Hardoi: नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर हरदोई में सम्मेलन: महिला आरक्षण को बताया देश की प्रगति का आधार।
श्रीश चंद्र बारात घर में नारी शक्ति वंदन अधिनियम के समर्थन में आयोजित "नारी शक्ति सम्मेलन" में मुख्य अतिथि जिलाध्यक्ष अजीत सिंह बब्बन
हरदोई के श्रीश चंद्र बारात घर में नारी शक्ति वंदन अधिनियम के समर्थन में आयोजित "नारी शक्ति सम्मेलन" में मुख्य अतिथि जिलाध्यक्ष अजीत सिंह बब्बन ने महिला आरक्षण को देश की प्रगति का आधार बताया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में पेश 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम संशोधन 2026' महज एक संवैधानिक संशोधन नहीं, बल्कि विकसित भारत के निर्माण की दिशा में एक ऐतिहासिक सामाजिक क्रांति है। लोकसभा और विधानसभाओं में ३३ प्रतिशत आरक्षण महिलाओं को नीति निर्धारण के केंद्र में लाएगा। कहा कि जब आधी आबादी विधायी प्रक्रियाओं में निर्णय लेगी, तो शासन में अनुशासन और संवेदनशीलता बढ़ेगी, जिससे राष्ट्र को एक सशक्त और समावेशी आधार मिलेगा। सम्मेलन की अध्यक्षता कीर्ति सिंह ने एवं संचालन जिला उपाध्यक्ष अलका गुप्ता ने किया। वहीं सांडी में आयोजित नारी शक्ति सम्मेलन में बतौर मुख्य अतिथि जिला पंचायत अध्यक्ष प्रेमावती ने महिला आरक्षण और सशक्तिकरण पर महिलाओं को संबोधित किया। कार्यक्रम का संचालन जिला मंत्री नीतू चंद्रा ने किया। जिला अभियान संयोजक सौरभ सिंह गौर के नेतृत्व में कार्यक्रम सम्पन्न हुए।
नारी शक्ति सम्मेलन में महिलाओं को संबोधित करते हुए जिलाध्यक्ष अजीत सिंह बब्बन ने 33 प्रतिशत आरक्षण को नए युग का सूत्रपात बताया। कहा कि पंचायत से संसद तक एक नया सवेरा होने जा रहा है। पीएम मोदी के नेतृत्व में भारत के लोकतांत्रिक इतिहास में एक ऐतिहासिक अध्याय लिखा जा रहा है। जिस प्रकार ७३वें और ७४वें संविधान संशोधन ने गांवों की पंचायतों और स्थानीय निकायों में महिलाओं को प्रतिनिधित्व देकर जमीनी स्तर पर नेतृत्व की पौध तैयार की, उसी प्रकार अब ३३ प्रतिशत आरक्षण का यह विस्तार राज्य विधानसभाओं और देश की संसद में महिलाओं की निर्णायक भूमिका सुनिश्चित करेगा। अब 'चूल्हे से संसद' तक की यात्रा केवल एक मुहावरा नहीं, बल्कि एक संवैधानिक अधिकार होगा।
जिलाध्यक्ष ने देश और समाज में महिलाओं के योगदान पर कहा कि महिलाएं अनुशासित नीति निर्धारण का आधार होती है। महिलाएं स्वभाव से ही प्रबंधन और अनुशासन की प्रतीक होती हैं। जब नीति निर्धारण की मेज पर महिलाओं की भागीदारी बढ़ेगी, तो कानून और योजनाओं में संवेदनशीलता और दूरदर्शिता का समावेश होगा। इससे जनता को अनुशासित शासन मिलेगा। महिला जनप्रतिनिधियों के आने से विधायी कार्यों में अधिक जवाबदेही और कार्य के प्रति अनुशासन देखने को मिलेगा।
सम्मेलन में मौजूद विशिष्ट अतिथि अनुपमा सिंह ने कहा कि स्वास्थ्य, शिक्षा और पोषण जैसे विषयों पर महिलाओं का अनुभव, नीतियों को अधिक व्यावहारिक और प्रभावी बनाएगा। कहा कि प्रधानमंत्री के 'विकसित भारत' के संकल्प को तब तक प्राप्त नहीं किया जा सकता, जब तक आधी आबादी नेतृत्वकारी भूमिका में न हो। यह आरक्षण महिलाओं को विकास की लाभार्थी से हटाकर 'विकास की संचालक' के रूप में स्थापित करेगा। कहा कि सदियों से चली आ रही पितृसत्तात्मक सोच और पुरुष प्रधान राजनीतिक ढांचे पर कहा कि यह आरक्षण एक 'सकारात्मक हस्तक्षेप' है। इससे सामाजिक न्याय और समानता आएगी। यह अधिनियम राजनीतिक क्षेत्र में लैंगिक अंतर को खत्म कर सामाजिक न्याय की दिशा में एक बड़ा कदम है।
सम्मेलन को संबोधित करते हुए कीर्ति सिंह ने महिलाएं के रोल मॉडल बनने पर कहा कि गांव से लेकर देश में अपना परचम लहराने वाली महिलाएं करोड़ों बालिकाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेंगी, जिससे समाज के प्रति दृष्टिकोण में बदलाव आएगा। कहा कि यह 33 प्रतिशत आरक्षण केवल सीटों का आवंटन नहीं, बल्कि भारत की नारी शक्ति के प्रति सम्मान और विश्वास का प्रतीक है। यह बदलाव पंचायतों में सफल साबित हो चुका है, जहाँ 14 लाख से अधिक महिला प्रतिनिधि सक्रिय हैं। अब समय आ गया है कि यही शक्ति देश की सर्वोच्च नीतियों को दिशा दे। अनुशासित नीति निर्धारण और महिला नेतृत्व वाला विकास ही एक सशक्त, समृद्ध और विकसित भारत का वास्तविक आधार बनेगा।
कार्यक्रम में पूनम, मधुबाला गुप्ता, रीना गुप्ता, निधि सिंह, अनुराधा मिश्रा और सुहाना जैन ने भी नारी शक्ति वंदन अधिनियम संशोधन 2026 को अपना समर्थन दिया। सुमन सिंह, नेहा कश्यप, मंजू सिंह सहित भारी संख्या में महिलाएं उपस्थित रहीं।
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