केजरीवाल खुद को वकील, गवाह और जज समझने की भूल न करें, सीएम रेखा गुप्ता ने संवैधानिक संस्थाओं के अपमान पर जताई कड़ी आपत्ति।
दिल्ली की राजनीति में संवैधानिक संस्थाओं के सम्मान और न्यायिक प्रक्रिया को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने
- मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता का अरविंद केजरीवाल पर तीखा प्रहार, न्यायिक व्यवस्था को चुनौती देने वाली मानसिकता पर उठाए गंभीर सवाल
- दिल्ली की राजनीति में गरमाया न्यायपालिका बनाम नेता का विवाद, रेखा गुप्ता ने केजरीवाल के आचरण को बताया लोकतांत्रिक मूल्यों के विरुद्ध
दिल्ली की राजनीति में संवैधानिक संस्थाओं के सम्मान और न्यायिक प्रक्रिया को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर कड़ा प्रहार करते हुए उनकी कार्यशैली को लोकतंत्र के लिए एक नई चुनौती बताया है। आबकारी नीति मामले में चल रही अदालती कार्यवाही और न्यायाधीश के विरुद्ध उठाए गए सवालों पर प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि किसी भी व्यक्ति को कानून से ऊपर होने का भ्रम नहीं पालना चाहिए। उनके अनुसार, जिस तरह से न्यायिक मंचों पर व्यक्तिगत आक्षेप लगाए जा रहे हैं, वह न केवल अशोभनीय है बल्कि भारतीय न्यायपालिका की गरिमा को भी चोट पहुँचाने वाला कृत्य है। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सोमवार को एक प्रेस वार्ता के दौरान अरविंद केजरीवाल की हालिया गतिविधियों और उनके द्वारा अदालत में दिए गए बयानों पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि अरविंद केजरीवाल का वर्तमान रवैया यह दर्शाता है कि वे खुद को ही वकील, गवाह और न्यायाधीश मान बैठे हैं। मुख्यमंत्री के अनुसार, यदि एक ही व्यक्ति यह तय करने लगे कि कौन सा जज सही है और कौन सी अदालत निष्पक्ष, तो फिर देश की सुव्यवस्थित न्याय प्रणाली का कोई अर्थ नहीं रह जाएगा। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि संविधान में शक्तियों का स्पष्ट बंटवारा है और किसी भी नेता को यह अधिकार नहीं है कि वह अपनी सुविधा के अनुसार अदालतों और न्यायाधीशों की सत्यनिष्ठा पर सार्वजनिक रूप से कीचड़ उछाले। इस पूरे प्रकरण की शुरुआत तब हुई जब अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली उच्च न्यायालय में एक याचिका दायर कर आबकारी नीति मामले की सुनवाई कर रही न्यायाधीश को बदलने की मांग की थी। उनकी दलील थी कि संबंधित न्यायाधीश के परिवार के सदस्य केंद्र सरकार के पैनल में वकील हैं, जिससे उन्हें न्याय की उम्मीद कम है। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि न्यायाधीशों के विरुद्ध इस तरह के व्यक्तिगत आरोप लगाना और उन पर पक्षपात का संदेह जताना उनकी पुरानी कार्यशैली का हिस्सा रहा है। उन्होंने तर्क दिया कि जब भी अदालतें उनके विरुद्ध तथ्य रखती हैं, वे संस्थाओं को ही कटघरे में खड़ा करने लगते हैं। मुख्यमंत्री ने इसे एक खतरनाक प्रवृत्ति बताया जो जनता के मन में न्यायपालिका के प्रति अविश्वास पैदा कर सकती है।
