने के बाद, ओवैसी ने पाकिस्तानी मौलवियों द्वारा उनके खिलाफ की जा रही "ऊल-जुलूल" टिप्पणियों पर करारा जवाब दिया। उन्होंने कहा, "पाकिस्तान के मौलवी मेरे बारे में ऊल-जुलूल बात कर रहे हैं, उनके देश में पोलियो की समस्या है, 40% गरीबी है, 9% बेरोजगारी है, 23 मिलियन बच्चे स्कूल नहीं जाते, इनको उसकी फिक्र नहीं है, लेकिन ओवैसी की फिक्र है।" अपने चिर-परिचित हास्यपूर्ण अंदाज में उन्होंने यह भी जोड़ा, "तुम मेरी फिक्र मत करो, मेरी शादी हो चुकी है।" यह बयान न केवल उनकी बेबाकी को दर्शाता है, बल्कि पाकिस्तान की सामाजिक और आर्थिक विफलताओं पर भी कटाक्ष करता है।

ओवैसी का यह बयान तब आया जब वे हाल ही में सऊदी अरब, कुवैत, बहरीन, और अल्जीरिया के दौरे से लौटे थे। वे एक भारतीय संसदीय प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा थे, जिसे पहलगाम आतंकी हमले (22 अप्रैल 2025) के बाद भारत का पक्ष वैश्विक मंच पर रखने और पाकिस्तान की आतंकवाद-प्रायोजित नीतियों को बेनकाब करने के लिए भेजा गया था। इस हमले में 26 पर्यटकों की हत्या हुई थी, जिसके लिए भारत ने पाकिस्तान को जिम्मेदार ठहराया। भारत ने 'ऑपरेशन सिंदूर' के तहत जवाबी कार्रवाई की, जिसमें पाकिस्तान के कई आतंकी ठिकानों को नष्ट किया गया। इस कार्रवाई के बाद पाकिस्तान ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत के खिलाफ प्रचार शुरू किया, जिसमें उसके मौलवियों और नेताओं ने भारतीय मुसलमानों की स्थिति पर सवाल उठाए।

पाकिस्तान के पूर्व विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो ने संयुक्त राष्ट्र में दावा किया था कि भारत में मुसलमानों को "शैतान" की तरह चित्रित किया जाता है। इस पर ओवैसी ने तीखी प्रतिक्रिया दी, जिसमें उन्होंने कहा कि पाकिस्तान को भारत के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करने का कोई अधिकार नहीं है। उन्होंने रियाद में कहा, "भारत में 24 करोड़ से अधिक मुसलमान गर्व के साथ रहते हैं। हमारे इस्लामिक विद्वान दुनिया के किसी भी विद्वान से बेहतर हैं।" इस दौरान, कुछ पाकिस्तानी मौलवियों ने ओवैसी के खिलाफ व्यक्तिगत टिप्पणियां कीं, जिसके जवाब में उन्होंने यह बयान दिया।

  • पाकिस्तान की सामाजिक और आर्थिक स्थिति पर कटाक्ष

ओवैसी ने अपने बयान में पाकिस्तान की सामाजिक और आर्थिक समस्याओं को उजागर किया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान में पोलियो की समस्या बनी हुई है, जो विश्व में केवल पाकिस्तान और अफगानिस्तान में ही प्रचलित है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, 2024 तक पाकिस्तान में पोलियो के 12 मामले सामने आए, जो स्वास्थ्य सेवाओं की कमी को दर्शाता है। इसके अलावा, उन्होंने पाकिस्तान की 40% गरीबी दर और 9% बेरोजगारी दर का जिक्र किया। विश्व बैंक की 2023 की रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान में 39.4% आबादी गरीबी रेखा से नीचे रहती है, और अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) ने 2024 में बेरोजगारी दर को 8.5% बताया।

सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह है कि ओवैसी ने 23 मिलियन बच्चों के स्कूल न जाने की बात कही। यूनिसेफ की 2023 की रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान में 22.8 मिलियन बच्चे (5-16 वर्ष) स्कूल से बाहर हैं, जो दक्षिण एशिया में सबसे अधिक है। ओवैसी ने इन आंकड़ों का उपयोग करके पाकिस्तान के नेताओं और मौलवियों पर कटाक्ष किया, जो भारत और भारतीय मुसलमानों की आलोचना करते हैं, लेकिन अपने देश की समस्याओं पर ध्यान नहीं देते।

  • हास्य और तंज का उपयोग

ओवैसी का बयान, "तुम मेरी फिक्र मत करो, मेरी शादी हो चुकी है," उनके विशिष्ट हास्य और तंज का उदाहरण है। यह टिप्पणी न केवल पाकिस्तानी मौलवियों की व्यक्तिगत आलोचनाओं का जवाब थी, बल्कि यह भी दर्शाती है कि ओवैसी अपनी छवि को लेकर कितने सहज हैं। यह बयान सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, और कई यूजर्स ने इसे उनकी बेबाकी और हाजिरजवाबी की मिसाल बताया। @aajtak ने अपने X पोस्ट में लिखा, "पाकिस्तान के मौलवियों पर तीखा हमला करते हुए ओवैसी ने कहा कि ये जो मौलवी मेरे बारे में ऊल-जुलूल बात कर रहे हैं, उनके देश में पोलियो की समस्या है, 40 फीसदी गरीबी है, 9 फीसदी बेरोजगारी है, 23 मिलियन बच्चे स्कूल नहीं जाते..."

