बैतूल साइबर ठगी: 9.84 करोड़ की सबसे बड़ी लूट, मृत व्यक्ति का खाता तक इस्तेमाल! बैंक कर्मचारी गिरफ्तार, मैनेजर-कैशियर पर गंभीर सवाल। 

मध्यप्रदेश के बैतूल जिले में बड़ी सायबर ठगी का खुलासा बैतूल पुलिस ने किया  है बता दें कि थाना कोतवाली बैतूल जैसे शांत शहर से  साइबर ठगी

Nov 20, 2025 - 16:46
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बैतूल साइबर ठगी: 9.84 करोड़ की सबसे बड़ी लूट, मृत व्यक्ति का खाता तक इस्तेमाल! बैंक कर्मचारी गिरफ्तार, मैनेजर-कैशियर पर गंभीर सवाल। 

रिपोर्ट- शशांक सोनकपुरिया,बैतूल मध्यप्रदेश

  • सावधान हो सकता है आपके बैंक खातों के भी दुरुपयोग, बैंक खातों के माध्यम से  बैतूल में 9.84 करोड़ की सबसे बड़ी साइबर लूट का पर्दाफाश, मृत व्यक्ति का बैंक खाता भी हो रहा था इस ठगी में इस्तेमाल, बैंक का कर्मचारी भी था ठगी में शामिल, उपलब्ध करवा रहा था बैंक खातों की डिटेल,3 आरोपी गिरफ्तार,बैंक प्रबंधन पर उठ रहे गंभीर सवाल,क्या अब भी छुपाया जा रहा है सच,एक ही बैंक के 7 खातों के हो रहा था इस्तेमाल ,क्या बैंक मैनेजर और कैशियर को नही लग पाई इसकी भनक, पुलिस को क्यों नही किया गया सूचित, मामले में उठ रहे कई सवाल

मध्यप्रदेश के बैतूल जिले में बड़ी सायबर ठगी का खुलासा बैतूल पुलिस ने किया  है बता दें कि थाना कोतवाली बैतूल जैसे शांत शहर से  साइबर ठगी का आज ऐसा  सनसनीखेज मामला सामने आया है जिसने पूरे प्रदेश में साइबर सुरक्षा को लेकर नई बहस छेड़ दी है। जिले की पुलिस और साइबर सेल ने मिलकर लगभग 9 करोड़ 84 लाख रुपये की एक संगठित साइबर ठगी का भंडाफोड़ किया है। यह खुलासा SP वीरेंद्र जैन और ASP कमला जोशी के सीधे निर्देशन एवं एसडीओपी बैतूल सुनील लाटा के मार्गदर्शन में की गई हाई-टेक जांच का नतीजा है। जिसमें  साइबर टीम का विशेष योगदान रहा है।

  • शिकायत से शुरू हुई बड़ी कार्रवाई 

बैतूल में एक मजदूरी करने वाले व्यक्ति बिसराम इवने, उम्र 40 वर्ष, निवासी खेड़ी सावलीगढ़ (थाना कोतवाली क्षेत्र) ने कलेक्टर और SP कार्यालय बैतूल में एक लिखित जाच आवेदन दिया। आवेदक ने बताया कि उसके जन-धन खाते में लगभग 2 करोड़ रुपये के संदिग्ध लेन-देन दिखाई दे रहे हैं, जिनकी उसे कोई जानकारी नहीं थी। जब वह बैंक में KYC कराने गयो, तभी उसे इन भारी-भरकम ट्रांजैक्शनो का पता चला। शिकायत की गंभीरता देखते हुए SP के निर्देशानुसार साइबर सेल बैतूल ने तत्काल जांच प्रारंभ की। प्रारंभिक जाँच में पता चला कि जून 2025 से अब तक उसके खाते से लगभग 1.5 करोड़ रुपये का अवैध ट्रांजैक्शन किया गया था।

  • 7 खातों से करोड़ों के लेन देन खाता धारक भी इससे अंजान

जांच में सामने आया कि एक ही बैंक के 7 अलग-अलग व्यक्तियों के बैंक खातों को निशाना बनाते हुए गिरोह ने ₹98,495,212 रुपये की हेराफेरी की। खाता धारकों में बिस्राम इवने, नर्मदा इवने, मुकेश उइके, नितेश उइके, राजेश बर्डे, अमोल और चंदन के नाम शामिल हैं। इन खाताधारकों में मृत व्यक्ति का नाम देखकर जांच टीम भी चौंक उठी।

  • मरने के बाद भी खाते का इस्तेमाल मोबाइल नंबर बदला, ATM कार्ड बनवाया, और करोड़ों उड़ाए

