Lucknow: लखीमपुर के चेतन वीर सिंह ने साकार किया योगी सरकार के ‘आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश’ का संकल्प। 

उत्तर प्रदेश के युवा वित्तीय सहायता, कौशल प्रशिक्षण और स्वरोजगार योजनाओं के माध्यम से आत्मनिर्भर बन रहे हैं। सरकार का लक्ष्य

By INA News Desk
Mar 18, 2026 - 19:28
71 Views
Lucknow: लखीमपुर के चेतन वीर सिंह ने साकार किया योगी सरकार के ‘आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश’ का संकल्प। 
लखीमपुर के चेतन वीर सिंह ने साकार किया योगी सरकार के ‘आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश’ का संकल्प। 
  • पीएमईजीपी योजना के तहत मिला 10 लाख का ऋण, गुड़ उद्योग से 15 लोगों को मिला रोजगार
  • गन्ने से कमाई का नया मॉडल: चेतन वीर सिंह की मेहनत से लाखों की आमदनी
  • हर दिन 25 से 26 क्विंटल गुड़ उत्पादन, उत्तर प्रदेश समेत बंगाल और बिहार से भी मिल रहे ऑर्डर

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के युवा वित्तीय सहायता, कौशल प्रशिक्षण और स्वरोजगार योजनाओं के माध्यम से आत्मनिर्भर बन रहे हैं। सरकार का लक्ष्य युवाओं को 'रोजगार मांगने वाला नही, बल्कि 'रोजगार देने वाला' बनाना है। योगी सरकार के इसी लक्ष्य के साथ लखीमपुर खीरी के विकासखंड फूलबेहड़ के चेतन वीर सिंह ने गुड़ कोल्हू लगाकर उद्यम की शुरुआत की। चेतन वीर सिंह ने योगी सरकार के ‘आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश’ के संकल्प को जमीन पर उतारकर 15 लोगों को रोजगार देने का काम किया है।

चेतन वीर सिंह ने बताया कि 2022 में गुड़ कोल्हू लगाकर अपने उद्यम की शुरुआत की थी। उनको प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP) योजना के बारे में जानकारी मिली। इसके बाद उन्होंने पीएमईजीपी योजना के तहत 10 लाख रुपए के ऋण के लिए अप्लाई किया। सरकारी वित्तीय सहायता मिलने के बाद उन्होंने कोल्हू लगाकर काम शुरू किया। आज वे 15 लोगों के साथ मिलकर काम कर रहे हैं और रोज 200 क्विंटल गन्ने की पिराई करते है। उन्होंने ड्रायर लगाकर गन्ने की खोई को सुखाने का नया तरीका निकाला है, जिससे लेबर के खर्च की पूरी बचत होती है। वे हर रोज 25 से 26 क्विंटल गुड़ बनाते हैं, इनको पूरे उत्तर प्रदेश समेत बंगाल और बिहार तक से ऑर्डर मिलते हैं। चेतन वीर सिंह अपने 6 एकड़ में गन्ने की खेती करते हैं, इसके अलावा अन्य किसानों से भी गन्ना खरीदते हैं। आज चेतन वीर सिंह लाखों की कमाई कर रहे हैं। 

प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम यानी (PMEGP) भारत सरकार की एक क्रेडिट-लिंक्ड सब्सिडी योजना है, जो ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSME) की स्थापना के लिए ऋण प्रदान करती है। इस योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों के लिए और शहरी क्षेत्रों के लिए अलग- अलग सब्सिडी का भी प्रावधान है, जो श्रेणी के आधार पर होता है। विनिर्माण क्षेत्र में 50 लाख रुपये और सेवा क्षेत्र में 20 लाख रुपये तक के ऋण का प्रावधान करती है, जिसका उद्देश्य युवाओं को स्वरोजगार और नए उद्यम शुरू करने में सहायता करना है। 

इस योजना के लिए 18 वर्ष से अधिक आयु के व्यक्ति, स्वयं सहायता समूह, या सहकारी समितियां आवेदन कर सकती हैं। सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय द्वारा केवीआईसी, केवीआईबी और जिला उद्योग केंद्र के माध्यम से संचालित की जाती है। योजना के तहत फूड प्रोसेसिंग, कृषि उपकरण, कपड़े, या कागज के उत्पाद बनाने वाली छोटी इकाइयां लगाना, कंप्यूटर सेंटर, गैरेज, बुटीक या छोटी वर्कशॉप खोलना आदि शामिल है।

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