Bollywood News: वामिका गब्बी ने उठाया सवाल, ‘फिल्म फ्लॉप होने पर हीरो की फीस क्यों नहीं घटती?’
बॉलीवुड में लैंगिक समानता और वेतन असमानता का मुद्दा लंबे समय से चर्चा का विषय रहा है। समय-समय पर कई अभिनेत्रियाँ इस बारे में...
बॉलीवुड में लैंगिक समानता और वेतन असमानता का मुद्दा लंबे समय से चर्चा का विषय रहा है। समय-समय पर कई अभिनेत्रियाँ इस बारे में अपनी आवाज़ उठाती रही हैं, लेकिन यह मुद्दा अभी भी अनसुलझा है। हाल ही में, अभिनेत्री वामिका गब्बी (Wamiqa Gabbi), जिन्हें हालिया रिलीज़ फिल्म भूल चूक माफ में राजकुमार राव के साथ देखा गया था, ने इस मुद्दे पर खुलकर अपनी राय रखी। उन्होंने सवाल उठाया कि जब फिल्में बॉक्स ऑफिस पर असफल होती हैं, तो पुरुष अभिनेताओं की फीस पर कोई असर क्यों नहीं पड़ता, जबकि अभिनेत्रियों को कम वेतन और सख्त जांच का सामना करना पड़ता है।
- वामिका गब्बी का बयान
वामिका गब्बी ने हाल ही में न्यूज़18 को दिए एक साक्षात्कार में फिल्म इंडस्ट्री में वेतन असमानता पर अपनी बेबाक राय रखी। उन्होंने कहा, “यह तथ्य कि वेतन में असमानता मौजूद है, मुझे परेशान नहीं करता, लेकिन यह भावना कि आप एक महिला हैं और आपको कम भुगतान किया जाएगा, यह वास्तव में कष्टप्रद है। तर्क यह दिया जाता है कि पुरुष अभिनेता ज्यादा दर्शकों को आकर्षित करते हैं, लेकिन बिना नायिका के कोई फिल्म बन ही नहीं सकती।” उन्होंने आगे सवाल उठाया, “जब उनकी फिल्म फ्लॉप होती है, तो पुरुष अभिनेताओं की फीस क्यों नहीं घटती? यह सवाल मुझे हमेशा परेशान करता है।”
वामिका का यह बयान न केवल उनकी निर्भीकता को दर्शाता है, बल्कि यह इंडस्ट्री में मौजूद गहरी जड़ों वाली असमानताओं की ओर भी इशारा करता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि पुरुष अभिनेताओं को अक्सर उनकी स्टार पावर के आधार पर भारी-भरकम फीस दी जाती है, लेकिन जब उनकी फिल्में असफल होती हैं, तो उनकी फीस पर कोई सवाल नहीं उठाया जाता। दूसरी ओर, अभिनेत्रियों को न केवल कम वेतन मिलता है, बल्कि उनकी परफॉर्मेंस और प्रोजेक्ट्स की सफलता पर ज्यादा सवाल उठाए जाते हैं।
- वामिका गब्बी: एक उभरता सितारा
वामिका गब्बी ने अपने करियर की शुरुआत एक बाल कलाकार के रूप में की थी, जब उन्होंने 2007 में इम्तियाज़ अली की फिल्म जब वी मेट में एक छोटी सी भूमिका निभाई थी। इसके बाद, उन्होंने पंजाबी, तमिल, तेलुगु, मलयालम और हिंदी सिनेमा में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। उनकी पहली प्रमुख भूमिका 2013 में पंजाबी फिल्म तू मेरा 22 मैं तेरा 22 और हिंदी फिल्म सिक्सटीन में थी। लेकिन उन्हें असली पहचान 2023 में वेब सीरीज़ जुबली और विशाल भारद्वाज की फिल्म खुफिया से मिली, जिनमें उनकी अभिनय क्षमता की खूब सराहना हुई। जुबली में नीलोफर के किरदार में उनकी शानदार परफॉर्मेंस ने उन्हें критики и зрителей का दिल जीता।
वामिका ने पंजाबी फिल्मों जैसे नikka ज़ैलदार सीरीज़ और काली जोट्टा में भी अपनी छाप छोड़ी। इसके अलावा, उन्होंने ग्रहण (2021), माई: अ मदर्स रेज (2022), और मॉडर्न लव मुंबई जैसी वेब सीरीज़ में अपने अभिनय से दर्शकों का ध्यान खींचा। उनकी हालिया रिलीज़ भूल चूक माफ में राजकुमार राव के साथ उनकी केमिस्ट्री को दर्शकों ने सराहा, हालांकि फिल्म को मिश्रित समीक्षाएँ मिलीं।