मुख्यमंत्री ने इस बात को भी प्रमुखता से उठाया कि अरविंद केजरीवाल द्वारा खुद की तुलना महात्मा गांधी और शहीद-ए-आजम भगत सिंह जैसे राष्ट्रीय नायकों से करना अत्यंत आपत्तिजनक है। उन्होंने कहा कि देश के महान बलिदानियों का नाम अपने व्यक्तिगत भ्रष्टाचार के मामलों में ढाल की तरह उपयोग करना उन महापुरुषों का अपमान है। रेखा गुप्ता के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति स्वयं को पूरी तरह निर्दोष मानता है, तो उसे सत्याग्रह का नाटक करने के बजाय अदालत में सबूतों के साथ अपना पक्ष रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि शराब घोटाले जैसे गंभीर आरोपों में घिरे होने के बाद इस तरह का 'विक्टिम कार्ड' खेलना अब जनता की समझ में आ चुका है और लोग इस राजनीतिक पैंतरेबाजी को भली-भांति पहचानते हैं। दिल्ली उच्च न्यायालय ने भी हाल ही में अरविंद केजरीवाल की उस याचिका को खारिज कर दिया था जिसमें न्यायाधीश को बदलने की मांग की गई थी। अदालत ने स्पष्ट किया कि न्यायाधीशों के परिजनों के पेशेवर करियर को आधार बनाकर पूर्वाग्रह का आरोप लगाना कानूनन आधारहीन है। अदालत ने इसे केवल अनुमान और आशंका पर आधारित तर्क करार दिया था, जिसके बाद मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इसे न्याय की जीत बताया। प्रशासनिक और राजनीतिक स्तर पर रेखा गुप्ता ने यह आरोप भी लगाया कि अरविंद केजरीवाल संवैधानिक मर्यादाओं का लगातार उल्लंघन कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि जांच एजेंसियों और अदालतों के सामने पेश न होने की जिद करना और फिर बाहर बैठकर उन पर आरोप लगाना किसी भी निर्वाचित प्रतिनिधि को शोभा नहीं देता। उन्होंने सवाल किया कि यदि आम आदमी को अदालत का समन मिलता है तो वह उसका सम्मान करता है, लेकिन एक पूर्व मुख्यमंत्री खुद को कानून से बड़ा समझकर अपनी अलग ही अदालत चलाने की कोशिश कर रहे हैं। मुख्यमंत्री का मानना है कि इस तरह के व्यवहार से राज्य की कानून व्यवस्था और प्रशासनिक सुचिता पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
मुख्यमंत्री ने केजरीवाल के उस बयान का भी खंडन किया जिसमें उन्होंने कहा था कि वे अदालत में पेश नहीं होंगे क्योंकि उन्हें वहां न्याय की उम्मीद नहीं है। रेखा गुप्ता ने इसे सीधे तौर पर 'अदालत की अवमानना' और न्यायिक प्रक्रिया में जानबूझकर बाधा डालने वाला कदम बताया। उन्होंने कहा कि जब हजारों पन्नों की चार्जशीट दाखिल हो चुकी हो और मामला गंभीर भ्रष्टाचार से जुड़ा हो, तब न्यायाधीश बदलने की मांग करना केवल समय खराब करने और प्रक्रिया को लंबा खींचने की एक सोची-समझी रणनीति है। मुख्यमंत्री के अनुसार, भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाने का दावा करने वाले लोग आज खुद को बचाने के लिए संस्थानों को नष्ट करने पर तुले हुए हैं। दिल्ली की वर्तमान राजनीतिक स्थिति को देखते हुए मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि जनता सब कुछ देख रही है और वह जानती है कि कौन संविधान की रक्षा कर रहा है और कौन उसे अपनी महत्वाकांक्षाओं के लिए रौंद रहा है। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका पर बार-बार प्रश्न उठाना अब एक फैशन बन गया है, जो कि लोकतंत्र की सेहत के लिए ठीक नहीं है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट चेतावनी दी कि किसी को भी न्यायपालिका की गरिमा को कमतर करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। उन्होंने आह्वान किया कि राजनीति अपनी जगह है, लेकिन देश के स्तंभों का सम्मान करना सभी का सामूहिक उत्तरदायित्व है।
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