Hardoi : हरदोई में नकली कोडीनयुक्त खांसी सिरप का बड़ा खुलासा- 1500 बोतलें जब्त, पिता-पुत्र पर मुकदमा

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, भारत में नकली दवाओं का कारोबार सालाना 200 बिलियन डॉलर का है, जो लाखों लोगों की जान को जोखिम में डाल रहा है। हाल ही में मध्य

Feb 26, 2026 - 18:22
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Hardoi : हरदोई में नकली कोडीनयुक्त खांसी सिरप का बड़ा खुलासा- 1500 बोतलें जब्त, पिता-पुत्र पर मुकदमा
Hardoi : हरदोई में नकली कोडीनयुक्त खांसी सिरप का बड़ा खुलासा- 1500 बोतलें जब्त, पिता-पुत्र पर मुकदमा

हरदोई। उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले में नकली दवाओं के एक बड़े गिरोह का पर्दाफाश हुआ है। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन की टीम ने कोडीनयुक्त खांसी की दवा फेनेसिपिक-टी सिरप की 1499 बोतलें जब्त की हैं। यह दवा सरकारी अस्पतालों, स्वास्थ्य केंद्रों और निजी मेडिकल स्टोरों तक पहुंच चुकी थी। जांच में पता चला कि लखनऊ की कथित कंपनी इधिका लाइफसाइंसेज के नाम पर यह सिरप बनाया और बेचा जा रहा था, लेकिन कंपनी ने कभी ऐसी कोई दवा उत्पादित ही नहीं की। बोतलों के लेबल, बैच नंबर और पैकिंग सब नकली साबित हुए। इस मामले में हरदोई के निवासी मोहम्मद इरशाद और उनके बेटे जावेद खान पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4), 336(3), 338, 340(2) और 271 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। विभाग ने लोगों से अपील की है कि संदिग्ध दवाओं की जानकारी तुरंत अधिकारियों को दें और बिना बिल वाली दवा न खरीदें।विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, भारत में नकली दवाओं का कारोबार सालाना 200 बिलियन डॉलर का है, जो लाखों लोगों की जान को जोखिम में डाल रहा है। हाल ही में मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा में जहरीले कफ सिरप से 24 बच्चों की मौत हुई, जबकि राजस्थान और अन्य राज्यों में भी इसी तरह के मामले सामने आए। हरदोई का यह केस भी इसी श्रृंखला का हिस्सा लगता है, जहां नशे के लिए इस्तेमाल होने वाली कोडीन वाली दवाओं का अवैध कारोबार फल-फूल रहा है।

जांच की शुरुआत और सैंपलिंग का राज

जांच की शुरुआत जिले के विभिन्न स्वास्थ्य केंद्रों से हुई। कछौना, शाहाबाद, पिहानी, संडीला और जिला अस्पताल से एकत्र सैंपलों की गुणवत्ता जांच में फेल होने पर औषधि विभाग अलर्ट हो गया। लखनऊ मंडल के सहायक आयुक्त (औषधि) बृजेश कुमार के निर्देश पर 16 अक्टूबर 2025 को औषधि निरीक्षक ने सत्यापन शुरू किया। पत्रांक संख्या औ.नि./सत्यापन/2025-26/576 के आधार पर लखनऊ मेडिकल एजेंसी प्राइवेट लिमिटेड का भौतिक सत्यापन किया गया। यह फर्म ग्राम मीटू, बरौनी चुंगी के पास, थाना संडीला में स्थित है। प्रोप्राइटर मोहम्मद जावेद रब्बानी पुत्र मोहम्मद इस्माइल ने दावा किया कि उन्होंने इधिका लाइफसाइंसेज से इनवॉइस संख्या आईएलडी0772, दिनांक 14 अक्टूबर 2024 के तहत 1500 बोतलें (बैच नंबर एएल-6115 एक बोतल और एएल-612515 1499 बोतलें) खरीदी थीं। लेकिन जांच में कोई स्टॉक नहीं मिला। बल्कि पाया गया कि यह सिरप नशे के लिए बेचा जा रहा था। फर्म ने बिल, लेजर खाता और अभिलेख नहीं दिखाए, जिसके चलते दवा एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम 1940 की धारा 22(1)(d) के तहत विक्रय तत्काल प्रतिबंधित कर दिया गया।इसके बाद 1 नवंबर 2025 को जावेद रब्बानी ने प्रतिउत्तर दिया, जिसमें दावा किया कि दवा लखनऊ से खरीदी गई। लेकिन भौतिक सत्यापन में फर्जीवाड़ा साफ हो गया। फर्म ने 1500 बोतलें खरीद दिखाईं, लेकिन 1525 बोतलें विभिन्न जगहों पर बेचने के फर्जी बिल जारी किए। ये बिल संडीला सेवा अस्पताल, अरीबा अस्पताल, सहर अस्पताल, मैक्स अस्पताल, माही हेल्थ क्लिनिक, ऊषा अस्पताल, डॉक्टर अनिल कुमार, डॉक्टर दर्शन कुमार, पाल मेडिकल स्टोर, भारत मेडिकल स्टोर, ओम त्रिपाठी मेडिकल स्टोर, सखावत फार्मेसी गौसगंज, पाल मेडिकल स्टोर कासिमपुर, सभी मेडिकल स्टोर गौसगंज, ओम मेडिकल स्टोर गौसगंज, वसी मेडिकल स्टोर गौसगंज, प्रशांत मेडिकल स्टोर और अन्य झोलाछाप डॉक्टरों के नाम पर बने थे। बिलों पर फर्जी मोबाइल नंबर थे, जिन पर कॉल करने पर अन्य व्यक्ति जुड़े पाए गए।