वामिका का बयान उस बड़े मुद्दे की ओर इशारा करता है, जो बॉलीवुड और विश्व सिनेमा में लंबे समय से मौजूद है। पुरुष अभिनेताओं को अक्सर उनके स्टारडम और मार्केट वैल्यू के आधार पर भारी-भरकम फीस दी जाती है, जबकि अभिनेत्रियों को उनकी तुलना में काफी कम भुगतान किया जाता है। उदाहरण के लिए, कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार, बॉलीवुड के शीर्ष पुरुष अभिनेताओं की फीस प्रति फिल्म 100 करोड़ रुपये तक हो सकती है, जबकि शीर्ष अभिनेत्रियाँ औसतन 10-20 करोड़ रुपये प्रति फिल्म कमाती हैं।
वामिका ने यह भी बताया कि पुरुष अभिनेताओं की फिल्मों के फ्लॉप होने पर उनकी मार्केट वैल्यू पर कोई खास असर नहीं पड़ता, जबकि अभिनेत्रियों को असफलता के लिए ज्यादा जिम्मेदार ठहराया जाता है। यह दोहरा मापदंड इंडस्ट्री में गहरी जड़ें जमाए हुए है। कई अन्य अभिनेत्रियों जैसे प्रियंका चोपड़ा, कंगना रनौत, और दीपिका पादुकोण ने भी इस मुद्दे पर पहले अपनी आवाज़ उठाई है। प्रियंका ने एक साक्षात्कार में कहा था, “मुझे हॉलीवुड में भी वेतन असमानता का सामना करना पड़ा। यह एक वैश्विक समस्या है, और इसे बदलने में समय लगेगा।”
वामिका गब्बी का करियर तेज़ी से उभर रहा है। उनकी हालिया और आगामी परियोजनाएँ उनकी वर्सटिलिटी को दर्शाती हैं। वह जल्द ही प्रियदर्शन की हॉरर-कॉमेडी भूत बंगला में अक्षय कुमार, तब्बू, और परेश रावल के साथ नजर आएंगी, जिसका रिलीज़ डेट 2 अप्रैल 2026 निर्धारित है। इसके अलावा, वह दिल का दरवाज़ा खोल ना डार्लिंग में सिद्धांत चतुर्वेदी और जया बच्चन के साथ दिखेंगी, और तेलुगु एक्शन-थ्रिलर गुडाचारी 2 में अदीवी शेष के साथ मुख्य भूमिका में होंगी।
वामिका ने हमेशा उन किरदारों को चुना है जो रचनात्मक और पेशेवर रूप से उन्हें चुनौती देते हैं। एक साक्षात्कार में उन्होंने कहा, “मैं उन प्रोजेक्ट्स को चुनती हूँ जो मुझे रचनात्मक रूप से उत्साहित करते हैं और मेरे काम में मूल्य जोड़ते हैं।” उनकी यह सोच उन्हें इंडस्ट्री में एक अलग पहचान दिलाती है।
वामिका गब्बी ने अपने बयान से न केवल फिल्म इंडस्ट्री में मौजूद वेतन असमानता पर सवाल उठाया है, बल्कि एक ऐसी चर्चा को भी हवा दी है जो लंबे समय से दबी हुई थी। उनकी निर्भीकता और प्रतिभा उन्हें आज की पीढ़ी की सबसे होनहार अभिनेत्रियों में से एक बनाती है। भूल चूक माफ और उनकी आगामी परियोजनाओं के साथ, वह निश्चित रूप से और ऊँचाइयों को छूएंगी। हालांकि, अभी भी बहुत कुछ किया जाना बाकी है। इंडस्ट्री को न केवल वेतन में समानता लाने की ज़रूरत है, बल्कि अभिनेत्रियों को उनके योगदान के आधार पर उचित सम्मान और अवसर भी देने होंगे। वामिका का यह बयान उन कई आवाज़ों में से एक है जो इस बदलाव की माँग कर रही हैं। वामिका का बयान न केवल वेतन असमानता के मुद्दे को उजागर करता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि इंडस्ट्री में बदलाव की सख्त ज़रूरत है। ओटीटी प्लेटफॉर्म्स ने इस दिशा में कुछ हद तक बदलाव लाया है, जहाँ नए और प्रतिभाशाली कलाकारों को बड़े प्रोजेक्ट्स में मौका मिल रहा है। वामिका ने भी इस बारे में बात की थी कि ओटीटी ने बजट और कास्टिंग के मामले में असमानता को कम करने में मदद की है।
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