  • पाकिस्तान की आतंकवाद नीति पर हमला

ओवैसी ने न केवल सामाजिक समस्याओं पर बल्कि पाकिस्तान की आतंकवाद-प्रायोजित नीतियों पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र करते हुए कहा कि इस कार्रवाई में मारे गए आतंकियों की नमाज-ए-जनाजा में पाकिस्तानी सेना के लोग शामिल थे, जिसमें एक अमेरिका द्वारा नामित आतंकवादी भी था। उन्होंने पाकिस्तान को "आधिकारिक भिखमंगा" करार दिया, जो अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) से 1 बिलियन डॉलर का कर्ज लेकर आतंकवाद को बढ़ावा देता है।

उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान का इस्लाम से कोई लेना-देना नहीं है, और वह केवल धर्म का दुरुपयोग करता है। उन्होंने कहा, "पाकिस्तान इस्लाम विरोधी मुल्क है और चंद पैसों के लिए दीन बेचने वालों का देश है।" यह बयान उनकी राष्ट्रवादी छवि को और मजबूत करता है, जिसे उन्होंने पहलगाम हमले के बाद और अधिक मुखरता से सामने रखा।

  • राष्ट्रवादी रुख और भारत के प्रति निष्ठा

पहलगाम हमले के बाद ओवैसी ने भारत के प्रति अपनी निष्ठा को बार-बार रेखांकित किया। उन्होंने कहा, "मेरा मुल्क मेरी पॉलिटिकल विचारधारा से बढ़कर है।" उन्होंने भारत के 24 करोड़ मुसलमानों का गर्व के साथ जिक्र किया और कहा कि उनके पूर्वजों ने जिन्ना की 'टू नेशन थ्योरी' को खारिज किया था। यह बयान उन आलोचकों के लिए जवाब था, जो उन्हें सांप्रदायिक और विभाजनकारी कहते हैं।

ओवैसी ने यह भी कहा कि पाकिस्तान भारत में हिंदू-मुस्लिम तनाव पैदा करना चाहता है, लेकिन भारतीय मुसलमान इसके खिलाफ हैं। उन्होंने कहा, "पाकिस्तान को परमाणु मुक्त करने का समय आ गया है।" यह बयान न केवल पाकिस्तान की नीतियों पर हमला था, बल्कि भारत की रक्षा नीति के प्रति उनका समर्थन भी दर्शाता है।

ओवैसी का यह बयान सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से चर्चा में रहा। @VistaarNews ने लिखा, "इस्लाम किसी भी व्यक्ति की हत्या की अनुमति नहीं देता है और दुर्भाग्य से, यही पाकिस्तान की विचारधारा है..." @WasimAkramTyagi ने टिप्पणी की, "भारत से तनाव के दौरान पाकिस्तान ने 'इस्लाम' का राग छेड़ा है। ओवैसी ने पाकिस्तान को जमकर फटकार लगाई और उसे इस्लाम सिखाया है।" कई यूजर्स ने उनके हास्य और राष्ट्रवादी रुख की सराहना की, जबकि कुछ ने इसे राजनीतिक स्टंट करार दिया।

इस बयान ने ओवैसी की छवि को और मजबूत किया, खासकर उन लोगों के बीच जो उन्हें एक राष्ट्रवादी मुस्लिम नेता के रूप में देखते हैं। पहलगाम हमले के बाद उनके सख्त रुख ने उनके विरोधियों को भी चुप कर दिया, जो उन पर सांप्रदायिक होने का आरोप लगाते थे। उनकी यह टिप्पणी कि "मुल्क से मोहब्बत है, इसलिए 'पाकिस्तान मुर्दाबाद' कहा, किसी के सर्टिफिकेट के लिए नहीं," उनकी देशभक्ति को रेखांकित करती है।

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इसके अलावा, ओवैसी ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का पक्ष रखकर वैश्विक स्तर पर भारत की स्थिति को मजबूत किया। उन्होंने सऊदी अरब और बहरीन में पाकिस्तान के झूठे प्रचार का जवाब दिया, जिसमें उन्होंने भारत और इन देशों के ऐतिहासिक संबंधों को भी उजागर किया। यह भारत की कूटनीतिक रणनीति का हिस्सा था, जिसमें पाकिस्तान को फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) की ग्रे लिस्ट में वापस लाने की मांग की गई।

हालांकि ओवैसी का यह बयान लोकप्रिय हुआ, लेकिन कुछ आलोचकों ने इसे राजनीतिक लाभ के लिए दिया गया बयान करार दिया। कुछ ने कहा कि वे भारत में मुस्लिम समुदाय के मुद्दों को उठाने के बजाय अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अधिक ध्यान दे रहे हैं। इसके अलावा, उनके कुछ बयान, जैसे वक्फ संशोधन बिल की कॉपी फाड़ना, उनकी छवि को विवादास्पद बनाते हैं। फिर भी, उनके इस बयान ने उनकी राष्ट्रवादी छवि को मजबूत किया और उनके समर्थकों के बीच उत्साह पैदा किया। असदुद्दीन ओवैसी का पाकिस्तानी मौलवियों और उनकी नीतियों पर तीखा हमला न केवल उनकी बेबाकी को दर्शाता है, बल्कि भारत के प्रति उनकी निष्ठा को भी रेखांकित करता है। उनके बयान ने पाकिस्तान की सामाजिक समस्याओं—पोलियो, गरीबी, बेरोजगारी, और शिक्षा की कमी—को उजागर करके पड़ोसी देश की पाखंडी नीतियों को बेनकाब किया।

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