गिरोह का नेटवर्क और जब्ती की कार्रवाई

औषधि विभाग की छापेमारी में साफ हुआ कि मोहम्मद इरशाद और जावेद खान लंबे समय से यह नकली सिरप तैयार कर रहे थे। वे जिले के कई मेडिकल स्टोर और सप्लाई पॉइंट्स पर बिना बिल के बेच रहे थे। कोडीनयुक्त यह सिरप खांसी के इलाज के नाम पर बिकता था, लेकिन वास्तव में नशे के लिए इस्तेमाल हो रहा था। इधिका लाइफसाइंसेज, जो एफ-69, फेज-2, ग्राउंड फ्लोर, ट्रांसपोर्ट नगर, एलडीए कॉलोनी, लखनऊ में स्थित है, ने वित्तीय वर्ष 2024-25 और 2025-26 में ऐसी कोई आपूर्ति नहीं की। जांच में कंपनी के अभिलेखों से पुष्टि हुई कि बैच नंबर फर्जी हैं। टीम ने 21 नवंबर 2025 को थाना संडीला में प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कराई। आरोपी मोहम्मद जावेद रब्बानी को गिरफ्तारी की प्रक्रिया चल रही है।

यह कार्रवाई आयुक्त खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन, यूपी के निर्देशों का पालन थी। सेक्टर-सी, अलीगंज, लखनऊ से जारी आदेशों के तहत लखनऊ मंडल ने त्वरित कदम उठाया। जब्त बोतलों की कुल संख्या 1499 है, जो बिना किसी वैध दस्तावेज के बिक रही थीं। विभाग ने फर्म का लाइसेंस निलंबित कर दिया और आगे की जांच के लिए सैंपल लखनऊ लैब भेजे। यह सिरप जन स्वास्थ्य के लिए घातक है, क्योंकि कोडीन की गलत मात्रा से सांस लेने में दिक्कत, लत और मौत तक हो सकती है।देशभर में नकली दवाओं के मामले बढ़ रहे हैं। अगस्त 2025 में आगरा में नकली दवा सिंडिकेट का भंडाफोड़ हुआ, जो तमिलनाडु, पुडुचेरी और यूपी तक फैला था। वहां 10 फर्मों से करोड़ों की नकली दवाएं जब्त हुईं। इसी तरह जुलाई 2025 में हिमाचल के कांगड़ा में एक फैक्ट्री पकड़ी गई, जहां कैप्सूल और प्रिंटिंग मशीनें बरामद हुईं। जनवरी 2025 में दिल्ली-एनसीआर में दिल्ली पुलिस ने गोदामों पर छापा मारा, जहां नकली दवाओं का मास्टरमाइंड एक डॉक्टर था। ये मामले दिखाते हैं कि नकली दवाओं का जाल राष्ट्रीय स्तर पर है।