मुख्य गिरोह ने अपने कार्य को अंजाम देने के लिए मृत व्यक्ति राजेश बर्डे के खाते का भी किया इस्तेमाला चौकाने वाली बात यह रही कि मृतक राजेश बार्ड के खाते का उतनी ही सक्रियता से उपयोग किया जा रहा था, जैसे कोई जिंदा ग्राहक करता है।

गिरोह ने मोबाइल नंबर बदला, ATM कार्ड जारी कराया, इंटरनेट/मोबाइल बैंकिंग का लिया एक्सेस, OTP पर कब्जा जमाया, और फिर मृत व्यक्ति के खाते से लगातार ऊँची रकम के लेन-देन किए। यह खुलासा पूरे केस का सबसे भयावह पहलू बनकर उभरा है।

  • बैंक में कार्यरत निजी व्यक्ति की मिलीभगत- अंदरूनी जानकारी लीक -

पुलिस जाँच में पाया गया कि बैंक में पासबुक एंट्री करने वाला एक टेंपररी कर्मचारी ही इस गिरोह का मुख्य सहयोगी था। जिसकी सहायता से गिरोह के हाथ बैंक शाखा की गोपनीय ग्राहक जानकारी तक पहुँच चुके थे,

जिसके जरिए पूरी वित्तीय फर्जीवाड़े की मशीनरी चलाई गई।

इसने - ग्राहक के दस्तावेजों से छेड़छाड़, खातों में फर्जी मोबाइल नंबर लिंक कराना, ATM कार्ड जारी कराना पासबुक/चेकबुक का अनधिकृत उपयोग जैसे कार्यों के जरिए गिरोह को खातों तक अंदरूनी पहुंच उपलब्ध कराई। मुख्य अपचारी राजा राजपूत ने बैंक में काम करते हुए कई खातों की संवेदनशील जानकारी अवैध रूप से हासिल की। इसके तार जिले से बाहर बैठे साइबर अपराधियों से जुड़े पाए गएण

  • 'किट ट्रांसफर' का नेटवर्क खाते की पूरी किट इंदौर भेजी जाती थी 

गिरोह प्रत्येक लक्षित खाते की एक किट तैयार करता था, जिसमे लिंक की गई सिम, ATM कार्ड, पासबुक, चेकबुक शामिल रहती थी। यह किट बस के माध्यम से इंदौर भेजी जाती थी, जहाँ से बाहरी फ्रॉडिस्टर बड़े ट्रांजैक्शन को अंजाम देते थे।

  • पुलिस की कार्रवाई इंदौर में स्थित 2 ठिकानों पर छापे, तीन गिरफ्तार

तकनीकी विश्लेषण के आधार पर बैतूल पुलिस ने इंदौर में आरोपियों के दो ठिकानों पर दबिश दी और

बड़ी मात्रा में सामग्री जब्त की- अद्यतन जप्त सामग्री:-

01. 15 मोबाइल फोन (25 सिन सहित),

02. 21 ATM कार्ड, ₹28,000 नकद (काले बैग में).

03. 11 बैंक पासबुक,

04. 7 चेकबुक,

05. 2 POS मशीन,

06. 69 ATM जमा रसीदें (21 लाख जमा),

07. 248,000 की जमा पर्ची,

08. 2 लैपटॉप,

09. 1 Extreme Fiber राउटर,

10. 4 रजिस्टर व डायरी (रिकॉर्ड),

-गिरफ्तार आरोपी

1- राजा उर्फ आयुष चौहान, 28 वर्ष, निवासी खेडी (सावलीगढ़)

2- अंकित राजपूत, 32 वर्ष, निवासी इंदौर

3- नरेंद्र सिंह राजपुत, 24 वर्ष, निवासी इंदौर

  • SP का बयान 

SP वीरेंद्र जैन- "इस जटिल साइबर ठगी को टीम ने तकनीकी दक्षता और बेहतरीन तालमेल के साथ उजागर किया। जिले के बाहर की गई कार्रवाई में भी टीम ने शानदार प्रोफेशनलिज्म का प्रदर्शन किया है।

  • आगे क्या

जप्त उपकरणों का फॉरेंसिक विश्लेषण जारी, गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश, मृतक राजेश बार्डे के खाते की पूरी ट्रांजैक्शन चेन तैयार, बैतूल पुलिस का संकल्प, "जन सुरक्षा और साइबर सुरक्षा, दोनों पर सख्त पहरा" यह कार्रवाई निश्चित रूप से साइबर अपराधियों के लिए बड़ा झटका साबित होगी।

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