फर्जी दस्तावेजों का खेल और नशे का कारोबार

मोहम्मद जावेद रब्बानी ने कूटरचित दस्तावेज बनाकर दावा किया कि दवा वैध है। लेकिन सत्यापन में पाया गया कि खरीद-विक्रय के बिल फर्जी हैं। फर्म ने हॉस्पिटलों और डॉक्टरों के नाम पर 1525 बोतलें बेचने के रिकॉर्ड बनाए, जबकि खरीद सिर्फ 1500 दिखाई। यह अतिरिक्त मात्रा नशे के लिए अवैध बिक्री का संकेत है। कोडीन एक ओपिओइड है, जो डॉक्टर के पर्चे के बिना नशे की लत लगाता है। नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के अनुसार, ऐसे सिरप युवाओं में नशे का प्रमुख स्रोत बन चुके हैं। बिलों पर अंकित फर्जी नंबरों से संपर्क करने पर पता चला कि वे असली प्राप्तकर्ताओं से जुड़े नहीं। विभाग ने सहायक आयुक्त के निर्देश पर तत्काल एफआईआर दर्ज की। यह साबित करता है कि आरोपी जानबूझकर तथ्यों को छिपा रहे थे, जिससे आम लोगों को विषैली दवा मिल रही थी।

फर्म का पता हरदोई रोड, बरौनी चुंगी के पास, मीटू गांव है। यहां से सप्लाई जिले भर में हो रही थी। औषधि निरीक्षक ने मौके पर स्टॉक चेक किया, लेकिन कुछ नहीं मिला। प्रतिउत्तर में दिए गए दस्तावेज भी सत्यापन में फेल हो गए। अब पुलिस आरोपी को गिरफ्तार करने की तैयारी में है।

जन स्वास्थ्य पर खतरा और विभाग की अपील

नकली फेनेसिपिक-टी सिरप में कोडीन की अनियंत्रित मात्रा से सांस की तकलीफ, हृदय गति अनियमित होना और किडनी फेलियर जैसी समस्याएं हो सकती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे सिरप बच्चों और बुजुर्गों के लिए घातक हैं। हाल के महीनों में तमिलनाडु के कोल्ड्रिफ सिरप में जहरीला केमिकल मिला, जिससे हड़कंप मच गया। यूपी में कानपुर की दो फैक्टरियां पकड़ी गईं, जहां 434 प्रकार की नकली दवाएं बन रही थीं। कीमत 4.5 करोड़ रुपये बताई गई। ये दवाएं अफ्रीका तक निर्यात हो रही थीं।

खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन ने चेतावनी जारी की है। लोग दवा खरीदते समय बिल लें, बैच नंबर चेक करें और संदिग्ध दवा पर तुरंत रिपोर्ट करें। हेल्पलाइन नंबर 1800-180-5505 पर शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। विभाग ने सभी मेडिकल स्टोरों को नोटिस भेजा है कि वैध लाइसेंस के बिना कोडीन वाली दवाएं न रखें। आगरा में सितंबर 2025 में 14 दवाओं पर बिक्री प्रतिबंध लगा, जिसमें कफ सिरप शामिल था।

यह केस नकली दवा माफिया के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग करता है। सरकार ने सीडीएससीओ को निर्देश दिए हैं कि जांच तेज करें। हरदोई प्रशासन अब पूरे जिले में सर्वे चला रहा है ताकि अन्य गिरोह पकड़े जा सकें। लोगों को जागरूक करने के लिए कैंप लगाए जा रहे हैं।

कानूनी कार्रवाई और आगे की जांच

मुकदमा थाना संडीला में दर्ज हुआ। धारा 318(4) धोखाधड़ी, 336(3) लापरवाही से खतरा, 338 गंभीर चोट पहुंचाने का प्रयास, 340(2) फर्जी दस्तावेज और 271 महामारी फैलाने का आरोप है। आरोपी पिता-पुत्र को जल्द गिरफ्तार किया जाएगा। फर्म का लाइसेंस रद्द हो चुका है। लखनऊ मंडल ने अन्य जिलों में भी जांच शुरू की है। यदि अन्य फर्में जुड़ी पाईं, तो बड़ा नेटवर्क उजागर हो सकता है। विभाग ने कहा कि नकली दवाओं से सालाना हजारों मौतें होती हैं। यूपी में 2025 में 50 से ज्यादा ऐसे मामले दर्ज हुए। सख्ती से कारोबार रोका जा सकता है। लोग डॉक्टर की सलाह पर ही दवा लें।

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